विदेशियों से अफ़ग़ानिस्तान को सिवाए विनाश के कुछ नहीं मिला
अफ़ग़ानिस्तान के भूतपूर्व ऊर्जा मंत्री ने कहा है कि देश को अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति से कुछ भी हासिल नहीं हुआ।
मुहम्मद इस्माईल ख़ान का कहना है कि अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की दीर्धकालीन उपस्थिति भी इस देश को कोई लाभ नहीं पहुंचा सकी। उन्होंने एक सभा को संबोधित करते हुए अफ़ग़ानिस्तान से अमरीकी सैनिकों की वापसी का स्वागत किया।
इस्माईल ख़ान का कहना था कि विदेशी शक्तियों पर भरोसा किसी के भी हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि इसको हमने बहुत निकट से देखा है। उनका कहना था कि अफ़ग़ानिस्तान की जनता मिलकर देश को संकट से मुक्ति दिला सकती है।
अफ़ग़ानिस्तान के भूतपूर्व ऊर्जामंत्री ने तालेबान को संबोधित करते हुए कहा कि हम तुमको बताना चाहते हैं कि देश की सत्ता को बलपूर्वक हासिल करना संभव नहीं है। उनका कहना था कि कई सालों तक हमले करने के बावजूद रूस, अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़ा नहीं कर सका।इस्माईल ख़ान ने यह भी कहा कि ग्यारह सितंबर की घटना के बाद 50 से अधिक देशों ने एकजुट होकर अफ़ग़ानिस्तान पर हमला किया। वे इस देश मे तथाकथित लोकतंत्र थोपना चाहते थे किंतु लगभग 20 वर्षों की उपस्थिति के बावजूद उनके हाथ क्या लगा यह पूरी दुनिया जानती है। इस्माईल ख़ान ने तालेबान से हिंसा का मार्ग छोड़कर शांति का रास्ता अपनाने का आह्वान किया।
उनल्लेखनीय है कि अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद के विरुद्ध संघर्ष के नाम पर अमरीका और उसके घटकों ने सन 2001 में इस देश पर हमला किया था। उस हमले के बाद से अफ़ग़ानिस्तान में आतंकवाद से संघर्ष तो दूर की बात वहां पर आतंकवादी गतिविधियों में बहुत वृद्धि हुई जिसके कारण हज़ारों निर्दोष लोगों की जान चली गई। इसके अतिरिक्त अफ़ग़ानिस्तान में अमरीकी सैनिकों की उपस्थिति के दौरान मादक पदार्थों के उत्पादन और उनकी तस्करी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।