मोग्रीनी का अमरीका का दौरा और जेसीपीओए का भविष्य!!!
योरोपीय संघ और परमाणु समझौते जेसीपीओए के तीन योरोपीय पक्ष इस समझौते को बाक़ी रखने पर शुरु से बल देते आ रहे हैं।
इस परिप्रेक्ष्य में योरोपीय संघ की विदेश नीति प्रभारी फ़ेड्रीका मोग्रीनी ने बुधवार को अपने अमरीका दौरे में इस देश के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो और अमरीकी राष्ट्रपति के दामाद जेरेड कुश्नर से भेंट के बाद एक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने जेसीपीओए को क्षेत्र में स्थिरता व सुरक्षा का मूल तत्व बताया।
मोग्रीनी के बयान में आया है कि योरोपीय संघ ईरान के साथ परमाणु समझौते के बाक़ी रहने पर बल देता है और इसे क्षेत्र मे स्थिरता व सुरक्षा का मुख्य तत्व समझता है।
ईरान की ओर से परमाणु समझौते में अपनी प्रतिबद्धताओं के पालन के बावजूद, योरोप ने इस समझौते के संबंध में स्वीकार्य क़दम नहीं उठाया, जिसमें अमरीका की ओर से पाबंदियों का मुक़ाबला करना शामिल है।
ईरान ने योरोप की अपने वचन को पूरा करने में उदासीनता की प्रतिक्रिया में बुधवार 8 मई 2019 को एक बयान में जेसीपीओए के 26वें और 36वें अनुच्छेद के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं के स्तर को कम करने का एलान किया और योरोप को ख़ास तौर पर बैंकिन्ग और तेल के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने के लिए 60 दिन का समय दिया। इस समयावधि के 44 दिन गुज़रने के बाद भी योरोप ने अपने वचन ख़ास तौर पर इन्सटैक्स नामक वित्तीय व्यवस्था को लागू करने के संबंध में वांछित क़दम नहीं उठाया है। वास्तव में योरोप चाहता है कि ईरान बिना किसी फ़ायदे को जेसीपीओए को लागू किए रहे।
स्वाभाविक सी बात है कि इस तरह का व्यवहार न सिर्फ़ तर्क से समन्वित नहीं है बल्कि परमाणु समझौते के अनुच्छेद के विपरीत व ग़ैर क़ानूनी है। दूसरी ओर अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए ने ईरान द्वारा परमाणु समझौते की पाबंदी की 15 रिपोर्टों में पुष्टि की है। स्पष्ट सी बात है कि अगर ईरान परमाणु प्रतिबद्धताओं को कम करता है तो इसके संभावित अंजाम की ज़िम्मेदारी, समझौते के योरोपीय पक्षों पर होगी जो तेहरान से इस समझौते पर बिना फ़ायदा उठाए बाक़ी रहने के इच्छुक हैं। (MAQ/T)