पश्चिम एशिया में बाइडेन सरकार की त्रिकोणीय नीति
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जबसे बाइडेन वाइट हाउस पहुंचे हैं, उन्होंने पश्चिम एशिया के तीन ख़िलाड़ियों के संबंध में तीन तरह का रवैया अपनाया है। बिना किसी लाग लपट के ईरान के संबंध में कैरट ऐन्ड स्टिक की नीति, सऊदी अरब के संबंध में चित भी मेरी पट भी मेरी की नीति और ज़ायोनी शासन के संबंध में नज़रअंदाज़ करने की नीति अपनायी है।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Feb २८, २०२१ १७:४२ Asia/Kolkata
  • पश्चिम एशिया में बाइडेन सरकार की त्रिकोणीय नीति

जबसे बाइडेन वाइट हाउस पहुंचे हैं, उन्होंने पश्चिम एशिया के तीन ख़िलाड़ियों के संबंध में तीन तरह का रवैया अपनाया है। बिना किसी लाग लपट के ईरान के संबंध में कैरट ऐन्ड स्टिक की नीति, सऊदी अरब के संबंध में चित भी मेरी पट भी मेरी की नीति और ज़ायोनी शासन के संबंध में नज़रअंदाज़ करने की नीति अपनायी है।

ईरान के संबंध में बाइडेन की नीति, ट्रम्प के व्यवहार की याद दिलाती है, हालांकि अन्यायपूर्ण पाबंदियों के संबंध में कुछ अपर्याप्त व आंशिक के बावजूद, सीरिया से मिली इराक़ की सीमा पर इराक़ी हिज़्बुल्लाह संगठन के ठिकाने पर हमले के आदेश सहित कुछ रवैये, ट्रम्प के दौर की नीति की याद दिलाते हैं। ऐसा लगता है कि बाइडेन भी सऊदी और ज़ायोनी माफ़िया के उकसावे में ट्रम्प के नक़्शे क़दम पर चल रहे हैं।

बाइडेन सरकार ने इराक़ में अमरीकी छावनियों पर संदिग्ध हमलों के बहाने न सिर्फ़ अर्बील में नैटो के नाम पर अमरीकी सैनिकों की तादाद बढ़ा दी है बल्कि इसी बहाने इराक़ की सीमा और सीरिया के भीतर  हिज़्बुल्लाह फ़ोर्सेज़ के ठिकाने पर हवाई हमले किए। यह ऐसी हालत में है कि इस फ़ोर्स का इराक़ी स्वयंसेवी बल हश्दुश शाबी की तरह दाइश के ख़िलाफ़ संघर्ष में अहम योगदान था और इस वक़्त इराक़-सीरिया सरहद पर तैनात होकर दोनों देशों के बीच तकफ़ीरियों के संपर्क को काट दिया है, इसलिए बूकमाल सीमा पर इराक़ी हिज़्बुल्लाह फ़ोर्सेज़ के ठिकाने पर हमले का एक लक्ष्य दोनों देशों की तकफ़ीरी फ़ोर्सेज़ के बीच संपर्क क़ायम करना है, चाहे प्रचारिक स्तर पर इन हमलों का लक्ष्य ईरान को संदेश देना दर्शाया गया।

जमाल ख़ाशुक़्जी की हत्या में मोहम्मद बिन सलमान की सीधी संलिप्तता के ठोस सुबूत के बावजूद, बाइडेन सरकार ने सऊदी अरब के ख़िलाफ़ पाबंदी नहीं लगायी, जबकि अमरीका के राष्ट्रीय इंटेलिजेन्स निदेशालय की रिपोर्ट सामने आ चुकी थी। इस रवैये की न सिर्फ़ यूएन की विशेष रैपोर्टर (प्रतिवेदक) सहित विभिन्न हल्क़ों ने आलोचना की, बल्कि राजनैतिक हल्क़े यह संभावना जता रहे हैं कि बाइडेन सरकार भी ट्रम्प की दूध दुहने की नीति को जारी रखेगी। बाइडेन सरकार ख़ाशुक़्जी की हत्या में मोहम्मद बिन सलमान की संलिप्तता की रिपोर्ट छाप कर और उन्हें दंडित किये बिना, इस रिपोर्ट को ज़्यादा से ज़्यादा दुहने के हथकंडे के तौर पर इस्तेमाल करना चाहती है।

नेतनयाहू की अगुवाई में ज़ायोनी शासन के युद्धोन्मादी रवैये के बावजूद, ख़ास तौर पर नेतनयाहू के शासन काल में, सत्ताधारी डेमोक्रेट पार्टी की मानवाधिकार, अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा और परमाणु हथियारों से मुक़ाबले जैसी सैद्धांतिक नीतियों के सामने चुनौती पैदा होने के बावजूद, तीन महीने गुज़र गए मगर बाइडेन सरकार ने व्यवहारिक रूप से इस्राईल के ख़िलाफ़ कोई क़दम नहीं उठाया, बल्कि कुछ मामलों में बाइडेन के विदेश मंत्रालय ने साफ़ तौर पर ट्रम्प सरकार की नीतियों को मंज़ूरी दी जिससे पश्चिम एशिया के संबंध में ट्रम्प सरकार की तरह बाइडेन सरकार की नीतियों को दिशा निर्देश देने में ज़ायोनी माफ़िया की पैठ का पता चलता है।(MAQ/N)

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