कोरोना वैक्सीन का साइड इफ़ैक्ट एचआईवी, ऑस्ट्रेलिया ने रोका क्लिनिकल ट्रायल
ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए विकसित किए जा रहे वैक्सीन पर काम रोक दिया है। क्योंकि वैक्सीन के क्लिनिकल ट्रायल में भाग लेने वालों की जांच रिपोर्ट एचआईवी पॉज़िटिव आ रही थी, जबकि वे वास्तव में एचआईवी से संक्रमित नहीं थे।
क्वींसलैंड विश्वविद्यालय और बायोटेक कंपनी सीएसएल द्वारा विकसित किया जा रहा कोविड-19 वैक्सीन परीक्षणों में एक मज़बूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की क्षमता उत्पन्न करता है, लेकिन इसी के साथ कुछ दुर्भाग्यपूर्ण जटिलताएं भी सामने आई हैं, जिसमें अन्य ख़तरनाक वायरसों का शामिल होना है।
एंटीबॉडीज़ जो ट्रायल में भाग लेने वालों के लिए कोविड-19 के मुक़ाबले में सुरक्षा कवच प्रदान कर रहे थे, वही परीक्षणों में झूठे एचआईवी के सकारात्मक संक्रमण का भी संकेत दे रहे थे।
हालांकि परीक्षण में भाग लेने वाला कोई भी व्यक्ति वास्तव में एचआईवी संक्रमित नहीं था।
ऑस्ट्रेलिया के स्वास्थ्य मंत्री ग्रेग हंट ने स्वीकार किया कि एचआईवी के साथ ही कई विचित्र साइड इफ़ैक्ट स्क्रीन हो रहे हैं। वायरस का कोई ज्ञात इलाज नहीं है, जो प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) पर हमला करता है, और अगर एचआईवी को बिना उपचार के छोड़ दिया जाए तो परिणाम स्वरूप एड्स हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया ने वैक्सीन की 5.1 करोड़ ख़ुराक ख़रीदने के लिए चार टीका निर्माताओं से क़रार किया है। यह कंपनी भी उनमें से एक थी।
जुलाई से ही इस टीका का परीक्षण किया जा रहा था। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने कहा कि परीक्षण को रोका जाना दिखाता है कि ऑस्ट्रेलिया की सरकार और अनुसंधानकर्ता बहुत सावधानी के साथ काम कर रहे हैं। msm