टिनटिन व सिंदबाद किताब में पश्चिम और पूरब के नायकों की तसवीर
ईरान के एक विख्यात लेखक हैं मोहम्मद मीर कियानी जिनकी बाल साहित्य के क्षेत्र में बड़ी शानदार रचनाएं हैं।
वह 58 साल के हैं और बच्चों तथा किशोरों के लिए बहुत सी पुस्तकें लिख चुके हैं। वह रेडियो के लिए ड्रामे भी लिखते हैं। मीर कियानी की पुस्तकों को ईरान में बड़ी लोकप्रियता मिली जबकि इन पुस्तकों का विदेशी भाषाओं में भी अनुवाद किया गया और पाकिस्तान तथा जर्मनी में इन पुस्तकों के प्रशंसकों की एक बड़ी संख्या है। वर्ष 1990 और वर्ष 2000 में जर्मनी के म्युनिख़ अंतर्राष्ट्रीय केन्द्र ने मोहम्मद मीर कियानी की पुस्तक पापेर और रूज़ी बूद व रूज़ी न बूद को बहुत सराहा तथा वर्ष 2006 में उनकी पुस्तक क़िस्सेहाए मा मसल शुद को इस्लामी गणतंत्र ईरान की सर्वोत्तम पुस्तक चुना गया। मीर कियानी ने अलग अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए अलग अलग विषयों पर लगभग 500 पुस्तकें लिखी हैं।
मोहम्मद मीर कियानी ने अपनी पुस्तक टिनटिन व सिंदबाद वर्ष 1991 में लिखी तथा अपने समय की नई समस्या को इस पुस्तक की कहानियों का मुख्य विषय बनाया। लेखक का प्रमुख उद्देश्य पूर्वी जगत पर पश्चिम के सांस्कृतिक हमले को रेखांकित करना है।
तिन तिन व संदबाद पुस्तक वास्तव में टिनटिन व सिंदबाद नाम के दो काल्पनिक व्यक्तित्वों की तुलना करती है जो पूरब और पश्चिम की दो संस्कृतियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इस पुस्तक में पूरब की प्रचीन कहानियों और पश्चिम के काल्पनिक क़िस्सों की तुलना की गई है। संदबाद और अली बाबा जैसे व्यक्तित्व जो किसी ज़माने में पूर्वी देशों की कहानियों में मौजूद हुआ करते थे इस पुस्तक में पश्चिम के काल्पनिक नायकों के मुक़ाबले में खड़े दिखाई देते हैं। इस पुस्तक में हम देखते हैं कि पूरब की प्राचीन कहानियों के नायक बड़े संयम और विवेक के साथ पश्चिम के हिंसाप्रेमी नायकों का मुक़ाबला करते हैं तथा अपने संयम और धीरज से धरती को मुक्ति दिलाते हैं। मीर कियानी ने इस तरह यह प्रयास किया है कि एक एतिहासिक तथ्य को कहानी के रूप में युवाओं और किशोरो के सामने पेश करें।
इस पुस्तक में टिनटिन नाम का जो व्यक्तित्व नज़र आता है वह वास्तव में कौन है? वर्ष 1929 में बेल्जियम के विख्यात लेखक जार्जेस प्रास्पर रेमी ने पहली बार काउंसिलों की धरती पर टिनटिन नाम की पहली सचित्र पुस्तक प्रकाशित की। इस पुस्तक में टिनटिन नाम के एक पत्रकार की कहानी है जो अपने कुत्ते मीलू के साथ सोवियत संघ की यात्रा पर जाता है जो पूर्वी ब्लाक का केन्द्र था। यह पत्रकार देखता है कि सोवियत संघ में बड़े अत्याचारी लोग राज करते हैं।
जब यह पुस्तक प्रकाशित हुई तो पश्चिमी देशों में इसे बहुत पसंद किया गया। बाद में इस पुस्तक का अगला संस्करण प्रकाशित किया गया और उसका कई भाषाओं में अनुवाद भी हुआ। टिनटिन का पात्र युवाओं और किशोरों में बहुत लोकप्रिय हो गया और इसे चतुर और आकर्षक पश्चिमी युवा के रूप में देखा जाने लगा। इस बीच कम्युनिस्ट रूसियों, कांगो के स्थानीय क़बीलों और अमरीका के कालों की बड़ी हिंसक छवि इस पुस्तक में पेश की गई। इसमें यह साबित किया गया कि पश्चिमी संस्कृति अन्य संस्कृतियों से बेहतर है। टिनटिन जहां भी जाता है उसे कठिनाइयों में घिरे लोग दिखाई देते और अमरीका तथा पश्चिमी देशों की फ़िल्मों की तरह टिनटिन भी मोक्षदाता का रोल निभाता तथा अपने साथियों की मदद से लोगों की समस्या दूर करता है।
टिनटिन व सिंदबाद पुस्तक की कहानी यहां से शुरू होती है कि टिनटिन के नेतृत्व में पश्चिमी देशों के नायकों की एक टीम पूर्वी देशों की यात्रा पर निकलती है ताकि इन देशों में अपनी फ़तह के झंडे गाड़े। इस बीच पूर्वी देशों से सिंदबाद के नेतृत्व में स्थानीय नायकों की टीम टिनटिन की टीम का मुक़ाबला करती है। इस मुक़ाबले में आख़िरकार सिंदबाद की टीम टिनटिन की टीम को हरा देती है। लेखक के इस अनूठे विचार से पूर्वी जगत के उन महानायिकों की याद ताज़ा हो गई जो बिल्कुल भुला दिए गए हैं। सिंधबाद, अली बाबा, अलाउद्दीन, जादुई चिराग़ आदि जो किसी युग में क़िस्सों कहानियों की शोभा बढ़ाते थे।
टिनटिन और उसके साथी इस कहानी में किसी भी तरकीब से जीत हालिस करने की कोशिश करते हैं जबकि सिंधबाद इन हमलावरों का मुक़ाबला करता है। टिनटिन को जब अपनी पराजय का यक़ीन हो जाता है तो वह पश्चिम के अन्य महानायकों की मदद लेता है इस तरह सुपरमैन, टार्ज़न और किंग कांग भी इस कहानी में शामिल हो जाते हैं। कांटे की टक्कर होती है लेकिन अंत में सिंधबाद की टीम अपनी सूझबूझ और आत्म विश्वास की मदद से हमलावरों को पराजित कर देती है। टिनटिन की टीम हार जाती है और अपने घर लौटती है लेकिन अगले हमले की योजना तैयार करने में व्यस्त रहती है।
टिनटिन व सिंदबाद पुस्तक अब तक 14 बार प्रकाशित हो चुकी है लेकिन इसके आकर्षण में कोई कमी नहीं आई है और इसे आज भी चाव से पढ़ा जाता है। इस समय जब पूर्वी देशों पर पश्चिम का सांस्कृतिक प्रहार बहुत व्यापक हो गया है तो इस पुस्तक पर नज़र दौड़ाना बहुत उचित प्रतीत होता है। एक दृष्य यह है कि टिनटिन और उसके साथ पूर्वी जगत के एक तट पर अपनी नौका से उतरते हैं। इतने में सिंदबाद और उसके साथ भी वहीं जा पहुंचते हैं। होता यह है कि टिनटिन और उसके साथ तट पर खड़े होते हैं कि इतने में एक बादबानी नौका तट के क़रीब आती दिखाई देती है। उस पर से एक युवा उतरता है। तट पर मौजूद बूढ़ा मछुआरा युवा को देखने ही ख़ुशी से चिल्ला उठता है सिंदबाद सिंदबाद बहुत अच्छा हुआ तुम आ गए।
टिनटिन ने यह सुना तो अपने साथी प्रोफ़ेसर से पूछा कि क्या तुमने इससे पहले कभी यह नाम सुना है। प्रोफ़ेसर अपनी एनक ठीक करते हुए कहता है कि समूचे पूर्वी जगत में सिंदबाद को लोग जानते हैं। मैंने उसके बारे में पढ़ा है वह एक साहसी युवा है। कैप्टन हाडोक यह सुनकर बहुत नाराज़ होता है और कहता है कि प्रोफ़ेसर तुम इतना गुणगान न करो। सिंदबाद कुछ भी हो हमारे सामने नहीं टिक सकता।
सिंदबाद एक लंबे क़द का गबरू जवान था। बहुत जंचते हुए कपड़े पहने था और पैरों में चमड़े के जूते थे। सिंदबाद आगे बढ़ा और उसने टिनटिन से पूछा कि आप सज्जनों को इससे पहले मैंने कभी नहीं देखा। आप कहां से आए हैं। आपकी वेशभूषा से लगता है कि आप पश्चिमी जगत के रहने वाले हैं। टिनटिन ने यह सुनते ही सिंदबाद से हाथ मिलाया और अपना तथा अपने साथियों का परिचय कराया। कैप्टन हाडोक ने बिगड़कर कहा कि टिनटिन से मेरा परिचय कराने की कोई ज़रूरत नहीं है मैं अपना परिचय खुद अलग अंदाज़ में करवाउंगा।
सिंदबाद ने हाडोक को घूरकर देखा और उसके क़रीब जाकर कहा कि इसका मतलब मेरा अनुमान सही था। तुम लोग किसी अच्छी भावना से यहां नहीं आए हो। ख़ासकर यह कैप्टन जो झगड़ने के लिए बहुत बेताब दिखाई पड़ते हैं। जहां तक मेरी नीयत का सवाल है तो मैं केवल इस लिए आया हूं कि इस नौका के यात्रियों से परिचित हो सकूं। प्रोफ़ेसर ने ऊंची आवाज़ में क़हक़हा लगाते हुए कहा कि हम यहां एतिहासिक यात्रा के लिए आए हैं। यदि तुम हमारी मदद करो और हमें वहां पहुंचा दो जहां हम पहुंचना चाहते हैं तो तुमें भी बड़ा धन मिलेगा और हम लोग भी बहुत ख़ुश हो जाएंगे।
सिंदबाद ने मुसकुराकर कहा कि हमारी कहानियों वाली धरती पर क़ब्ज़ा करके आप लोग केवल ख़ुश होंगे या कुछ और योजनाएं भी आपने अपने मन में पाल रखी हैं। कैप्टन हाडोक ने ग़ुस्से में कई क़दम आगे आते हुए कहा कि हम तुम्हारे सवालों के जवाब देने पर मजबूर नहीं हैं। अब तुम एक काम करो फौरन यहां से फूट लो।
सिदंबाद ने सवाल किया कि मैं कहां जाऊं? क्या पश्चिमी जगत चला जाऊं? मेरा तो जन्म ही इस पूर्वी जगत में हुआ है। कैप्टन ने कहा कि अपनी नौका में वापस जाओ। यह सुनकर सिंदबाद को ग़ुस्सा आ गया। उसने धमकी भरे स्वर में कहा कि अगर एसा है तो कान खोलकर सुन लो। यहां से मैं नहीं जाउंगा तुम्हें भागना होगा। यह हमारी धरती है। सिंदबाद अपनी धरती को हरगिज़ नहीं छोड़ सकता। सिंदबाद अपनी धरती से निकल जाए तो उसकी कोई हैसियत ही नहीं रह जाएगी। मैं सात तक गिनूंगा यदि इतनी देर में तुम लोग अपनी नौका में सवार होकर यहां से नौ दो ग्यारह हो गए तो ठीक है वरना तुम्हारी नौका यहां से तुम्हारे बग़ैर वापस जाएगी।
अचानक सिंदबाद ने हाथ हवा में लहराए और तेज़ी से नीचे गिरा लिए। टिनटिन और उसके साथियों के आश्चर्य की सीमा नही रही क्योंकि सिंदबाद के हाथ लहरा देने से ही उनकी नौका के इंजन चालू हो गए। कैप्टन हाडोक जो अब तक बहुत ग़ुस्से में था धीरे धीरे सामान्य हो गया। उसने कहा कि सिंदबाद कोई बात नहीं आज तो हम यहां से चले जाते हैं लेकिन याद रखो कि यदि कभी पश्चिमी जगत में तुम मिल गए तो तुम्हारी अच्छी आवभगत करेंगे। यह कहते हुए कैप्टन हाडोक ने कन्खियों से अपने साथियों को देखा और उन्हें इशारा किया कि जितनी जल्दी हो सके नौका पर सवार हो जाएं।