क्या दुआ का बीमारियों में कुछ फायदा है?
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आजकल कोरोना वायरस हर ओर फैला है, लोग तरह- तरह के इलाज बता रहे हैं इसी दौरान धर्मगुरु बहुत सी दुआएं बता रहे हैं लेकिन बहुत से लोग इसका मज़ाक़ भी उड़ा रहे हैं तो सवाल यह है कि क्या कोरोना वायरस से बचाव में दुआ भी काम आ सकती है?
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Mar १९, २०२० १३:३३ Asia/Kolkata
  • क्या दुआ का बीमारियों में कुछ फायदा है?

आजकल कोरोना वायरस हर ओर फैला है, लोग तरह- तरह के इलाज बता रहे हैं इसी दौरान धर्मगुरु बहुत सी दुआएं बता रहे हैं लेकिन बहुत से लोग इसका मज़ाक़ भी उड़ा रहे हैं तो सवाल यह है कि क्या कोरोना वायरस से बचाव में दुआ भी काम आ सकती है?

 

बहुत से लोगों का यह मानना है कि रोगों के इलाज में दुआ का कोई प्रभाव नहीं होता लेकिन यह बिल्कुल गलत है और यह एक हक़ीक़त है कि दवा के साथ दुआ का भी रोगों के इलाज़ में असर होता है और यह वैज्ञानिक रूप से भी सिद्ध हो चुका है। वैज्ञानिक शोध से पता चलता है कि दुआ से दिल के बीमारों को फायदा पहुंचता है इसी लिए अमरीका में होने वाले एक शोध से पता चला है कि कैंसर के इलाज का एक रास्ता दुआ भी है।

अमरीका में मेनेसोटा युनिवर्सिटी में होने वाले एक अध्ययन से पता चला है कि दुआ और नमाज़, दवा के बाद, दर्द को खत्म करने का दूसरा बड़ा साधन है। हालांकि कोरोना वायरस से बचाव में दुआ के असर पर ज़ाहिर सी बात है अभी तक कोई अध्ययन नहीं हुआ है लेकिन यह तथ्य सिद्ध हो चुका है कि ईश्वर से दुआ करने से दिल में शांति पैदा होती है और इन्सान में बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है।

यह सब को मालूम है कि डर व चिंता, इन्सान के बदन में बीमारियों की लड़ने की ताक़त को कम कर देता है लेकिन जब इन्सान दुआ करता है तो उसके मन में जो विश्वास और शांति पैदा होती है उसकी वजह से उसका डर खत्म हो जाता है जिससे उसकी रोगों से बचाव की शक्ति बढ़ती है।

 

इस लिए यह कहना सही नहीं है कि सिर्फ डॉक्टर ही बीमारी का इलाज कर सकता है निश्चित रूप से किसी भी बीमारी के इलाज में डॉक्टर की मुख्य भूमिका होती है और इलाज़ की जो पूरी प्रक्रिया है उसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा डॉक्टर होता है लेकिन सब कुछ डॉक्टर ही नहीं होता। मिसाल के तौर पर डॉक्टरों से गलती होती है तो उसकी गलती को कौन रोकेगा? डॉक्टर जो दवा लिखेगा उसके बारे में मेडिकल स्टोर के कर्मचारियों की गलती को कौन रोकेगा? इन सब जगहों पर भी काम आती है।  

अगर कोई दुआ की रुहानी ताक़त पर यक़ीन नहीं भी करता तब भी उसे यह तो मानना पड़ेगा कि दुआ से उम्मीद पैदा होती है और उम्मीद से ताक़त। किसी भी बीमारी से लड़ने के लिए स्वस्थ होने की उम्मीद बहुत ज़रूरी है। इस लिए दवाओं के साथ दुआ बहुत ज़रूरी है।

इस सिलसिले में दुनिया के बहुत से इलाक़ों में कई शोध और अध्ययन हो चुके हैं और अधिकांश में यही कहा गया है कि दुआ का असर है लेकिन ज़ाहिर सी बात है दुआ के साथ दवा का होना ज़रूरी है। Q.A.