तालेबान और ट्रंप के बीच गुप्त संबंधों का हुआ पर्दाफ़ाश
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सीआईए के अफ़सर ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इस संबंध की जानकारी अमेरिकी जनता को क्यों तालेबान के माध्यम से होनी चाहिये ?
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar ०५, २०२० ०७:३६ Asia/Kolkata
  • तालेबान और ट्रंप के बीच गुप्त संबंधों का हुआ पर्दाफ़ाश

सीआईए के अफ़सर ने सवाल उठाते हुए कहा है कि इस संबंध की जानकारी अमेरिकी जनता को क्यों तालेबान के माध्यम से होनी चाहिये ?

अमेरिका की गुप्तचर एजेन्सी सीआईए के पूर्व अफ़सर ने इस देश के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और तालेबान के मध्य गुप्त संबंधों से पर्दा उठाते हुए इसकी आलोचना की है।

समाचार एजेन्सी इर्ना की रिपोर्ट के अनुसार एडवर्ड नेड प्राइस ने तालेबान के साथ राष्ट्रपति ट्रंप के गुप्त संबंधों की आलोचना की और ट्वीट किया कि तालेबान गुट के एक नेता के साथ ट्रंप के टेलीफोनी संबंध हैं और अमेरिकी जनता को क्यों इस बात की जानकारी नहीं होनी चाहिये ।

साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि इस बात की जानकारी अमेरिकी जनता को क्यों तालेबान के माध्यम से होनी चाहिये?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को तालेबान के एक नेता मुल्ला बरादर से टेलीफोनी वार्ता की थी।

तालेबान गुट के राजनीतिक कार्यालय के प्रवक्ता सुहैल शाहिन ने क़तर में कहा था कि मुल्ला बरादर ने इस टेलीफोनी वार्ता में बल देकर कहा है कि अगर अमेरिका शांति समझौते का सम्मान करेगा तो वाशिंग्टन के तालेबान के साथ संबंधों पर अच्छा असर पड़ेगा और विदेशी सैनिकों का अफ़ग़ानिस्तान से निकल जाना सबके हित में है।

यह पहली बार है जब अमेरिका के राष्ट्रपति द्वारा तालेबान गुट के एक नेता से टेलीफोनी वार्ता की बात सामने आ रही है। एक वर्ष तक तालेबान और अमेरिका के मध्य काफी बातचीत के बाद अफ़ग़ान युद्ध को बंद करने पर अमेरिका के साथ शांति समझौता हुआ है।

 इस समझौते के अनुसार आगामी 14 महीनों के भीतर अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी और दूसरे विदेशी सैनिक निकल जायेंगे।

रोचक बात यह है कि अमेरिका ने वर्ष 2001 में आतंकवाद को ख़त्म करने के बहाने अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया था पर आज तक अफ़ग़ानिस्तान से न तो  आतंकवाद का सफाया हुआ और न ही इस देश में शांति स्थापित हुई।

यही नहीं अमेरिका तालेबान को आतंकवादी गुट कहता था और अब उसने उसी गुट से शांति समझौता किया है।

जानकार हल्के सवाल कर रहे हैं कि दूसरों को डेमोक्रेसी की सीख देने वाले अमेरिका ने तालेबान से शांति समझौता किया है जबकि उस गुट को अफ़ग़ान जनता ने नहीं चुना है और इस समझौते में अफ़गानिस्तान की कानूनी सरकार भी शामिल नहीं थी तो क्या उसका यह कार्य डेमोक्रेसी के मुताबिक़ है? mm