हांगकांग में प्रदर्शनकारियों का संसद पर क़ब्ज़ा
हांगकांग को चीन के हवाले करने की 22वीं वर्षगांठ के अवसर पर प्रदर्शनकारियों ने संसद पर धावा बोलते हुए उस पर नियंत्रण कर लिया।
ज्ञात रहे कि अपराधियों के प्रत्यर्पण से संबंधित विधेयक के विरुद्ध हांगकांग में तीन सप्ताह से विरोध प्रदर्शन जारी हैं।
पिछली रात मास्क और पीली टोपी पहने युवा पुलिस से झड़प के दौरान संसद में घुस गये जहां उन्होंने इमारत में तोड़ फोड़ की और उसकी दीवारों पर सरकार विरोधी नारे लिखे।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध क्रैक डाऊन करते हुए इमारत को घेरे में लेकर उसके विभिन्न रास्तों से अंदर घुसने का प्रयास किया, आंसू गैस के शेल फ़ायर किए और लाठी चार्ज भी किया जिसकी वजह से प्रदर्शनकारी तितर बितर हो गये।
प्रदर्शनकारियों की ओर से संसद में ब्रिटिश झंडा लहराया गया जबकि दीवारों पर "हांगकांग, चीन नहीं है" लिखा गया था।
इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने बीजिंग समर्थित अधिकारियों के विरुद्ध प्रदर्शन करते हुए उनसे त्यागपत्र की मांग की थी।
ज्ञात रहे कि हांगकांग में अपराधियों के प्रत्यपर्ण के संबंधित पेश किए गये क़ानून के अंतर्गत अर्ध स्वायत्त हांगकांग और चीन सहित क्षेत्र के अन्य क्षेत्रों में केस के अवसर पर फ़रार आरोपियों को हवाले करने के समझौते किए जाएंगे।
उक्त क़ानून का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि यह बिल चीन सरकार की ओर से पेश किया गया है और आशंका है कि बीजिंग इस क़ानून से सामाजिक कार्यकर्ताओं, आलोचकों और अन्य राजनैतिक विरोधियों को चीन प्रत्यर्पण के लिए प्रयोग करेगा।
दूसरी ओर क़ानून के समर्थकों का कहना है कि इसकी सहायता से हांगकांग को फ़रार आरोपियों की शरणस्थली बनने से बचाया जा सकेगा। (AK)