जर्मन राजदूत की वेनेज़ोएला वापसी मादुरो सरकार की मज़बूती का चिन्ह
वेनेज़ोएला में अपेक्षाकृत स्थिरता और निकोलस मादुरो की सरकार की स्थिति के बेहतर होने के साथ ही विभिन्न देश काराकास के साथ अपने संबंध बेहतर करने की कोशिश में हैं। इस परिप्रेक्ष्य में वेनेज़ोएला के विदेश मंत्री ने जर्मन राजदूत के काराकास वापस आने की सूचना दी।
काराकास में जर्मन राजदूत डेनियम क्रेनर को मार्च महीने में वेनेज़ोएला के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप और इस देश में विपक्ष के नेता ख़्वान ग्वायडू का समर्थन करने पर वेनेज़ोएला से निकाल दिया गया था। वह भी उन राजदूतों में शामिल थे जिन्होंने ग्वायडू का काराकास के एयरपोर्ट पहुंचने पर उनका स्वागत किया था।
यह व्यवहार राजदूत की परंपरा के ख़िलाफ़ था जिस पर मादुरो की सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दर्शायी थी। जैसा कि वेनेज़ोएला के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा था कि काराकास, कुछ विदेशी कूटनयिकों के विपक्ष के चरमपंथी षड्यंत्रकारियों का साथ देने पर आधारित व्यवहार को स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि यह व्यवहार अंतर्राष्ट्रीय मानक के ख़िलाफ़ है।
वॉशिंग्टन पोस्ट ने इस बारे में एक रिपोर्ट में कहा है कि वेनेज़ोएला के राष्ट्रपति ने देश में सत्ता पर अपनी पकड़ मज़बूत कर ली है और इस ओर से ट्रम्प की निराशा स्पष्ट हो चुकी है।
इसी प्रकार हालिया हफ़्तों में नॉर्वे ने यह कोशिश की कि वेनेज़ोएला के सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बातचीत के लिए ओस्लो में बैठक का आयोजन कर मध्यस्थ्ता करे। हालांकि ये बैठकें अब तक वाइट हाउस के दिशा निर्देश पर काम करने वाले विरोधियों के उल्लंघन की वजह से किसी नतीजे तक नहीं पहुंच सकीं।
ऐसा लगता है कि योरोपीय अधिकारियों को वेनेज़ोएला के संबंध में ट्रम्प की नीति का अनुसरण करने की ग़लती का एहसास हो गया है, इसलिए अब वे वेनेज़ोएला में राजनैतिक रस्साकशी को दूर करने के लिए वार्ता का समर्थन कर रहे हैं। जर्मन राजदूत की वेनेज़ोएला वापसी को इसी परिप्रेक्ष्य में देखना चाहिए।(MAQ/T)