मार्गदर्शन -48
शांति की प्राप्ति इंसान की मूल इच्छाओं में है।
शांति ऐसी चीज़ है जिसकी छांव में जीवन के बेहतरीन क्षण गुज़रते हैं और इसका इंसान पर आत्मिक व शारीरिक दृष्टि से अच्छा प्रभाव पड़ता है। इंसान उस समय भी आत्मिक शांति महसूस करता है जब उसके अधिकार पूरे आयाम के साथ सुरक्षित हों। शांति की प्राप्ति के महत्वपूर्ण साधनों में एक समाज में न्याय की स्थापना भी है। इस्लामी शिक्षाओं में न्यायपूर्ण माहौल को जीवन में मानवीय व आध्यात्मिक उत्थान की पृष्ठिभूमि बताया गया है। इसलिए मानवता के अंतिम मोक्षदाता के प्रकट होने के महत्वपूर्ण लक्ष्यों में मानव समाज में न्याय की मिठास घोलना है। मुसलमानों का मानना है कि पैग़म्बरे इस्लाम के वंश से बारहवें इमाम के प्रकट होने के बाद ही दुनिया में सही अर्थ में न्याय क़ायम होगा और साम्राज्यवादियों के हाथ से समाज की लगाम छिन जाएगी। दूसरे शब्दों में हक़दार को उसका हक़ मिलेगा। पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम इस बारे में कहते हैं, “महदी मेरी संतानों में है। वह ग़ाएब रहेंगे। जब प्रकट होंगे तो ज़मीन को न्याय से भर देंगे जिस तरह वह अत्याचार से भरी होगी।”
इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनई ने हज़रत महदी अलैहिस्सलाम के प्रकट होने के बाद एकेश्वरवाद की छांव में न्याय की स्थापना को उनके सबसे अहम नारों में बताया। वरिष्ठ नेता की नज़र में सिर्फ़ एकेश्वरवादी समाज में वास्तविक अर्थ में न्याय क़ायम हो सकता है और हज़रत महदी एकेश्वरवाद, आध्यात्मिक व धर्मपरायणता के नारे के साथ समाज में न्याय क़ायम करेंगे।
इस बारे में वरिष्ठ नेता कहते हैं, “हज़रत महदी का सबसे अहम नारा न्याय होगा। नुदबा नामक दुआ में जब इस महान हस्ती की विशेषताओं का वर्णन करते हैं तो कहते हैं मानवता तड़प रही है उसे मुक्ति दिलाने वाला आकर अत्याचार को जड़ से उखाड़ फेंके गया। अत्याचार के आधार को जो मानव इतिहास में प्राचीन समय से मौजूद रहा है और आज भी उसी तरह मौजूद है, धाराशाही करे और अत्याचारियों को उनकी औक़ात बताए। यह इमाम महदी के प्रकट होने का इंतेज़ार करने वालों की उनसे पहली विनती है। या आले यासीन ज़ियारत में जब इस महान हस्ती की विशेषताओं का वर्णन करते हैं तो उनकी इस विशेषता को सबसे अहम विशेषता कहते हैं कि वह अत्याचार से भरी दुनिया को न्याय से भर देंगे। उनसे यह अपेक्षा है कि वह दुनिया के किसी एक स्थान को नहीं बल्कि पूरी दुनिया में न्याय की पताका लहराएंगे।” इमाम महदी अलैहिस्सलाम के बारे में रवायत में भी इसी विशेषता का उल्लेख है। इसलिए हज़रत महदी के प्रकट होने का इंतेज़ार करने वालों की पहली अपेक्षा न्याय की स्थापना है।
इस्लामी रवायत में है कि इमाम महदी अलैहिस्सलाम जनता के ज़रिए दुनिया में न्याय क़ायम करेंगे। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई की नज़र में इमाम महदी अलैहिस्सलाम अपने अनुयाइयों और अपने ईमान की उच्च ताक़त के ज़रिए अत्याचारियों के ख़िलाफ़ उठ खड़े होकर अत्याचार की बिसात उलट देंगे।
वरिष्ठ नेता इस तरह वर्णन करते हैं, “पूरी दुनिया में न्याय की स्थापना के लिए ज़रूरी है कि न्यायप्रेमी व सदाचारी व्यक्तियों के हाथ में सत्ता की बागडोर हो और अत्याचारियों के ख़िलाफ़ पूरी शक्ति से बात करें। जो लोग सत्ता के नशे में डूबे होते हैं उनसे नसीहत की ज़बान में बात नहीं होती। ईश्वरीय दूतों ने नसीहत की ज़बान में अपना संदेश फैलाना शुरू किया लेकिन जब अनुयाइयों की संख्या बढ़ गयी तब वे एकेश्वरवाद व मानवता के दुश्मनों से ताक़त की ज़बान में बात करते थे।”
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई का मानना है कि नसीहत की ज़बान से दुनिया के किसी भी भाग में न्याय क़ायम नहीं होगा। हज़रत इमाम महदी इसलिए नहीं प्रकट होंगे कि अत्याचारियों को नसीहत करें कि वे लूटपाट व वर्चस्व से हाथ रोकें बल्कि वे उनके ख़िलाफ़ आंदोलन चलाएंगे।
कुछ रवायतों में आया है कि अत्याचारियों व साम्राज्यवादियों के ख़िलाफ़ उनका आंदोलन 8 महीने चलेगा और फिर उसके बाद सभी साम्राज्यवादियों का सफ़ाया हो जाएगा और दुनिया पूरी तरह उनके अधिकार में आ जाएगी।
इस्लामी रवायत के अनुसार, हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम की पूरी दुनिया पर हुकूमत पूरी तरह जनता की हुकूमत होगी और पूरी व्यवस्था जनता पर आधारित होगी। इस बात की व्याख्या में वरिष्ठ नेता कहते हैं, हज़रत महदी की भविष्य की हुकूमत कि उन पर हमारी जाने क़ुर्बान हों, पूरी तरह जनता की हुकूमत होगी। जनता की हुकूमत का अर्थ जनता की आस्था, संकल्प व प्रयास पर निर्भर होना है। इमाम महदी दुनिया को सिर्फ़ न्याय से नहीं भरेंगे बल्कि हर एक मोमिन बंदे की मदद से पूरी दुनिया में न्याय क़ायम करेंगे और एक पूरी तरह जनाधारित हुकूमत का गठन करेंगे।
आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई हज़रत इमाम महदी की हुकूमत को आज के दौर की हुकूमत की तरह नहीं मानते। वह इस बारे में कहते हैं, “यह जनता की हुकूमत आज की दुनिया की हुकूमत से कि जिसके प्रजातांत्रिक होने का दावा किया जाता है, बहुत भिन्न होगी। आज जिसे दुनिया में प्रजातंत्र का नाम दिया जाता है, वह वही पुरानी तानाशाही व्यवस्था है जिसने नया भेस बदल लिया है अर्थात गुटों की तानाशाही। अगर प्रतिस्पर्धा मौजूद भी है तो वह भी गुटों के बीच है, आम लोगों की इसमें कोई भागीदारी नहीं है। यह गुट सत्ता में पहुंचता है और राजनैतिक शक्ति के ज़रिए देश के सभी मामले उसके हवाले हो जाते हैं, वह इस शक्ति का दुरुपयोग करते हुए धन संपत्ति इकट्ठा करता है और उसी धन संपत्ति को फिर से सत्ता हथियाने के लिए इस्तेमाल करता है। आज की दुनिया की प्रजातांत्रिक सरकारें झूठे व धूर्तता भरे प्रचार पर टिकी होती हैं। ऐसे धूर्तता भरे प्रचार कि आंख व मन सम्मोहित हो जाएं। प्रजातंत्र पैसों के हाथ में क़ैदी है। इमाम महदी की प्रजातांत्रिक सरकार धार्मिक प्रजातंत्र पर आधारित होगी जो इस शैली से पूरी तरह अलग होगी।”
इस महा सच्चाई से दुनिया के लुटेरे ख़ुश नहीं होंगे कि दुनिया में एक न्यायपूर्ण हुकूमत क़ायम होगी। साम्राज्यवादी जो सत्ता से हिंसा फैलाने व राष्ट्रों को लूटने का काम ले रहे हैं, अंतिम मोक्षदाता हज़रत इमाम महदी के प्रकट होने के सबसे बड़े दुश्मन हैं। इसलिए वे फ़िल्म सहित दूसरे प्राचारिक उत्पादों से हज़रत मेहदी के प्रकट होने के ख़िलाफ़ प्रोपैगंडा कर रहे और यह दर्शाने की कोशिश कर रहे हैं कि हज़रत महदी के प्रकट होने के बाद की दुनिया अस्त व्यस्त दुनिया होगी। वे पूरी कोशिश कर रहे हैं लोगों के मन से अंतिम मोक्षदाता के प्रकट होने की उम्मीद ख़त्म कर दें। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई इस बारे में अहम बिन्दु का उल्लेख करते हैं। वह कहते हैं, “हमारी बहस उन दुश्मनों के बारे में है जिन्होंने इस आस्था को निशाना बनाया है। मैंने एक दस्तावेज़ देखा जो दसियों साल पहले के बारे में है। अर्थात जिन दिनों उत्तरी अफ़्रीक़ा में साम्राज्य ने प्रवेश किया। उत्तरी अफ़्रीक़ी देश पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों से बहुत आस्था रखते हैं। वह किसी भी इस्लामी मत के अनुयायी हों लेकिन पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों से आस्था रखते हैं। सूडान और मोरक्को आदि में अंतिम मोक्षदाता के प्रकट होने की आस्था बहुत मज़बूत है। जिन दिनों साम्राज्य अपना प्रभाव बनाने उक्त क्षेत्रों में पहुंचा कि उक्त क्षेत्रों में साम्राज्य पिछली शताब्दी में पहुंचा, तो उसके मार्ग में जो विषय रुकावट बन रहा था वह अंतिम मोक्षदाता के प्रकट होने का विषय था।” जो दस्तावेज़ मैंने देखी उसमें साम्राज्यवाद के सरग़ना यह अनुशंसा करते हैं कि लोगों के मन से हज़रत महदी के प्रकट होने की आस्था धीरे-धीरे ख़त्म की जाए। उन दिनों फ़्रांसीसी व ब्रितानी साम्राज्य उत्तरी अफ़्रीक़ा के कुछ देशों में थे, साम्राज्य जहां का हो, उनका विचार यह था कि जब तक लोगों के बीच हज़रत महदी के प्रकट होने की आस्था प्रचलित है उस समय तक हम उनके देशों को अपने क़ब्ज़े में नहीं कर पाएंगे। इससे अंदाज़ा करें कि हज़रत महदी के प्रकट होने का विषय कितना अहम है।
यह हज़रत इमाम महदी अलैहिस्सलाम के बारे में साम्राज्यवादियों की धूर्ततापूर्ण कोशिश की एक छोटा सा नमूना है। आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई हर व्यक्ति को यह शुभसूचना देते हैं कि दुनिया प्रकामशय क्षितिज की ओर बढ़ रही है। वह बल देते हैं, “दुनिया के साम्राज्यवादी जो चाहे कहें, जितना शक्ति का प्रदर्शन करें लेकिन सत्य के लश्कर और मानवता को न्याय की ओर ले जाने वाले कारवां के सदस्य दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। वर्षो का गुज़रना भी इस उम्मीद की किरन को लोगों के मन से नहीं निकाल सकता और भविष्य में, उम्मीद है बहुत लंबा नहीं खिंचेगा, मानव समाज का हर सदस्य न्याय का मज़ा चखेगा।”