ट्रंप ने किसी प्रमाण के बिना ईरान पर आरोप क्यों मढ़ा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को फाक्स न्यूज़ चैनल से साक्षात्कार में कहा था कि ओमान सागर में तेल टैंकर में आग लगने की घटना में ईरान का हाथ है।
डोनल्ड ट्रंप के सत्ताकाल में अमेरिका पश्चिम एशिया विशेषकर फार्स की खाड़ी में उन चुनौतियों से मुकाबले के लिए अधिक प्रयास कर रहा है जिसे वह अरब विशेषकर फार्स की खाड़ी के देशों के लिए ख़तरा बनाकर पेश कर रहा है।
अमेरिका के इस प्रयास को रूस की नकारात्मक प्रतिक्रिया का सामना है। गुरूवार को ओमान सागर में दो तेल टैंकरों में आग लग गयी थी जिसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने किसी प्रकार के प्रमाण के बिना इसका आरोप ईरान पर मढ़ दिया और कहा कि इन घटनाओं में ईरान का हाथ है।
अमेरिका के इस निराधार आरोप पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए रूस ने ईरान पर दबाव डालने और तनावों को हवा देने के बारे में चेतावनी दी है। रूसी विदेशमंत्रालय ने 14 जून को एक विज्ञप्ति जारी करके ईरान विरोधी अमेरिकी रवइये को ओमान सागर सहित पश्चिम एशिया में तनाव का कारण बताया।
इसी प्रकार रूसी विदेशमंत्रालय की ओर से जारी होने वाली विज्ञप्ति में इन घटनाओं के संबंध में हर प्रकार की जांच से पहले उतावले में निकाले गये नतीजे के प्रति चेतावनी दी और बल देकर कहा कि इस संबंध में जांच पूरी होने से पहले किसी को ज़िम्मेदार नहीं बताना चाहिये।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को फाक्स न्यूज़ चैनल से साक्षात्कार में कहा था कि ओमान सागर में तेल टैंकर में आग लगने की घटना में ईरान का हाथ है। दूसरे शब्दों में ईरान विरोधी ट्रंप के इस बयान को भी तेहरान पर अधिक से अधिक दबाव डाले जाने के अमेरिकी रवइये के परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।
इतना सब करने के बावजूद ट्रंप का तेहरान विरोधी प्रयास विफल हो गया। रोचक बात यह है कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब इमारात या ब्रिटेन के अलावा अमेरिका की हां में हां में किसी भी देश ने नहीं मिलायी और इस संबंध में अमेरिका के दूसरे घटकों का भी दृष्टिकोण अमेरिका से अलग था।
जर्मनी के विदेशमंत्री हाइको मास ने अमेरिका की ओर से दिखाई जाने वाली उस वीडियो की ओर संकेत किया जिसमें ईरानी नाव को जापानी तेल टैंकर के निकट आते दिखाया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जो वीडियो दिखाया है वह इस बात को सिद्ध करने के लिए काफी नहीं है कि जापानी तेल टैंकर पर हमले में ईरान की भूमिका थी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसी प्रकार की प्रतिक्रिया दिखाई गयी है।
राष्ट्रसंघ के महासचिव एन्टोनियो गुटेरस ने ओमान सागर में जापानी तेल टैंकर पर होने वाले हमले की भर्त्सना की और कहा है कि इससे संबंधित प्रमाणों की अलग व स्वतंत्र ढंग जांच की जानी चाहिये।
बहरहाल ईरान ने बारमबार फार्स की खाड़ी में शांति व सुरक्षा बनाये रखने पर बल दिया है और सच्चाई पर आधारित ईरान से वार्ता करने हेतु ट्रंप के हालिया दावा इस बात का सूचक है कि अमेरिकी नीति का आधार वर्चस्व और ज़ोरज़बरदस्ती है। MM