अमरीकी जनता तीन वायरसों के घेरे में, कोरोना, नस्लवाद और ट्रम्प
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अमरीकी जनता को कोरोना के फैलाव, नस्लवाद के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों की लहर और अयोग्य सरकार जैसे तीन संकटों का सामना है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jun ०९, २०२० १६:४६ Asia/Kolkata
  • अमरीकी जनता तीन वायरसों के घेरे में, कोरोना, नस्लवाद और ट्रम्प

अमरीकी जनता को कोरोना के फैलाव, नस्लवाद के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों की लहर और अयोग्य सरकार जैसे तीन संकटों का सामना है।

अमरीका के लोग कोरोना के फैलाव जैसे गंभीर संकट से जूझ ही रहे थे कि उन्हें नस्लवाद के ख़िलाफ़ उठने वाली लहर का भी सामना करना पड़ा और रही सही कसर, इस देश की अयोग्य सरकार ने निकाल दी। पहले दो संकट किसी भी देश में सामने आते तो सबसे ज़्यादा ज़रूरत एक योग्य सरकार की महसूस की जाती लेकिन क्या यह बात मानी जा सकती है कि ट्रम्प और उनकी सरकार में आवश्यक योग्यता है?

 

रोएटर्ज़ का कहना है कि पूरी दुनिया में कोरोना वायरस के फैलाव के कारण चार लाख से ज़्यादा लोग मर चुके हैं जबकि सिर्फ़ अमरीका में कोविड-19 से मरने वालों की संख्या एक लाख दस हज़ार से ज़्यादा है। इसका मतलब यह है कि पूरी दुनिया में जितने लोग कोरोना से मरे हैं उनकी एक चौथाई से अधिक संख्या अमरीकियों की है। यह वह देश है जो दुनिया के नेतृत्व का दावेदार है।

 

कोरोना के फैलाव के साथ ही अमरीका में नस्लवाद के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में बड़ी तेज़ी आई है और इस देश के लगभग हर शहर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। ये प्रदर्शन इतने व्यापक थे कि अमरीका के उपराष्ट्रपति माइक पेन्ज़ ने फ़ाॅक्स न्यूज़ से बात करते हुए वाॅशिंग्टन में राष्ट्रीय गारद तैनात करने के ट्रम्प के फ़ैसले का समर्थन किया।

 

इन संकटमयी हालात में अमरीका की सरकार और राष्ट्रपति को इन दोनों संकटों से देश को बाहर निकालने के लिए संचालन की क्षमताओं से लाभ उठाना चाहिए लेकिन टीकाकारों का कहना है कि वे इस स्थिति से चुनावी रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहे हैं। इस लिए ऐसा लगता है कि मानो ट्रम्प सरकार ख़ुद ही अमरीकी जनता के लिए तीसरे वायरस में बदल चुकी है। (HN)