तालेबान से दूसरे परेशान और स्वयं तालेबान परेशान दाइश से
तालेबान का कहना है कि दाइश बहुत ही ख़ूंख़ार हैं जिनको विदेश से अफ़ग़ानिस्तान लाया गया है।
तालेबान ने नंगरहार में नमाज़ियों पर किये गए हमले की निंदा करते हुए कहा है कि यह हमला दाइश ने किया है। तालेबान का कहना है कि दाइश को अफ़ग़ानिस्तान में स्थानीय लोगों के साथ विदेशी समर्थन भी हासिल है। तालेबान के अनुसार दाइश को एक विशेष गुट के माध्यम से विशेष लक्ष्यों के लिए अफ़ग़ानिस्तान भेजा गया है। इनका काम अफ़ग़ानिस्तान में रक्तपात करके अशांति फैलाना है।
तसनीम समाचार एजेन्सी के अनुसार तालेबान की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि दाइश, अफ़ग़ानिस्तान की पैदावार नहीं है बल्कि यह अफ़ग़ानिस्तान से बहुत दूर की पैदावार है। इन्होंने अरब देशों में जन्म लिया और विदेशी शक्तियों तथा राष्ट्रीय एकता सरकार ने इस मुसीबत को अफ़ग़ानिस्तान पहुंचाया है। तालेबान के बयान के अनुसार सरकार के अधिकारी विशेषकर "फ़ज़ल हादी मुस्लिमयार" दाइश की सहायता करते हैं और इस आतंकी गुट को हथियार उपलब्ध करवाते हैं। अपने बयान में तालेबान ने दाइश को बहुत ही ख़ूंख़ार गुट बताया है।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष तालेबान ने उत्तरी अफ़ग़ानिस्तान को दाइश मुक्त बनाने के उद्देश्य से दाइश के विरुद्ध एक व्यापक कार्यवाही की थी। इस सशस्त्र कार्यवाही के परिणाम स्वरूप बड़ी संख्या में दाइश के सदस्य मारे गए थे। ताेलबान की इस कार्यवाही के दौरान बहुत से दाइशी, तालेबान की गिरफ़्त में आ गए थे। बाद में अफ़ग़ानिस्तान में दाइश प्रमुख "मौलवी हबीबुर्रहमान" ने, जो तालेबान के घेरे में आ गया था अपने 200 लड़ाकों के साथ अफ़ग़ानिस्तान की सरकार के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। इसका परिणाम यह हुआ कि सरकारी हैलिकाप्टरो ने दाइश के आतंकवादियों को तालेबान से मुक्ति दिलाई। कई हैलिकाप्टरों के माध्यम से दाइश के आतंकवादियों को तालेबान के चंगुल से छुड़ाकर अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा के गेस्ट हाउस में पहुंचा दिया गया। तालेबान का कहना है कि हालांकि दाइश के यह 200 आतंकवादी अफ़ग़ानिस्तान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के नियंत्रण में हैं किंतु एक वर्ष गुज़रने के बावजूद उनके विरुद्ध किसी भी प्रकार की कोई न्यायिक कार्यवाही नहीं की गई।