मार्गदर्शन- 46
मार्ग दर्शन कार्यक्रम के अंतर्गत हम पैग़म्बरे इस्लाम और उनके परिजनों के जीवन के विभिन्न आयामों से परिचित होते हैं।
इस ऐतिहासिक सैर में हम पैग़म्बरे इस्लाम और उनके परिजनों के बारे में इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई के दृष्टिकोणों पर चर्चा कर रहे हैं। हमने इस कार्यक्रम के अंतर्गत पैग़म्बरे इस्लाम के ग्यारह परिजनों अर्थात ग्यारह इमामों के बारे में आपको बताया जिनमें सबका संबंध पैग़म्बरे इस्लाम की पाक पीढ़ी से है। अब हम पैग़म्बरे इस्लाम के 12वें पौत्र इमाम महदी अलैहिस्सलाम की जीवनी पर प्रकाश डालेंगे। वह ऐसा मोती हैं जो दुनिया में प्रकट होकर संसार को न्याय से भर देंगे जब वह अन्याय और अत्याचार से भर चुका होगा। हज़रत इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम के पुत्र और पैग़म्बरे इस्लाम के पौत्र हज़रत इमाम महदी के बारे में वरिष्ठ नेता के दृष्टिकोणों पर चर्चा करेंगे।
जब इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम इस नश्वर संसार से जाने लगे तो उस समय मोअतज़िद अब्बासी का शासन था। इसी अब्बासी शासक के विष के कारण वह शहीद हुए। तब तक बहुत ही कम लोगों को पता था कि उनके पुत्र का नाम महदी है। जब उनके पिता के दफ़न का समय निकट आया तो उनका पुत्र प्रकट हुआ और उसने अपने चाचा को एक ओर हटाकर अपने पिता की शव पर अंतिम नमाज़ पढ़ी, सभी लोग आश्चर्य में थे कि क्या इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम के कोई पुत्र है?
इस घटना के बाद हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम ने चमत्कार दिखाए तथा अनदेखे संसार के रहस्य बयान किए। उन्होंने यह रहस्य बताकर यह दिखा दिया कि वह ईश्वर से जुड़े हुए हैं और समस्त पापों से पाक हैं और ईश्वरीय ख़िलाफ़त उनके योग्य है। दीनदार और धर्मपरायण लोग उनके पास एकत्रित होने लगे। दूसरी ओर अब्बासी शासन ने जो पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों से बुरी तरह भयभीत थे, इमम महदी की हत्या की योजना बना ली थी। इस प्रकार से हज़रत इमाम महदी गुप्त रूप से लोगों का मार्गदर्शन करते रहे। वे चार प्रतिनिधियों के माध्यम से गुप्त रूप से लोगों का मार्गदर्शन करते थे। इस अवधि को ग़ैबते सुग़रा का नाम दिया गया। यह वर्ष 69 वर्षों पर आधारित था।
अब्बासियों ने जो इमाम महदी को कठिनाइयों में ग्रस्त करना चाहते थे और सत्य पंथ की ओर लोगों के भारी रुझहान से बहुत चिंतित थे, सामर्रा शहर में उनको एक गुफ़ा में देख दिया और जैसे ही उनको गिरफ़्तार करने का प्रयास किया वे ईश्वरीय आदेश से नज़रों से ग़ायब हो गये ताकि धरती ईश्वर के प्रतिनिधि से ख़ाली न रहे और जब धरती अत्याचार और अन्याय से भर जाएगी तो वह धरती को न्याय और इंसाफ़ से भर देंगे।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के शुभ जन्म दिवस को पूरी मानवता के लिए आशा की किरण मानते हैं और और उनके पवित्र अस्तित्व के बारे में कहते हैं कि यह महा शुभजन्म दिन, अर्थात इमाम महदी अलैहिस्सलाम का शुभ जन्म दिन और यह महा सच्चाई, किसी एक राष्ट्र और किसी विशेष काल से संबंधित नहीं है बल्कि पूरी मानवता से संबंधित है। यह मनुष्य से ईश्वरीय वादा है, यह वह ईश्वरीय वादा है जिसके व्यवहारिक होने की गैरेंटी ली गयी है। पूरे इतिहास में समस्त लोग, इस महा और आश्चर्यजनक प्रक्रिया के संबंध में अध्यात्मिक भावनाएं रखते थे। चूंकि, अतीत से लेकर आज तक और आज से लेकर इमाम महदी के प्रकट होने तक दुनिया बुराई, अन्याय और अत्याचार से भर चुका है और वह समस्त लोग जो अत्याचारों से ऊब चुके हैं, चाहे वह लोग जिन पर अत्याचार हुआ हो और उन्होंने परेशानियां सहन की हों, या वह लोग जिन्होंने दूसरों पर अत्याचार होते देखा और पीड़ा सहन की, उन समस्त लोगों के मन में इस महान हस्ती के शुभ जन्म दिवस को याद करके आशा की किरणें जग जाती हैं।
इमाम महदी अलैहिस्सलाम की विशेषता और उनके गुण बयान करना जो पवित्रता के शिखर पर हैं, हर आम आदमी के बस की बात नहीं है। इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के उच्च और पवित्र स्थान के बारे में कहते हैं कि उनके गुणों को सरलता से बयान नहीं किया जा सकता। आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई इस बारे में कहते हैं कि ईश्वरीय ख़लीफ़ा और ईश्वरीय गुणों के प्रतीक इमाम महदी के उच्च स्थान और उनकी वास्तविकता के बारे में मुझ जैसे गुनहगार बंदे की ज़बान, बयान और दिल के बस की बात नहीं है। स्वयं इमाम ही इमाम महदी अलैहिस्सलाम के बारे में बातें करें, जैसा कि वह स्वयं ही हज़रत अली अलैहिस्सलाम और अन्य ईश्वरीय बंदों तथा इमामों के बारे में बातें करें। हमको केवल इतना ही पता है कि इमाम महदी अलैहिस्सलाम का पवित्र अस्तित्व, ईश्वरीय वादे का चरितार्थ है। हमको इतना ही पता है कि यह पैग़म्बरे इस्लाम और वहि के परिवार के चिराग़ हैं और धरती पर ईश्वर का लहराता ध्वज हैं। वह मानवता पर ईश्वर की कृपा का चरितार्थ और ईश्वरीय वादा हैं, वह ईश्वर के प्रसिद्ध बंदों, ईश्वरीय दूतों, ईश्वर के नेक बंदों का नमूना और रहस्य हैं। वह मनुष्यों पर ईश्वरीय अनुकंपाओं और विभूतियों का प्रदर्शन करने वले हैं। यह वह चीज़ें हैं जिन्हें उन्होंने स्वयं बयान की हैं, यदि हम अपनी कम समझी में महान बातों को समझने में सफल रहे, तो हम वास्तव में बहुत सफल रहे।
इस्लामी क्रांति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनेई की दृष्टि में पैग़म्बरे इस्लाम (स) का महान व पवित्र अस्तित्व, समस्त मनुष्यों, अपने पवित्र व पाक परिजनों और समस्त ईश्वरीय दूतों से सर्वोच्च है। उनका अस्तित्व सूर्य की भांति प्रकाशमयी अस्तित्व है जो धरती पर मानवता को, ईश्वर से जोड़ देता है। वरिष्ठ नेता पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों को ज्ञान, नैतिकता, भलाई, त्याग व बलिदान, सच्चाई, सत्य का भंडार और हर काल और समय में मनुष्य के भीतर पायी जाने वाली समस्त भलाईयों और अच्छायों का स्रोत बताते हैं और उसके बाद हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के पवित्र अस्तित्व के बारे में युवाओं को बताते हैं कि प्रिय युवा, उन्हीं चमकते सूर्यों में से एक, ईश्वरीय कृपा, दया और उसके इरादे से, हमारे काल में ईश्वर के एकमात्र ख़लीफ़ा हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम है जो धरती पर ईश्वर के ख़लीफ़ा हैं, आज उनके विभूतिपूर्ण अस्तित्व से पूरी मानवता लाभान्वित हो रही है। आज पूरी मानवता, अपनी परेशानियों, पथभ्रष्टताओं और कमज़ोरियों के बावजूद उस ईश्वरीय विभूति और ईश्वरीय कृपा से लाभान्वित हो रही है। आज इमाम महदी अलैहिस्सलमाम का पवित्र अस्तित्व, समस्त दुनिया वालों के लिए विभूति, भलाईयों, नेकियों और अनुकंपाओं का पात्र बना हुआ है। हमारी पापी और गुनहगार आंखें उसके पवित्र और ईश्वरीय चेहरे को निकट से नहीं देख पातीं, किंतु वह एक चमकते हुए सूर्य की भांति है जो दिलों और आत्माओं से जुड़ा हुआ है। वही ईश्वर के सच्चे बंदे है, ईश्वर के ख़लीफ़ा, ईश्वर की सच्ची निशानी, ईश्वर का तर्क और ईश्वर की पहचान का साधन हैं।
इस्लाम धर्म की शिक्षाओं में यह सब कुछ बयान किया गया है इसके अतिरिक्त इमाम ईश्वरीय अनुकंपाओं का साधन भी होता है अर्थात ईश्वर इस नेक और शालीन व योग्य पुरुष के माध्यम से समस्त लोगों तक अपनी अनुकंपाएं पहुंचाता है। यह ईश्वरीय अनुकंपाएं, हज़रत इमाम महदी के पवित्र अस्तित्व की देन हैं। वह बादलों में छिपा वह सूर्य है जो बादलों के पीछे होने के बावजूद अपनी किरणों और प्रकाश से लोगों को लाभान्वित करता रहता है, इसी तरह वह भी लोगों का मार्गदर्शन कर रहे हैं। वरिष्ठ नेता इस बारे में कहते हैं कि ईश्वर की ओर बुलाने वालों का क्रम टूटा नहीं है, हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम का पवित्र अस्तित्व, ईश्वर की ओर बुलाने वालों का ही क्रम है जैसा कि हम ज़ियारते आले यासीन में पढ़ते हैं कि आप हज़रत इब्राहीम का निमंत्रण, हज़रत मूसा का निमंत्रण, हज़रत ईसा का निमंत्रण, समस्त पैग़म्बरों, ईश्वरीय दूतों, नेक बंदों और अंतिम ईश्वरीय दूत हज़रत मुहम्मद (स) का निमंत्रण, आपके अस्तित्व में साक्षात देखते हैं। वह महान हस्ती, सभी ईश्वरीय दूतों के वारिस हैं और उनके निमंत्रण तथा उनके ध्वज के रखवाले हैं, आप दुनिया को उन्हीं शिक्षाओं की ओर बुलाते हैं जिनकी ओर समस्त ईश्वरीय दूतों और पैग़म्बरों ने बुलाया है।