जर्मनी ने दिया अमरीका को टका सा जवाब
फार्स की खाड़ी में अमरीकी उपस्थिति की वजह से इस क्षेत्र में बढ़े तनाव और क़ानूनों के उल्लंघन की वजह से ईरान द्वारा ब्रिटेन के एक आयल टैंकर को ज़ब्त किये जाने के बाद वाशिंग्टन और लंदन फार्स की खाड़ी में जहाज़ों की सुरक्षा के लिए एक गठबंधन बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
फार्स की खाड़ी में जहाज़ों की सुरक्षा के दावे के साथ गठबंधन बनाने की अमरीकी कोशिश का विरोध हो रहा है और इस संदर्भ में हालिया विरोध जर्मनी की तरफ से आया है जहां के विदेशमंत्री ने इस विषय पर बोलते हुए कहा है कि बर्लिन की प्राथमिकता तनाव कम करना है और जर्मनी फार्स की खाड़ी में जहाज़रानी की सुरक्षा के लिए गठबंधन बनाने के अमरीकी प्रस्ताव का विरोधी है। अमरीका वास्तव में फार्स की खाड़ी में एक विदेशी और हस्तक्षेपकर्ता के रूप में उपस्थित है और इस दौरान वह अपनी उपस्थिति का औचित्य दर्शाने के लिए विभिन्न प्रकार के हथकंडे अपनाता रहता है और यही वजह है कि वह ब्रिटेन के आयल टैंकर को ज़ब्त किये जाने के मुद्दे से लाभ उठाते हुए एक बार फिर फार्स की खाड़ी में अपने हितों के लिए काम कर रहा है। ब्रिटेन ने ईरान द्वारा अपने आयल टैंकर को ज़ब्त किये जाने के बाद फार्स की खाड़ी में सुरक्षा के लिए युरोपीय देशों के संयुक्त अभियान की बात कही थी लेकिन अब वह अमरीका के साथ बहुराष्ट्रीय गठबंधन की बात कर रहा है और यह एसी स्थिति में है केि जर्मनी जैसे कई युरोपीय देश भी इस प्रकार के किसी गठबंधन के विरोधी हैं।
वास्तव में जर्मनी को बहुत अच्छी तरह से यह मालूम है कि फार्स की खाड़ी में जहाज़रानी की सुरक्षा अस्ल में ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए अमरीका का एक बहाना है और इसी लिए वह ट्रम्प के इस नाटक में भूमिका नहीं निभाना चाहता। जर्मनी विदेशमंत्री ने इस से पहले भी कहा था कि हुरमुज़ स्ट्रेट में हमारे क़दमों पर युरोपीय छाप होनी चाहिए और हम ईरान पर अधिकतम दबाव के अमरीकी अभियान का भाग नहीं बनेंगे। यह एेसी दशा में है कि जब ईरान फार्स की खाड़ी सहित पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व शांति के प्रति कटिबद्ध है । ईरानी विदेशमंत्री यह स्पष्ट कर चुके हैं कि क्षेत्र की सुरक्षा ईरान की ज़िम्मेदारी है। विदेशमंत्री जवाद ज़रीफ ने साफ शब्दों में कह दिया है कि फार्स की खाड़ी और हुरमुज़ स्ट्रेट की सुरक्षा ईरान निश्चित बनाता है। (Q.A.)