ईरानी बाज़ार- 45
अनार बाग़बानी से हासिल होने वाला उत्पाद है और यह लगभग 4 हज़ार साल पुराना उत्पाद है।
वनस्पति विज्ञान के बहुत से वैज्ञानिकों का मानना है कि अनार का पेड़ सबसे पहले ईरान में उगा और उसके बाद यहां से भारत, उसके बाद उत्तरी अफ़्रीक़ी देशों, चीन, योरोप और अमरीका गया। इस दावे की पुष्टि ईरान के कैस्पियन सी के तटवर्ती क्षेत्रों, लुरिस्तान, कुर्दिस्तान, चहार महाल व बख़्तियारी, फ़ार्स, बलोचिस्तान प्रांतों के घास के मैदानों, अलबुर्ज़ पर्वत श्रंख्ला के दक्षिणी दामन, और गीलान प्रांत के लूशान और मिन्जील के पूरब और पश्चिम में स्थित घाटियों में व्यापक क्षेत्र में जंगली अनार के उगने वाले पेड़ों से होती है।
अंतिम आसमानी ग्रंथ क़ुरआन में तीन बार इस फल का उल्लेख किया गया है। पवित्र क़ुरआन के अनआम सूरे की आयत नंबर 99 में ईश्वर ने अनार सहित फलों और विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों के उगने और वर्षा को ईश्वर की महानता की निशानी बताया गया है। इसी तरह रहमान नामक सूरे की आयत नंबर 68 में आया है कि अनार स्वर्ग के फलों में है जिन तक ईश्वर पर आस्था रखने वाले बंदों की पहुंच होगी। जैसा कि अनआम सूरे की आयत नंबर 141 में ईश्वर ने अनार के उपभोग की अनुशंसा की है।
अनार का पेड़ शुष्क हवा वाली तेज़ गर्मी और 10 सेन्टी ग्रेड की ठंडक सहन कर सकता है, इसलिए दुनिया के ज़्यादातर क्षेत्रों में इसकी बाग़बानी हो सकती है। इसका पेड़ 2 से 5 मीटर ऊंचा होता है। अनार के पत्ते पूरी तरह हरे व चमकते हुए होते हैं। इसका फूल बिना महक के लाल रंग का होता है। अनार के फूल दो प्रकार के होते हैं एक छोटे डंठल वाला और बिना डंठल का। अनार के फूल गुलाबी, नारंगी और लाल रंग के होते हैं। ये फूल अकेले या 2 से 15 अदद तक एक दूसरे से जुड़े हुए गुच्छे के रूप में होते हैं। अनार के फूल घंटी के आकार और बेलनाकार होते हैं। आम तौर पर अनार के पेड़ के जो फूल उर्वरक होते हैं वह बेलनाकार होते हैं। इनकी संख्या अनुर्वरक फूलों से कम होती है। अनार प्रकृति में पैक खाद्य पदार्थ का चमत्कार लगता है। माणिक की तरह लाल रंग से लेकर मोती की तरह सफ़ेद रंग के दाने रस से भरे एक दूसरे के पास चुने हुए सीलबंद पैकेट की तरह होते हैं।
अनार मज़े की नज़र से तीन तरह के होते हैं। मीठा, खट्टा और खट्टा मीठा। अनार रंग और आकार की नज़र से भी नाना प्रकार के होते हैं लेकिन उसकी मुख्य विशेषता लगभग सबमें एक जैसी होती है। दसवीं व ग्यारहवीं ईसवी के विश्व विख्यात ईरानी चिकित्सक व विद्वान बू अली सीना का मानना था कि मीठा, खट्टा मीठा और खट्ठा क्रमशः एक दूसरे पर वरीयता रखते हैं। इसी तरह उनका यह भी मानना था कि अनार के हर भाग में चिकित्सा गुण मौजूद हैं। अब तक अनार और उसमें मौजूद तत्वों के बारे में बहुत से शोध हो चुके हैं जिससे पता चलता है कि यह फल बहुत सी बीमारियों की पूर्व रोकथाम और बहुत सी बीमारियों के इलाज में फ़ायदेमंद है। इसके अलावा अनार के छिलके, जड़, फूल और दाने चिकित्सा गुणों से संपन्न होने के नाते औषधि उद्योग में इस्तेमाल होते हैं।
पारंपरिक चिकित्सा पद्धति से एलाज करने वाले वैद्यों का मानना है कि अनार अमृत है। अनार में विटामिन बी-वन, बी-2, बी-नाइन और विटामिन सी, लौह, मैग्नीज़ियम, पोटैशियम, फ़ास्फ़ोरस और सोडियम जैसे खनिज पदार्थ पाए जाते हैं। अनार ख़ून को साफ़ करता है, जिगर को मज़बूत करता और डाइबिटीज़ से ग्रस्त होने से बचाता है। अनार एज़्मा या अस्थमा जैसी सांस की बीमारी, सीने में दर्द और तेज़ खांसी में बहुत लाभदायक है। दिल के रोगियों के लिए अनार के उपभोग पर बहुत बल दिया गया है। आथ्रोस्कलोरोसिस और स्ट्रोक की रोकथाम के लिए भी बहुत प्रभावी है। अनार बहुत ख़ून बनाता है। दस्त, पैरसाइट और मुंह से जुड़ी समस्याओं में लाभदायक है। ईरान की प्राचीन चिकित्सा शैली में अनार को पित्त पैदा करने वाली दवा और यकृत को मज़बूत बनाने वाला फल कहा गया है। इसी तरह अनार कोलेस्ट्राल और यूरिया को कम करता है। ख़ून को नियंत्रित करने, प्रोस्टेट के कैंसर, अल्ज़हाइमर, बुढ़ापे और मोटापे को रोकने में प्रभावी है। अनार के बीज में चूंकि फ़ाइबर होता है, पाचन क्रिया के लिए लाभदायक होता है। अनार चूंकि बदन में अपशिष्ट पदार्थ को कम समय तक रोकता है इसलिए लोगों को कोलोन कैंसर से बचाने में प्रभावी होता है। अनार में ऐन्टीऑक्सिडेंट बहुत ज़्यादा होता है इसलिए बदन की माइक्रोब और वाइरस का मुक़ाबला करने में प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। अनार का उपभोग सूखा रोग और कमज़ोर स्नायु तंत्र के एलाज में भी बहुत प्रभावी है। इसी तरह अनार का उपभोग अवसाद की रोकथाम और चिंता को कम करने में प्रभावी होता है। अनार खाने से इंसान अपने मन को प्रफुल्लित महसूस करता है।
अनार का रंग आसानी से साफ़ नहीं होता। यही वजह है कि प्राचीन समय में अनार की शाखा, जड़, फूल और पत्ते को चमड़ा, उद्योग, धागे, ऊन और कपड़े की रंगाई में इस्तेमाल करते थे। आज अनार के छिलके को पारंपरिक रंग तय्यार करने में इस्तेमाल करते हैं। अनार का रस ग़ैर वानस्पतिक फ़ाइबर के लिए प्राकृतिक रंग के तौर पर इस्तेमाल होता है।
अनार का रस इससे हासिल होने वाला उत्पाद है। इसमें माइक्रोब और संक्रमण को ख़त्म करने की विशेषता होती है। पेस्ट, शर्बत, मुरब्बा, जेली, आइसक्रीम, नाना प्रकार की चटनी, पाउडर, अचार, सार, चारा, सिरका इत्यादि अनार से हासिल होने वाले अन्य उत्पाद हैं।
आज ईरान में लगभग 60 हज़ार हेक्टर के क्षेत्रफल पर अनार की बाग़बानी होती है जिससे लगभग 10 लाख टन अनार की पैदावार होती है। ईरान दुनिया में अनार का सबसे बड़ा उत्पादक व निर्यातक देश है। ईरान के फ़ार्स, ख़ुरासान, मर्कज़ी, इस्फ़हान और यज़्द प्रांतों में 700 से ज़्यादा प्रकार के अनार पैदा होते हैं। यह ज्ञान भी आपके लिए लाभदायक होगी कि ईरान के केन्द्रीय मरुस्थल के किनारे के क्षेत्र में पड़ने वाले सभी प्रांतों में प्राचीन समय से अनार की आर्थिक दृष्टि से बाग़बानी होती रही है। ईरान के सावेह, नयरीज़, फ़िरदौस और बजिस्तान ज़िलों में सबसे ज़्यादा अनार की पैदावार होती है। सावेह का अनार अपनी गुणवत्ता, मिठास, छिलके की नर्मी, ऑर्गेनिक होने तथा लंबे समय तक सही रहने की दृष्टि से पूरी दुनिया में मशहूर है। दुनिया के अन्य क्षेत्रों में पैदा होने वाले अनार की तुलना में सावे का अनार डेढ़ से 2 साल तक ख़राब नहीं होता जबकि दुनिया के दूसरे क्षेत्रों के अनार ज़्यादा से ज़्यादा 4 महीने तक ख़राब नहीं होते। सावेह में 70 प्रकार के अनार की पैदावार होती है। सावेह के अनार देश के भीतर मांग की आपूर्ति करने के साथ साथ दुनिया के सुदूर क्षेत्रों तक निर्यात भी होते हैं। दक्षिणी ख़ुरासान प्रांत के फ़िरदौस ज़िले के बाग़ों से सालाना 20 से 30 हज़ार टन अनार की पैदावार होती है जो देशी व विदेशी मंडियों में सप्लाई होते हैं। फ़िरदौस ज़िले में पैदा होने वाले अनार में अन्य क्षेत्रों के अनार की तुलना में 2 फ़ीसद शकर ज़्यादा होती है।
दुनिया में सबसे अल्पव्ययी अनार मध्य ईरान के इस्फ़हान प्रांत के काशान ज़िले में पैदा होता है। काशान के पांच किलो अनार में सिर्फ़ आधा किलो भाग उपभोग के लायक़ नहीं होता। इसी तरह ईरान में सबसे क़ीमती अनार यज़्द का होता है। यज़्द में उत्पादित अनार का बड़ा भाग निर्यात होता है। उत्तरी ईरान के माज़न्दरान प्रांत के गुलूगाह ज़िले में खेतों और बाग़ों के किनारे लगभग 300 हेक्टर से ज़्यादा क्षेत्रफल पर जंगली अनार की विभिन्न प्रजातियां ख़ुद से उगती हैं। इस क्षेत्र में इस तरह के अनार की हर हेक्टर पर सबसे ज़्यादा पैदावार होती है। पूर्वी आज़रबाइजान प्रांत के जुल्फ़ा ज़िले में अरस नदी के किनारे की भूमि पर विविधतापूर्ण जलवायु के कारण अनार की बाग़बानी होती है। जैसा कि आप जानते हैं कि अनार अर्ध उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पैदा होता है और जुल्फ़ा ज़िले की जलवायु अर्ध उष्णकटिबंधीय है इसलिए इस ज़िले में अनार की पैदावार होती है। जुल्फ़ा में अनार की पैदा होने वाली क़िस्मों के नाम सफ़ीद यज़्दी, फ़ारूक़ और क़रे क़ाबूग़ हैं। ये अनार अपने मज़े की वजह से बहुत पसंद किए जाते हैं। जुल्फ़ा में खट्टे मीठे उत्पादित अनार की पड़ोसी देश आर्मीनिया और आज़रबाइजान में बड़ी मांग है। ईरान जिन देशों को अनार निर्यात करता है उनके नाम निदरलैंड, जर्मनी, फ़्रांस, स्वीज़रलैंड, स्वीडन, रूस, तुर्कमनिस्तान, दक्षिण कोरिया, इराक़, क़तर, कुवैत और संयुक्त अरब इमारात हैं।