Sep ०७, २०१६ १०:१५ Asia/Kolkata

पिछले साल इमाम हुसैन (अ) के चेहलुम के दिन नाइजीरिया का ज़ारिया शहर कर्बला का दृश्य पेश कर रहा था।

इस शहर में स्थित बक़ीयतुल्लाह इमामबाड़े में इमाम हुसैन के चाहने वालों को मारा और काटा जा रहा था। वही सुरक्षाकर्मी कि जिन्होंने लोगों की सुरक्षा का हलफ़ लिया था, उन पर गोलियां बरसा रहे थे। कूफ़े के लोगों ने भी पहले इमाम हुसैन (अ) के समर्थन का वादा किया था, लेकिन जब इमाम हुसैन उनके निकट पहुंचे तो उन्होंने इमाम हुसैन और उनके साथियों पर तलवारें तान लीं।

इमाम हुसैन (अ) का क़ाफ़िला इतिहास के मार्ग पर आगे बढ़ रहा था। कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि आप कर्बला में हैं, ज़ारिया में, लेबनान में या हलब में। जहां कहीं भी हों या जिस समय में भी हों, आप इमाम हुसैन के क़ाफ़िले से जुड़ सकते हैं और कर्बला के शहीदों में अपनी गिथनी करा सकते हैं।

पिछले साल इमाम हुसैन (अ) के चेहलुम के दिन ज़ारिया में बक़ीयुल्लाह इमामबाड़े में नाइजीरियाई सैनिकों ने इमाम हुसैन का ग़म मनाने वालों पर ज़ुल्म के पहाड़ तोड़ दिए। उनके नेता शेख़ इब्राहीम ज़कज़की को बुरी तरह घायल कर दिया और उनकी पत्नी, बहन और बेटों को गोलियों से भून डाला। उन्होंने एक हज़ार से अधिक श्रद्धालुओं को शहीद कर दिया और सामूहिक क़ब्रों में दफ़्ना दिया।

यहां यह सवाल उठता है कि आख़िर इमाम हुसैन का ग़म मनाने वालों ने ऐसा कौन सा अपराध किया था, जो उन्हें बर्बरतापूर्ण कुचल दिया गया। क्या वे हथियारों से लैस थे। क्या उन्होंने किसी पर हमला किया था और किसी के लिए कोई समस्या उत्पन्न की थी। नहीं वे केवल इमाम हुसैन (अ) की शहादत का ग़म मना रहे थे और उनके पास आंसूओं के अलावा कुछ नहीं था।

आज ज़ारिया के शहीद हमारे ज़माने के सबसे मज़लूम शहीद हैं, जिन्हें किसी अपराध और उकसावे की कार्यवाही के बिना शहीद कर दिया गया। इन शहीदों पर हुए अत्याचारों की याद में कविताएं और किताबें लिखी जानी चाहिएं, ताकि इतिहास के पन्नों में उनकी यह क़ुर्बानी गुम न हो जाए।

इस जनसंहार के बाद, नाइजीरिया और पड़ोसी देशों के मुसलमानों के नेता शेख़ इब्राहीम याक़ूब ज़कज़की और उनकी पत्नी को उनके घर पर धावा बोलकर, घायल अवस्था में गिरफ़्तार कर लिया गया। शेख़ ज़कज़की नाइजीरिया में न केवल मुसलमानों के लिए बल्कि दूसरे धर्मों के अनुयाईयों के लिए नैतिकता का आदर्श हैं। नाइजीरियाई सैनिकों ने उन लोगों को भी गोलियों से भून डाला जो अपने नेता की गिरफ़्तारी का विरोध कर रहे थे और उनकी सुरक्षा के लिए चिंतित थे।

नाइजीरियाई सेना ने अपनी बर्बरता पर पर्दा डालने के लिए एक झूठी कहानी गढ़ी और मीडिया में द्वारा यह अफ़वाह फैला दी कि कुछ ही दिन पहले शेख़ ज़कज़की के नेतृत्व में शिया समुदाय के लोगों ने सैन्य प्रमुख तूकूर यूसुफ़ बोरोताई के क़ाफ़िले का रास्ता रोका था और उस पर हमला किया था। इसी कारण सैनिकों ने कार्यवाही करते हुए शिया मुस्लिम समुदाय के केन्द्रीय शहर ज़ारिया में कार्यवाही की थी। सैनिकों के हमले के शुरूआती घंटों में ही शेख़ ज़कज़की ने टेलीफ़ोन पर बातचीत के दौरान सेना की इस कार्यवाही की निंदा करते हुए उसके इस प्रकार के दावों को झूठा क़रार दिया था। शेख़ ज़कज़की के इस इंटरव्यू के बाद, नाइजीरियाई सैनिकों ने उनके घर पर व्यापक हमला करके एक बड़ी त्रासदी को जन्म दिया।

यहां यह सवाल ज़हन में आता है कि क्यों नाइजीरियाई सरकार शेख़ ज़कज़की से इतना अधिक भयभीत है। शेख़ ज़कज़की भी ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक इमाम ख़ुमैनी की भांति एक ऐसे नेता हैं कि जिनसे लोग बहुत प्रेम करते हैं। उनका व्यक्तित्व पारदर्शी है और वे लोगों के बीच बहुत अधिक लोकप्रिय हैं, लोग उनपर अपनी जानें क़ुर्बान करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने अपने आचरण और नैतिकता से बड़ी संख्या में लोगों को शिया इस्लाम की ओर आकर्षित किया है। आज नाइजीरिया और आसपास के देशों में करोड़ों लोग उनके कारण, मुसलमान हो चुके हैं और अहले बैत (अ) की शिक्षाओं का अनुसरण कर रहे हैं। नाइजीरियाई सरकार और सेना इस वास्तविकता से भयभीत है। उसे डर है कि कहीं शेख़ ज़कज़की देश में धार्मिक क्रांति न कर दें। इसी भय के कारण नाइजीरियाई सरकार और सेना ने यह साज़िश रची और ज़ारिया के निर्दोष आम नागरिकों का जनसंहार किया है।

शेख़ इब्राहीम ज़कज़की के निकट एक सूत्र ने ईरान की समाचार एजेंसी सुबह नौ के साथ बातचीत में बताया कि शेख़ ज़कज़की और उनकी पत्नी कई महीनों से जेल में बंद हैं, इस दौरान उनकी बाईं आंख के अलावा दाईं आंख की भी रोशनी जा रही है। शेख़ ज़कज़की के साथ कठोर चिकित्सा व्यवहार की ओर संकेत करते हुए सूत्र ने बताया कि बहुत ही सीमित सुविधाओं के साथ शेख़ ज़कज़की की दाईं आंख का जब आपरेशन हुआ तो आंख की थोड़ी रोशनी वापस आ गई थी, लेकिन उन्हें जिन हालात में रखा गया उसके कारण बाईं आंख की तरह जिससे दिखाई देना बंद हो चुका है अपनी रोशनी खो रही है। इसलिए इस आंख के उपचार के लिए एक अच्छे चिकित्सक और उपचार की ज़रूरत है।

इस सूत्र का कहना था कि शेख़ ज़कज़की और उनकी पत्नी को बहुत ही ख़राब स्थिति में क़ैद करके रखा गया है और उन्हें यातनाएं दी जाती हैं, हालांकि पिछले कुछ महीनों से सीमित स्तर पर उनसे मुलाक़ात और टेलीफ़ोन पर बात करने की अनुमति दी गई है और परिस्थिति में थोड़ा बदलाव हुआ है।

शेख़ इब्राहीम ज़कज़की और उनकी पत्नी की गिरफ़्तारी के बाद से नाइजीरिया की जनता उनकी आज़ादी के लिए क़रीब हर दिन या हर हफ़्ते विशाल प्रदर्शनों का आयोजन करती है। नाइजीरियाई सरकार देश की जनता के डर से शेख़ ज़कज़की की हत्या नहीं कर सकी। अब फ़्री ज़कज़की या ज़कज़की को आज़ाद करो कैम्पेन पश्चिमी अफ़ीक़ा के देशों में फैल चुकी है। दूसरे यह कि मोहम्मदू बूहारी के नाइजीरिया का राष्ट्रपति बनने के बाद, देश की आर्थिक स्थिति अधिक ख़राब हो गई है और आम लोग अप्रसन्न है। लोगों का मानना है कि देश में शेख़ ज़कज़की के ऊपर होने वाले अत्याचारों के कारण, आर्थिक संकट शुरू हुआ है।

शेख़ ज़कज़की की भतीजी ज़किया ज़कज़की ने ईरान की समाचार एजेंसी ईकना से बात करते हुए कहा कि उनकी एक आंख को नुक़सान पहुंचा है और दूसरी आंख से भी कम दिखाई दे रहा है, वह अपनी एक टांग को हिला जुला नहीं सकते और चल फिर नहीं सकते, उनके पेट में गोलियां लगी हैं, एक गोली अभी तक बाहर नहीं निकाली जा सकी है। उनके कई आपरेशन हो चुके हैं और अभी कई और होने हैं।

ज़किया ज़कज़की ने शेख़ ज़कज़की और उनके परिवार पर होने वाले अत्याचारों के बारे में कहा, एक दिखावटी अदालत का गठन हुआ कि जिसके समस्त कर्मचारी वहाबी थे, उन्होंने यह साबित किया कि न्याय से उन्हें कोई लेना देना नहीं है और उनका मक़सद जनसंहार करने वालों की पहचान या पीड़ितों को न्याय दिलाना नहीं है। यह अदालत एक प्रकार से विश्वासों की खोजबीन की अदालत है, इसलिए कि वहां पैग़म्बरे इस्लाम (स) के शिया होने या न होने जैसे विषयों को उठाया जाता है।

दुर्भाग्यवश विश्व में मानवाधिकारों का दावा करने वाले इस जनसंहार और शेख़ ज़कज़की पर होने वाले अत्याचारों पर चुप्पी साधे हुए हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि दुनिया में यह प्रचलन हो चला है कि मुसलमानों और अहले बैत (अ) के चाहने वालों का जनसंहार और उन पर अत्याचार सही है, चाहे वे ज़ारिया में हों, यमन में हों, सीरिया में हों या इराक़ में। आज के ज़माने में यह परम्परा बन चुकी है।

शेख़ ज़कज़की के ज़िंदा बच जाने वाले एकमात्र बेटे मोहम्मद ज़कज़की जेल में अपने पिता की ख़राब स्थिति और शियों के जनसंहार पर विश्व समुदाय की चुप्पी की शिकायत करते हैं। मोहम्मद ज़कज़की एक खुले पत्र में अपने पिता और नाइजीरियाई शिया मुसलमानों के नेता की सुरक्षा को लेकर नाइजीरियाई सरकार के व्यवहार की आलोचना करते हैं और दुनिया भर के न्याय प्रेमियों से मदद की अपील करते हैं।

मोहम्मद ज़कज़की लिखते हैं, नाइजीरियाई सेना के तत्वों द्वारा निर्दोष लोगों के जनसंहार के बारे में नाइजीरियाई सरकार के आयोग की रिपोर्ट में स्वीकार किया गया है कि इस जनसंहार में 1,000 से अधिक लोग लापता हो गए, 340 से अधिक लोगों को सामूहिक क़ब्र में दफ़्न कर दिया गया, सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार कर लिया गया और करोड़ों नाइजीरियाई नायरा की संपत्ति बर्बाद कर दी गई। वास्तव में इस स्थिति को देखना बहुत कठिन है, वह भी ऐसी हालत में जब उन्होंने मेरे तीन भाईयों समेत निर्दोष लोगों की हत्या कर दी, ऐसी हालत में जब दिन प्रतिदिन मेरे पिता की आंखों की रोशनी कम हो रही है, लेकिन सरकार विभिन्न बहाने बनाकर किसी विशेषज्ञ द्वारा उनके उपचार की अपीलों को टाल रही है। पिछले आठ महीनों के दौरान मुझे केवल 4 बार उनसे मुलाक़ात की अनुमति दी गई।

मोहम्मद ज़कज़की कहते हैं, यह सही है कि इस स्तर की घृणा और चरमपंथ के मुक़ाबले में मैं असहाय हूं। एकमात्र काम जो मैं कर सकता हूं, वह शिकायत है। अगर हिंसा करना शक्ति का प्रदर्शन है, तो मैं कह सकता हूं कि मेरे पास ऐसी शक्ति नहीं है। अंत में वे उन समस्त लोगों से जो न्याय और मानवीय सम्मान को बचाने पर विश्वास रखते हैं, मांग करते हैं कि उनकी और नाइजीरियाई लोगों की आवाज़ से आवाज़ मिलाकर आपत्ति करें, और देर होने से पहले कुछ करें ताकि नाइजीरिया के मुसलमानों के लोकप्रिय नेता आयतुल्लाह शेख़ इब्राहीम ज़कज़की स्वस्थ और सुरक्षित रहें।