सुरक्षा परिषद में ईरान की आलोचना का अमरीका का विफल प्रयास
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सऊदी अरब की तेल कंपनी आरामको के तेल प्रतिष्ठानों पर यमनी बलों के ड्रोन हमले के बहाने अमरीका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने की अपनी कोशिश के अंतर्गत तेहरान के ख़िलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय सहमति बनाने की कोशिश की है लेकिन उसे विफलता का मुंह देखना पड़ा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep २०, २०१९ १२:५५ Asia/Kolkata

सऊदी अरब की तेल कंपनी आरामको के तेल प्रतिष्ठानों पर यमनी बलों के ड्रोन हमले के बहाने अमरीका ने ईरान पर दबाव बढ़ाने की अपनी कोशिश के अंतर्गत तेहरान के ख़िलाफ़ अंतर्राष्ट्रीय सहमति बनाने की कोशिश की है लेकिन उसे विफलता का मुंह देखना पड़ा है।

आरामको की रिफ़ाइनरियों पर यमनी बलों के हमलों के मामले में अमरीका ने संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद की सामान्य बैठक में ईरान की आलोचना में बयान जारी करवाने की कोशिश की लेकिन वह विफल रहा। यमन के हालात की समीक्षा के लिए रूस की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में अमरीका के प्रतिनिधि ने ईरान को इस मामले में मुख्य दोषी दर्शाने का प्रयास किया और सुरक्षा परिषद के अन्य सदस्यों पर अपना साथ देने के लिए दबाव भी डाला लेकिन रूस के प्रतिनिधि ने अमरीका की इस कोशिश को विफल बना दिया।

 

इस बैठक में, जिसमें अमरीका को छोड़ कर सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों ने तेहरान के ख़िलाफ़ वाॅशिंग्टन के आरोपों पर कोई ध्यान नहीं दिया, सुरक्षा परिषद के सभी सदस्यों ने यमन संकट में तनाव की वृद्धि पर गहरी चिंता जताई। अमरीका के प्रतिनिधि ने ईरान को दोषी ठहराने की अपनी कोशिश विफल होने के बाद यह प्रस्ताव दिया कि सुरक्षा परिषद की बंद दरवाज़ों के पीछे बैठक आयोजित की जाए ताकि सऊदी अरब के तेल प्रतिष्ठानों पर हालिया हमले की निंदा में कोई बयान जारी किया जा सके लेकिन रूस के प्रतिनिधि ने इसका भी विरोध किया।

 

केवल रूस जैसे अमरीका के अंतर्राष्ट्रीय प्रतिद्वंद्वियों ने ही नहीं बल्कि वाॅशिंग्टन के यूरोपीय घटकों तक ने सऊदी अरब पर हुए हालिया हमलों में ईरान का हाथ होने के अमरीका के दावे को स्वीकार नहीं किया है और उनका कहना है कि जब तक ठोस जांच नहीं हो जाती तब तक इस प्रकार के दावे पर विश्वास नहीं किया जा सकता। इस प्रकार अमरीका को इस संबंध में अपनी अंतिम कोशिश में भी विफलता का मुंह देखना पड़ा है। (HN)