ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को और कड़ा किया जायेगाः जॉन बोल्टन
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जॉन बोल्टन ने ट्वीट करके कहा कि हम अधिक से अधिक दबाव को उस वक्त तक जारी रखेंगे जब तक तेहरान अपने अस्वीकार्य रवइये को परिवर्तित नहीं करता।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Apr ०२, २०१९ १६:२५ Asia/Kolkata

जॉन बोल्टन ने ट्वीट करके कहा कि हम अधिक से अधिक दबाव को उस वक्त तक जारी रखेंगे जब तक तेहरान अपने अस्वीकार्य रवइये को परिवर्तित नहीं करता।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान की इस्लामी व्यवस्था को उखाड़ फेकने की नीति अपना रखी है चाहे वह उनके चुनावी प्रचार  का समय रहा हो या अमेरिका का राष्ट्रपति बन जाने के बाद का समय।

ट्रंप ने ईरान के साथ होने वाले परमाणु समझौते से निकलने और ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों को दोबारा बहाल कर देने के बाद आर्थिक युद्ध आरंभ कर दिया है और इससे उनका लक्ष्य ईरान में निर्धनता, अशांति और असुरक्षा में वृद्धि है।

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जान बोल्टन ने भी सोमवार को ईरानी जनता के खिलाफ प्रतिबंधों को कड़ा से कड़ा करने की बात कही है। 12 फरवरदीन अर्थात पहली अप्रैल सोमवार को जान बोल्टन ने ईरान विरोधी अपनी बातों व धमकियों से दर्शा दिया कि ट्रंप सरकार के निकट ईरानी जनता का कोई महत्व नहीं है।

रोचक बात यह है कि ट्रंप सरकार सदैव यह दावा करती है कि उसे ईरानी जनता से कोई समस्या नहीं है। जान बोल्टन ने ट्वीट करके कहा कि हम अधिक से अधिक दबाव को उस वक्त तक जारी रखेंगे जब तक तेहरान अपने अस्वीकार्य रवइये को परिवर्तित नहीं करता।

उन्होंने ट्वीट पर लिखा कि ईरान क्षेत्र के लिए खतरा है और वह विवाद को हवा देता है ताकि क्षेत्र में अपना प्रभाव विस्तृत करे और कम से कम खर्च में अपने पड़ोसियों को डरा सके।  

इसी प्रकार ट्रंप सरकार ईरान से मुकाबले के बहाने उस पर आतंकवाद के समर्थन का आरोप मढ़ती है ताकि सीरिया और इराक सहित मध्यपूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति का औचित्य दर्शा सके।

ईरान के खिलाफ अमेरिका के जो ग़ैर कानूनी प्रतिबंध हैं उसका एक लक्ष्य वित्तीय स्रोतों तक पहुंच से ईरान को वंचित करना है। दूसरे शब्दों में ईरान को उसकी रचनात्मक भूमिका से रोकने के लिए प्रतिबंधों को कड़ा से कड़ा बनाया जा रहा है।

अमेरिका सोचता है कि वह तेहरान के खिलाफ दुष्प्रचार करके और अभूतपूर्व दबाव डालकर ईरान को अपनी मांगों के समक्ष घुटने टेकने पर बाध्य कर देगा परंतु ईरान के संबंध में ट्रंप के क्रिया- कलाप दर्शाते हैं कि उन्हें ईरानियों की सही पहचान नहीं है।

गत चालिस वर्षों के अनुभव इस बात के सूचक हैं कि ईरान के खिलाफ जितना भी विदेशी दबाव में वृद्धि होती है उतना ही वह ईरानी जनता की एकजुटता व समरसता में वृद्धि का कारण बनता है। MM