अमरीकी, सीरिया में लीबिया जैसी स्थिति पैदा करनी चाहते हैंः रूस
रूस ने भी सीरिया में अमरीका के सैन्य हस्तक्षेप को अवैध बताते हुए इसका लक्ष्य बश्शार असद की सरकार को गिराना बताया है।
रूसी विदेश मंत्री सिर्गेई लावरोफ़ ने स्वीडन के अख़बार डॉगेन्स निहेतर (Dagens Nyheter) से इंटर्व्यू में कहा कि सीरियाई अधिकारियों की इजाज़त के बिना हस्तक्षेप बड़ी ग़लती है। उन्होंने कहा कि हमने अपने अमरीकी सहभागी से बारंबार कहा है कि यह बड़ी ग़लती है। जिस तरह उन्हें इराक़ी सरकार से इजाज़त मिली है उसी तरह उन्हें दमिश्क़ सरकार से इजाज़त लेनी चाहिए थी या फिर सुरक्षा परिषद में आते।
रूसी विदेश मंत्री का यह बयान गुरुवार को स्वीडन के इस अख़बार में प्रकाशित हुआ। उन्होंने कहा, “वास्तव में उनका वहां अवैध रूप से जाना एक तो उनके घमंड भरे दृष्टिकोण को दर्शाता है कि बश्शार असद एक अवैध शासन के प्रमुख हैं। दूसरा मेरे विचार में, अपना हाथ खुला रखना चाहते हैं ताकि न सिर्फ़ गठबंधन को आतंकियों के ठिकाने पर हमले के लिए इस्तेमाल करें बल्कि शायद बाद में शासन की सेना को भी रास्ते से हटाने का इरादा रखते हैं, जैसा कि लीबिया में हुआ।”
रूसी विदेश मंत्री ने कहा कि रूस एकमात्र देश हैं जो सीरिया में क़ानूनी दृष्टि से आतंकवाद के ख़िलाफ़ कार्यवाही में शामिल है।
सितंबर 2014 से अमरीका और कुछ उसके घटक सीरिया में दाइश के ठिकानों पर कथित रूप से हवाई हमले कर रहे हैं।
सीरिया सरकार ने दोषी ठहराया है कि ज़्यादातर इन हमलों में सीरिया की मूल रचनाओं को निशाना बनाया गया है और इसका आतंकियों की प्रगति को रोकने में बहुत कम असर हुआ है।
अमरीकी अतिक्रमण
गुरुवार को दमिश्क़ सरकार ने अमरीका की स्पेशल फ़ोर्सेज़ के 150 सैनिकों के सीरिया में अवैध रूप से प्रवेश को सीरिया की संप्रभुता का खुला उल्लंघन बताते हुए इसे अतिक्रमण की संज्ञा दी है।
सीरिया के विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में आया है कि सीरिया के कुर्द बाहुल उत्तरी प्रांत हसका के रुमैलन क़स्बे में सैनिक दाख़िल हुए हैं। इस बयान में आगे आया है कि सैनिकों की तैनाती को स्वीकार करते हैं। यह सीरिया के मामले में अवैध रूप से हस्तक्षेप है क्योंकि इस संदर्भ में सीरियाई सरकार की इजाज़त नहीं ली गयी। (MAQ/N)