अल्लाह के ख़ास बन्दे- 10
पवित्र क़ुरआन ईश्वर की किताब है और ईश्वर ने क़ुरआन को मार्गदर्शन बताया है और पवित्र क़ुरआन की विशेषताओं में यह विशेषता सबसे महत्वपूर्ण है।
पवित्र क़ुरआन पैग़म्बरे इस्लाम की एक अन्य महत्वपूर्ण धरोहर है। पवित्र कुरआन आसमानी किताब है जिसे ईश्वर ने सत्य की ओर लोगों के मार्ग दर्शन के लिए अपने अंतिम दूत मुहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह पर उतारा है। पवित्र क़ुरआन पैग़म्बरे इस्लाम का अमर चमत्कार है। यह किताब 23 वर्षों के दौरान धीरे धीरे पैग़म्बरे इस्लाम पर वहि के रूप में उतरी। पैग़म्बरे इस्लाम लोगों के सामने पवित्र क़ुरआन की आयतों की तिलावत करते थे और इन आयतों के आकर्षण से लोग इस्लाम धर्म स्वीकार करते थे।
पैग़म्बरे इस्लाम के अनुसार पवित्र क़ुरआन के दो स्वरूप हैं एक विदित व दूसरा आंतरिक, इसीलिए यह किताब बहुत अधिक प्रभावी रही है। पवित्र क़ुरआन के संदेश ने अनेकेश्वरवादियों को ईमान, नैतिकता और भलाई का निमंत्रण देकर उनका निरस्त्रीकरण कर दिया जबकि पवित्र क़ुरआन की मंत्रमुग्ध करने देने वाली आयतों की तिलावत सुनकर हर केई दंग व आश्चर्यचकित रह जाता था। प्रसिद्ध शायर सुवैद बिन सामित पवित्र क़ुरआन के प्रभाव से बचने के अनेकेश्वरवादियों के फ़रार के रास्ते के बारे में कहते हैं कि मुहम्मद न तो जादूगर हैं और न ही शायर व ज्योतिषि हैं, ईश्वर की सौगंध, उनकी बातों में विशेष मिठास है, उनकी बातों की जड़ें विभूतियां भरी हैं जबकि उसकी डालियां फलों से लदी हुई हैं, इससे बढ़कर और कोई बात नहीं हो सकती।
पवित्र क़ुरआन का इतना अधिक प्रभाव था कि अबू सुफ़ियान और अबु जेहल तथा अन्य अनेकेश्वरवादी, रात के अंधेरे में छिपकर पैग़म्बरे इस्लाम के घर के आसपास जमा होकर पैग़म्बरे इस्लाम की तिलावत को सुना करते थे और पवित्र क़ुरआन की सुन्दरता, वाकपटुता और तिलावत की मिठास से आनंद उठाते थे किन्तु इसके साथ ही विशेष द्वेष के कारण पवित्र क़ुरआन की प्रकाशमयी बातों को स्वीकार किए बिना दूसरों को क़ुरआन की तिलावत सुनने से रोकते थे ताकि वह क़ुरआन से प्रभावित न हो सकें। पवित्र क़ुरआन अपनी सार्थक शिक्षाओं से मुसलमानों के विचारों को ऊंचा करने का महत्वपूर्ण कारण रहा है और उसने मनुष्य को चिंतन मनन का निमंत्रण दिया है। क़ुरआन की आयतों ने लोगों को अधिक से अधिक चिंतन मनन और सोच विचार के लिए संगठित किया है, धीरे धीरे लोगों को चिंतन मनन और शिक्षा की ओर प्रेरित किया और अज्ञानता और निश्चेतना की भतर्सना की। जाहिल व अज्ञानी लोगों को अंधा बहरा और गूंगा कहा और उन्हें जानवरों की श्रेणी में रखा है। पूरे क़ुरआन में ज्ञान, तत्वदर्शिता, परिज्ञान, सोच समझ, बुद्धि और युक्ति जैसे अनेक शब्द प्रयोग हुए हैं। पवित्र क़ुरआन ने समस्त मनुष्यों से कहा है कि वह ईश्वरीय विभूति अक़ल से भरपूर लाभ उठाएं और अंधे अनुसरण से परहेज़ करें। पवित्र क़ुरआन उन लोगों को जो ईश्वरीय आयतें पढ़ते हैं किन्तु गहराई से उसके बारे में नहीं चिंतन मनन करते, बुरा भला कहता है। सूरए मुहम्मद की 24वीं आयत में कहा गया है कि क्यों पवित्र क़ुरआन के गहरे और सूक्ष्म अर्थों में चिंतन मनन नहीं करते, क्या उनकी सोच और चिंतन मनन के दरवाज़ों पर ताला लगा हुआ है?
इस्लाम धर्म के उदय के आरंभिक काल में पवित्र क़ुरआन की शिक्षाओं के कारण लोगों में चिंतन मनन का स्तर बढ़ा है और इसके परिणाम में समाज ज्ञान और चिंतन मनन की ओर बढ़ा है। सभी को समझ में आ गया कि पवित्र क़ुरआन केवल एक पवित्र, नैतिक व अध्यात्मिक किताब नहीं है बल्कि एक श्रेष्ठ जीवन का कार्यक्रम है।
पूर्ण रूप से दुनिया का हर इंसान सौभाग्यपूर्ण और कल्याणकारी जीवन की प्राप्ति के प्रयास में रहता है और जीवन की ऊंचाईयों तक पहुंचने की जुगत में रहता है। निसंदेह कल्याण और परिपूर्णता तक पहुंचने के लिए एक कार्यक्रम की आवश्यकता होती है। ऐसा कार्यक्रम हो जो सैद्धांतिक और तार्किक हो जिसका समर्थन बुद्धि भी करती हो। सबसे सैद्धांतिक कार्यक्रम वह है जो गुणवत्ता और ढांचे की दृष्टि से बेहतरीन मापदंड और अमल की दृष्टि से जीवन का स्थाई कार्यक्रम हो।
एक ईश्वरीय किताब के रूप में पवित्र क़ुरआन मनुष्यों और दुनिया को इस्लाम की एकेश्वरवादी विचारधारा का आधार मानता है और उसने मानवीय समाज के लिए सर्वोच्च लक्ष्य को रेखांकित किया ताकि वह सौभाग्य और कल्याण प्राप्त कर सके। वास्तव में ज़िंदगी के बेहतरीन कार्यक्रम के रूप में पवित्र क़ुरआन ने समस्त क्षेत्रों में मनुष्यों के लिए सबसे तर्क संगत और सबसे सैद्धांतिक कार्यक्रम पेश किए हैं और खुलकर यह घोषणा की है कि निसंदेह यह क़ुरआन उस रास्ते का मार्गदर्शन करता है जो बिल्कुल सीधा है और उन ईमान वालों को शुभ सूचना देता है जो भलाई करते हैं कि उनके लिए बहुत बड़ा पारितोषिक है। सूरए नह्ल की आयत संख्या 89 में आया है कि यह किताब अनुसरण करने वालों के लिए मार्गदर्शन, विभूति और शुभ सूचना है।
दुनिया में मौजूद कार्यक्रम और क़ानून लोगों के सीमित ज्ञान व उनकी भीतरी कमियों के कारण अधूरे हैं जो मनुष्य के जीवन के हर पहलू को शामिल नहीं कर पाते और यही कारण है कि इन क़ानूनों और कार्यक्रमों को हमेशा बदलने और अपनी मरज़ी के अनुसार बनाने का प्रयास किया जाता है। यही कारण है कि मानवीय समाज की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक व्यापक और समग्र क़ानून बनाए जाने की आवश्यकता है, चूंकि ईश्वरीय क़ानून और आदेश अथाह ज्ञान रखने वाले ईश्वर की ओर से होता है और इन पर तत्वदर्शी और ज्ञानी ईश्वर नज़र रखता है, इसीलिए यह मानवीय समाज के लिए सबसे व्यापक और समग्र कार्यक्रम समझा जाता हैं। महान ईश्वर यह बताने के लिए कि उसने मानव समाज के लिए सबसे व्यापक और समग्र कार्यक्रम बनाए हैं, उसने दुनिया के समस्त बुद्धिमानों और विद्वानों को चैलेंज कर दिया कि यदि तुम में हिम्मत हो तो एक सूरे का जवाब पेश करो, किन्तु कोई भी इस दावे का जवाब नहीं ला सका। पवित्र क़ुरआन के सूरए बक़रा की आयत संख्या 23 में ईश्वर कहता है कि यदि तुम्हें इस बात के बारे में कोई शक है जिसे हमने अपने बंदे पर उतारा है तो इसका जैसा एक ही सूरा ले आओ और अल्लाह के अतिरिक्त जितने तुम्हारे सहायक हैं सब को बुला लो यदि तुम अपने दावे और कल्पनाओं में सच्चे हो।
पवित्र क़ुरआन को उतरे हुए 14 शताब्दियां पूरी हो चुकी और पंद्रहवी शताब्दी चल रही है फिर भी कोई विचारक, दार्शनिक, साहित्यकार, धर्मशास्त्री और विद्वान पवित्र क़ुरआन के एक भी सूरे का जवाब पेश नहीं कर सका और उसके हाथ कोई तुरुप का पत्ता लग गया हो। यह विषय, पवित्र क़ुरआन के असली होने को भी सिद्ध करता है और यह भी सिद्ध करता है कि पवित्र क़ुरआन इंसानी विचार और ज्ञान का परिणाम नहीं है। पैगम्बरे इस्लाम के कथानानुसार पवित्र क़ुरआन, ईश्वरीय वहि के अलावा कोई दूसरी चीज़ नहीं है।
इसी आधार पर पूरे विश्वास के साथ यह कहा जा सकता है कि क़ुरआन की महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि इसमें किसी भी प्रकार की कोई हेर फेर नहीं हुई है क्योंकि ईश्वर ने इसकी सुरक्षा की गैरेंटी ली है और कहा है कि हमने ही इस को उतारा है और निश्चित रूप से हम ही इसकी रक्षा करेंगे।
ईश्वर, क़ुरआन को मार्गदर्शन की किताब बताता है और पवित्र क़ुरआन ईश्वर की किताब है और ईश्वर ने क़ुरआन को मार्गदर्शन बताया है और पवित्र क़ुरआन की विशेषताओं में यह विशेषता सबसे महत्वपूर्ण है। पवित्र क़ुरआन पैग़म्बरे इस्लाम की एक अन्य महत्वपूर्ण धरोहर है। पवित्र कुरआन आसमानी किताब है जिसे ईश्वर ने सत्य की ओर लोगों के मार्ग दर्शन के लिए अपने अंतिम दूत मुहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह पर उतारा है। ईश्वर ने मनुष्यों के मार्गदर्शन के लिए बहुत से ईश्वरीय दूत भेंजे है जिसमें से कुछ अपनी सच्चाई के लिए चमत्कार पेश किए जबकि दूसरों चमत्कार के अलावा ईश्वरीय किताब भी पेश की। जिन ईश्वरीय दूतों के हवाले आसमानी किताबें की गयीं वह ईश्वरीय क़ानून को बयान करने वाले मार्गदर्शक थे, उनकी किताबें लोगों के मार्गदर्शन और ईश्वरीय नियमों और क़ानूनों को बयान करने वाली थीं किन्तु इसी के साथ यह ईश्वरीय किताबें चमत्कारिक आयाम से ख़ाली थीं सिर्फ़ क़ुरआन एक मात्र किताब थी जिसमें मार्गदर्शन के साथ साथ चमत्कार की भी विशेषताएं पायी जाती हैं। सूरए बक़रा के आरंभ में हम पढ़ते हैं कि निसंदेह यह किताब ईश्वरीय भय रखने वालों के लिए मार्गदर्शन है।
पवित्र क़ुरआन एक मात्र ऐसी आसमानी किताब है जिसमें बिना किसी सीमित्ता के दुनिया के समस्त इंसानों के लिए जीवनदायक शिक्षाएं और संदेश निहित हैं। शायद यह भी कहा जा सकता है कि क़ुरआन के अमर होने का रहस्य भी इसी बिन्दु में छिपा हो कि यह किताब किसी एक काल और समय से विशेष नहीं है। समय और काल की बेड़ियां इसके प्रभाव को कभी नहीं रोक सकतीं। सूरए अंबिया की पहली आयत में आया है कि यह किताब जिसे हमने आपकी ओर उतारा है ताकि आप लोगों को ईश्वर के आदेश से अंधकार से निकाल कर प्रकाश की ओर ले आएं।
ब्रिटेन के बुद्धिजीवी जान ड्यून पोर्ट "मुहम्मद और क़ुरआन के समक्ष ग़लती की माफ़ी" नामक पुस्तक में लिखते हैं कि पवित्र क़ुरआन ऐसी किताब है कि जन्म से लेकर मौत तक और पुनर्जीवन से लेकर परलोक की सफलता तक के बारे में बहुत ही रोचक बातें करता है और इसमें नागरिक, सैन्य, क़ानूनी, फ़ौजदारी, आत्मिक, नैतिक, साहित्यिक और शिक्षा व प्रशिक्षण के समस्त क़ानून शामिल हैं।
जर्मनी के प्रसिद्ध शायर गोयटे का कहना है कि पादरियों के वर्षों के प्रयास, हमको पवित्र क़ुरआन की सच्चाई, पवित्रता और उसके वैभव को मानने से बाज़ नहीं रख सके, हम जितना भी ज्ञान और तकनीक के मार्ग पर क़दम रखते हैं और आंख से द्वेष की एनक उतार दें तो हम में इस्लाम की सार्थक शिक्षाओं का वैभव जो क़ुरआन के रूप में है, अजीब हैरानी और आश्चर्य पैदा करती है और वह दिन दूर नहीं जब यह किताब दुनिया के सारे लोगों के ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लेगी और वर्तमान समय के समस्त ज्ञान व तकनीकों पर इसके प्रभाव साफ़ दिखाई देंगे और इसके परिणाम में पूरी दुनिया इसके इर्द गिर्द होगी।