बोस्निया टिकटिक करने वाला टाइम बम है, फ़्रांसीसी राषट्रपति
फ़्रांसीसी राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रां ने बोस्निया और हर्ज़ेगोविना को एक ऐसा टाइम बम बताया है, जो टीटिक कर रहा है और यूरोप के लिए चिंता का सबसे बड़ा विषय है।
द इकोनोमिस्ट पत्रिका के साथ इंटरव्यू में जब फ़्रांसीसी राष्ट्रपति से अल्बानिया और उत्तरी मैसेडोनिया को यूरोपीय संघ की सदस्यता देने के लिए वार्ता शुरू होने के मार्ग में उनके द्वारा रुकावट डालने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहाः दोनों देशों में से कोई भी बाल्कन क्षेत्र में चिंता की वजह नहीं था।
मैक्रां का कहना था कि अगर आप इस क्षेत्र के बारे में चिंतित हैं तो सवाल मैसेडोनिया या अल्बानिया का नहीं है, बल्कि बोस्निया और हर्ज़ेगोविना का सवाल है, जो एक ऐसा टाइम बम है जो यूरोपीय संघ के सदस्य क्रोएशिया की बग़ल में टिकटिक कर रहा है।
मैक्रां का इशारा इराक़ और सीरिया में हिंसा फैलाकर लौटने वाले तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश के आतंकवादियों की ओर था।
बोस्निया के इस्लामी समुदाय के प्रवक्ता मोहम्मद ज्यूसिक ने फ़्रांसीसी राष्ट्रपति के इस बयान को "निंदनीय" बताया और कहा कि फ्रांस के राष्ट्रपति मुस्लिम आबादी वाले बाल्कन देशों को यूरोपीय संघ में शामिल होने से रोकने के लिए बोस्निया के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी कर रहे हैं।
ज्यूसिक का कहना थाः फ़्रांस के 1,900 आतंकवादियों की तुलना में बोस्निया के कुल 300 नागरिक जिनमें बच्चे और महिलाएं भी शामिल हैं, सीरिया और इराक़ लड़ने गए थे। हालांकि फ़्रांस से सबसे अधिक आतंकवादी दाइश में शामिल हुए, लेकिन शायद मैक्रां की क़रीब की नज़र कमज़ोर है।
उन्होंने आगे कहाः फ़्रांस को सैकड़ों आतंकवादियों के वापस लौटने का इंतज़ार है, लेकिन मेरी समझ में यह नहीं आ रहा है कि फिर यह फ़्रांस की तुलना में बोस्निया के लिए बड़ी समस्या कैसे हो गई।
2015 में एपी की रिपोर्ट के मुताबिक़, उस समय तक यूरोप से 5,000 से अधिक आतंकवादी इराक़ और सीरिया लड़ने के लिए पहुंचे थे, लेकिन फ़्रांस किसी भी यूरोपीय देश की तुलना में आतंकवादियों के निर्यात में सबसे आगे था।
बोस्नियाई ख़ुफ़िया एजेंसी के मुताबिक़, 2012 से 2016 के बीच 80 बच्चों समेत 241 लोग सीरिया और इराक़ से वापस लौटे हैं। क़रीब 100 बोस्नियाई नागरिक अभी भी इराक़ और सीरिया में ही हैं, जबकि दाइश के लिए लड़ते हुए 88 बोस्नियाई तकफ़ीरी आतंकवादी मारे जा चुके हैं।
बोस्निया यूरोप का पहला ऐसा देश है, जिसने 2014 में विदेशों में लड़ने या किसी को लड़ाई के लिए भर्ती करने के जुर्म में 10 साल जेल की सज़ा का प्रावधान किया था। msm