नाइजीरिया में इस्लामी आंदोलन पर प्रतिबंध लगाने का प्रयास
जहां एक ओर नाइजीरिया की मुस्लिम जनता जेल में बंद अपने नेता शैख़ इब्राहीम ज़कज़की की स्वतंत्रता के लिए प्रयास कर रही है, वहीं इस देश के राष्ट्रपति ने इस्लामी आंदोलन की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है।
नाइजीरिया के राष्ट्रपति मुहम्मद बुहारी के कार्यालय ने ऐसी स्थिति में इस्लामी आंदोलन की गतिविधियों को प्रतिबंधित करने की घोषणा की है कि इस देश की जनता वर्षों से राजनैतिक और सामाजिक दबावों का सामना कर रही है।
नाइजीरिया की सेना ने 2015 को ज़ारिया शहर में शैख़ इब्राहीम ज़कज़की के समर्थकों पर सीधी फ़ायरिंग कर दी थी जिसमें शैख़ ज़कज़की के पुत्र सहित लगभग 1 हज़ार लोग शहीद हो गये थे। शैख़ इब्राहीम ज़कज़की भी उसी समय से जेल में बंद हैं और जेल में भीषण यातनाएं और ज़हर दिए जाने की वजह से उनकी हालत बहुत ख़राब है।
इस देश के उच्चतम न्यायालय ने आयतुल्लाह शैख़ ज़कज़की को रिहा करने का आदेश दिया है लेकिन सरकार सऊदी अरब के दबाव में उन्हें रिहा नहीं कर रही है। सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय के आदेश को न मानने की वजह से इस देश की जनता अपने नेता की रिहाई के लिए निरंतर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रही है जिसके दौरान पुलिस ने बल का भी प्रयोग किया जिसमें अब तक दर्जनों निहत्थे लोग मारे जा चुके हैं।
नाइजीरिया के मुसलमानों के विरुद्ध बल का प्रयोग ऐसी स्थिति में बढ़ गया है कि इस देश के राजनैतिक और सामाजिक हालात पर नज़र डालने से पता चलता है कि नाइजीरिया की सरकार पर अमरीका, सऊदी अरब और ज़ायोनी शासन के भीषण राजनैतिक दबाव है। इस्लामी आंदोलन के वरिष्ठ सदस्य शैख़ इब्राहीम सूहू का इस बारे में कहना है कि नाइजीरिया की सरकार, सऊदी अरब, अमरीका और ज़ायोनी शासन के ज़बरदस्त दबाव में है और यह सब मिलकर मुसलमानों विशेषकर नाइजीरिया के शीया मुसलमानों के विरुद्ध षड्यंत्र रच रहे हैं। (AK)