मुंह में राम बगल में छुरी, खुली अमेरिकी दावे की पोल!
सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में अमेरिका ईरान से वार्ता करना चाहता है? आखिर अब वह किसी शर्त के बिना ईरान से क्यों वार्ता करना चाहता है?
हालिया दिनों में यह बात बारमबार सुनने को मिल रही है कि अमेरिकी अधिकारी किसी शर्त के बिना ईरान से बात करना चाहते हैं परंतु ईरानी अधिकारियों ने इस प्रस्ताव को रद्द करते हुए कहा है कि वे किसी भी स्थिति में अमेरिका से वार्ता नहीं करेंगे।
अब आइये कुछ आयामों से अमेरिका के इस दावे की समीक्षा करते हैं।
पहला सवाल यह है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और विदेशमंत्री माइक पोम्पियो ईरान से बिना शर्त क्यों वार्ता करना चाहते हैं? उसका जवाब यह है कि जब उन्होंने ईरान पर अधिक से अधिक दबाव डाल कर देख लिया कि वह ईरान को नहीं झुका सके तो पैंतरा बदल कर उन्होंने पहले ईरान से वार्ता का राग अलापना शुरू कर दिया और जब अभी जून में अमेरिका के आधुनिकतम ड्रोन ग्लोबल हॉक को ईरान की सशस्त्र सेना के जवानों ने मार गिराया और अमेरिका कुछ भी न कर सका तो उसके बाद वाशिंग्टन ने ईरान से बिना शर्त वार्ता का राग अलापना आरंभ कर दिया।
दूसरे शब्दों में अमेरिका ने यह स्वीकार कर लिया कि अधिक से अधिक दबाव डालने की नीति विफल हो गयी वरना वह बिना शर्त वार्ता की बात ही न करता।
दूसरा सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में अमेरिका ईरान से वार्ता करना चाहता है?
जानकारों का मानना है कि अमेरिका ईरान से वार्ता नहीं बल्कि वार्ता के बहाने वह ईरान का निरस्त्रीकरण चाहता है क्योंकि ईरान के निरस्त्रीकरण की दशा में ही क्षेत्र में उसकी दादागीरी व धाक बाकी रह सकती है और वह सोचता है कि अगर ईरान को प्रगति करने से नहीं रोका गया तो जल्द ही उसकी दादागीरी की हवा निकल जायेगी और जो देश उससे संबंध बनाने और हथियार ख़रीदने पर गर्व करते हैं उससे मुंह फेर लेंगे।
अगर वास्तव में अमेरिका ईरान से वार्ता का इच्छुक होता तो वह कभी भी ईरान पर न प्रतिबंध लगाता और न ही उसे किसी प्रकार की धमकी देता किन्तु अमेरिका जो कुछ कर सकता है वह कर रहा है।
अगर आप किसी घोड़े या बैल को पकड़ना चाहते हैं तो उसे हरी घास दिखायेंगे या फिर आप अपने हाथ में डंडा लेकर उसे पकड़ा चाहेंगे। अगर कोई इंसान मुंह से यह कहे कि मैं घोड़े या बैल को पकड़ा चाहता हूं और हरी घास के अलावा डंडा ही उसके हाथ में हो तो आप क्या कहेंगे? आप यही तो कहेंगे कि भाई अगर घोड़े या बैल को पकड़ना चाहता है तो डंडे को फेंक दे वरना कभी भी घोड़े को नहीं पकड़ सकता।
क्या अमेरिकी अधिकारी इतने मूर्ख हैं कि इतनी सीधी सी बात उनकी समझ में नहीं आती। लोगों के कहने के बावजूद वे डंडा नहीं फेंक रहे हैं। इस पर आप क्या कहेंगे?
सच्चाई यह है कि अमेरिकी अधिकारी ईरान से बात नहीं करना चाहते बल्कि वार्ता के नाम पर उसका निरस्त्रीकरण करना चाहते हैं और अगर उसका निरस्त्रीकरण कर लिए तो जो चाहें कर सकते हैं किन्तु ट्रंप और उनकी मंडली शायद ईरानी अधिकारियों को अपने जैसा मूर्ख व बुद्धिहीन समझ रहे हैं।
ट्रंप और उनकी टोली को ज्ञात होना चाहिये कि ईरान ने प्रतिबंधों और दबावों में ही यह प्रगति की है और प्रतिबंधों से उसे डरायें जिसने उनका अनुभव न किया हो।
बहरहाल अमेरिकी अधिकारियों को चाहिये कि वे उन ग़लतियों को न दोहरायें जो उनसे पहले वाले कर चुके हैं और वास्तविकता को स्वीकार करके परस्पर सम्मान के आधार पर ईरान से बात करें और अब ज़ोर ज़बरदस्ती का समय बीत गया है और अगर वे ऐसा करते हैं तो मात्रा उनके ही नहीं बल्कि सबके हित में होगा। MM