अमरीकी कमान्डर के बयान पर तालेबान की कड़ी प्रतिक्रिया
तालेबान ने आतंकवादी अमरीकी सेना के कमान्डर स्काट मिलर के बयान को अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध की आग भड़काने और आग में घी डालने के समान क़रार दिया है।
तालेबान ने अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी और नैटो के कमान्डर के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के बयान अफ़ग़ानिस्तान को राजनैतिक संकट के समाधान से निकट नहीं करेंगे बल्कि युद्ध और झड़पों में वृद्धि होगी।
तालेबान ने कहा कि अमरीका ने बारम्बार क़तर समझौते का उल्लंघन किया है और तालेबान को धमकी देने के बजाए क़तर समझौते पर अमल करे ताकि इन्ट्रा अफ़ग़ान वार्ता के लिए मार्ग प्रशस्त हो।
अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी और नैटो सेना के कमान्डर स्काट मिलर ने अफ़ग़ानिस्तान के विभिन्न क्षेत्रों में तालेबान के हमलों में वृद्धि की ओर संकेत करते हुए यदि तालेबान की ओर से हिंसा का क्रम जारी रहा तो विदेशी सैनिकों की प्रतिक्रियाएं सामने आएंगी।
ज्ञात रहे कि 29 फ़रवरी 2020 को क़तर की राजधानी दोहा में तालेबान और अमरीका के बीच समझौता हुआ था जिसके बाद अमरीकी कमान्डर और तालेबान का बयान सामने आया है।
इस समझौते के आधार पर तालेबान को हिंसा में कमी करनी होगी और इसके जवाब में अमरीका को भी धीरे धीरे अफ़ग़ानिस्तान से निकलना होगा। इस समय तालेबान की ओर से अफ़ग़ानिस्तान में हिंसा में तो कोई कमी नज़र नहीं आ रही है और न ही अफ़ग़ानिस्तान से निकलने के लिए अमरीका का कोई इरादा लग रहा है।
ओपी ग्लोबल विश्व विद्यालय की प्रसिद्ध शोधकर्ता बिलक़ीस दाऊद का यह मानना हे कि अफ़ग़ान शांति प्रक्रिया में प्रगति न होने की मुख्य वजह यह है कि क़तर समझौते अमरीका और तालेबान के बीच हुआ है और इसमें अफ़ग़ान सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
यहां पर इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि अमरीका और नैटो ने आतंकवाद से संघर्ष के नाम पर अफ़ग़ानिस्तान पर चढ़ाई की है, तब से लेकर अब तक अफ़ग़ानिस्तान में शांति स्थापित न हो सकी बल्कि यूं कहा जाए कि विदेशी सैनिकों की उपस्थिति की वजह से अफ़ग़ानिस्तान और भी अशांत हो गया और दाइश से आतंकवादी गुटों की गतिविधियां तेज़ हो गयी हैं। (AK)