रूस और जर्मनी का परमाणु समझौते की रक्षा पर बल
मई 2018 में परमाणु समझौते से अमरीका के निकलने के बाद वाशिंग्टन की इच्छा के विपरीत जिसमें उसने गुट पांच धन एक के अन्य सदस्यों से इसी तरह की कार्यवाही की इच्छा व्यक्त की थी, रूस और जर्मनी सहित अन्य देशों ने परमाणु समझौते को जारी रखने पर बल दिया है।
इसी परिधि में जर्मनी के विदेशमंत्री हाइको मास ने मास्को की यात्रा की और बुधवार 21 अगस्त को घोषणा की कि परपाणु समझौते की आवश्यकता के बारे में बर्लिन और मास्को के दृष्टिकोण समान हैं। जर्मनी के विदेशमंत्रालय के सरकारी ट्वीटर हैंडल पर विदेशमंत्री के हवाले से लिखा गया कि ईरान के बारे में हम सहमत हैं कि परमाणु समझौते की रक्षा, उसके सभी पक्षों का संयुक्त हित है।
जर्मनी, फ़्रांस और ब्रिटेन पर आधारित यूरोपीय ट्राइका और यूरोपीय संघ का मानना है कि यदि परमाणु समणौते को कुछ नुक़सान हुआ तो इसके सुरक्षा व्यवस्था पर गहरे प्रभाव पड़ेंगे।यूरोप ने परमाणु समझौते को बहुपक्षीय समझौते का एक नमूना क़रार दिया है जो अन्य अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों के समाधान में भी आदर्श बन सकता है।
उधर रूस ने भी परमाणु समझौते की रक्षा पर बल दिया है। रूस के विदेशमंत्री सर्गेई लावरोफ़ ने अपने जर्मन समकक्ष के साथ वार्ता में परमाणु समझौते की रक्षा पर बल दिया। उनका कहना था कि हम परमाणु समझौते में बाक़ी बचे सदस्य ईरान के साथ सहयोग करेंगे ताकि इस समझौते की रक्षा की जा सके और क्षेत्र की सुरक्षा सुनिश्चित बनाई जा सके। इसी के साथ रूसी अधिकारियों ने गुट 4+1 के उल्लंघनो के बाद ईरान द्वारा परमाणु समझौते में अपने वचनों में कमी की कार्यवाही के बारे में कहा कि वह ईरान के तर्कों और आधारों को इस बारे में समझते हैं।
यह बात बात पर स्पष्ट है कि ईरान परमाणु समझौते पर पहले दिन से ही पूरी तरह अमल कर रहा है जबकि परमाणु समझौते में शामिल अन्य पक्षों की ओर से इस बारे में कोई संतोषजनक कार्यवाही देखने को नहीं मिली। यही कारण है कि ईरान ने यूरोप को दी गयी मोहलत के बाद अपने वचनों को कम किया और फिर उसने चेतावनी दी है कि यदि यूरोप की ओर से फिर कोई कार्यवाही नहीं की गयी तो वह तीसरा क़दम भी पूरी शक्ति के साथ उठाएगा। (AK)