अल्लाह के ख़ास बन्दे- 20
आपको याद होगा कि पिछले कुछ कार्यक्रम में हज़रत अली अलैहिस्सलाम के जीवन की कुछ अहम घटना की समीक्षा की जिससे पता चला कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम का ईश्वर और उसके पैग़म्बरे के निकट बहुत अहम स्थान है।
पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम जब दसवीं हिजरी में अपने जीवन के अंतिम हज के लिए निकले तो उन्होंने इस्लामी जगत को अपने इस फ़ैसले से अवगत कराया। मुसलमानों को जब पता चला कि यह पैग़म्बरे इस्लाम का आख़िरी हज है तो वे बड़ी संख्या में मक्का पहुंचने लगे ताकि एकेश्वरवाद की प्रतीक इस उपासना को पैग़म्बरे इस्लाम के साथ अंजाम दें और हज के संस्कार को उनसे सीखें। हज की समाप्ति पर पैग़म्बरे इस्लाम मदीना की ओर बढ़ रहे थे। वह 18 ज़िलहिज्जा का दिन था जब भीषण गर्मी में एक लाख बीस हज़ार हाजी अपने अपने शहर की ओर लौटते हुए ग़दीरे ख़ुम नामक स्थान पर पहुंचे। पैग़म्बरे इस्लाम को ईश्वरों ने वही के ज़रिये यह बता दिया था कि यह उनका आख़िरी हज है और उनकी मौत का वक़्त क़रीब आ चुका है। पैग़म्बर इस्लामी जगत के भविष्य के बारे में सोच में रहे थे कि उनके बाद इस्लामी जगत का क्या होगा। ख़ास कर इसलिए भी कि पैग़म्बरे इस्लाम को यह पता था कि वह अंतिम ईश्वरीय दूत हैं, क़ुरआन अंतिम आसमानी ग्रंथ है, इसलिए उनकी पैग़म्बरी की मूल्यवान उपलब्धियों की रक्षा और उसे बाक़ी रखने के लिए एक मज़बूत आधार की ज़रूरत है। पैग़म्बरे इस्लाम इसी सोच में गुम थे कि अचानक ईश्वरीय संदेश लाने वाले फ़रिश्ते जिब्रईल उनके पास पहुंचे और ईश्वरीय संदेश उन तक पहुंचाया जो पवित्र क़ुर्आन में बल्लिग़ नामक आयत के नाम से जाना जाता है। इस आयत में ईश्वर ने पैग़म्बरे इस्लाम से कहा, हे पैग़म्बर! जो आप तक ईश्वर की ओर से उतारा गया है उसे लोगों तक पहुंचाइये। अगर आपने ऐसा न किया तो मानो आपने ईश्वर की ओर से सौंपी गयी ज़िम्मेदारी को पूरा नहीं किया और ईश्वर आपको लोगों के ख़तरे से बचाएगा और ईश्वर नास्तिकों का मार्गदर्शन नहीं करता।
पैग़म्बरे इस्लाम ने यह संदेश मिलते ही मुसलमानों को इकट्ठा होने का आदेश दिया। सब बड़ी हैरत से एक दूसरे से पूछते थे कि क्या अहम बात हो गयी है? आख़िर पैग़म्बरे इस्लाम ने इस चिलचिलाती धूप में आगे निकल जाने वालों को ग़दीर में इकट्ठा होने का क्यों आदेश दिया है।
जब हाजी इकट्ठा हो गए तो पैग़म्बरे इस्लाम ऊंटो के कजावे के बने मिम्बर पर गए और आपने भाषण दिया। आपने अपने भाषण के शुरु में कहा, ईश्वर सारी प्रशंसा का पात्र है। उसी से हम मदद चाहते हैं, उस पर आस्था रखते हैं, उसी पर हम भरोसा रखते हैं और हम गवाही देते हैं कि उसके सिवा कोई पूज्य नहीं। हे लोगो! वह वक़्त क़रीब है जब मैं इस दुनिया से चला जाउंगा। ईश्वर के निकट मेरी ज़िम्मेदारी है और तुम पर भी ज़िम्मेदारी है। मेरे बारे में तुम्हारा क्या विचार है? लोगों ने एक आवाज़ में कहा, हम गवाही देते हैं कि आपने अपनी ज़िम्मेदारी को बेहतरीन ढंग से अंजाम दिया, ईश्वर आपको इसका अच्छा पारितोषिक दे। उस वक़्त पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमाया, क्या तुम इस बात की गवाही देते हो कि दुनिया का पालनहार एक है और मोहम्मद उसके पैग़म्बर और बदे हैं। परलोक में स्वर्ग, नरक और अमर जीवन सच्चाई है? सबने कहा, हम गवाही देते हैं। उसके बाद पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमाया, “मैं तुम्हारे बीच दो मूल्यवान चीज़ें छोड़ कर जा रहा हूं।” इस बीच एक व्यक्ति खड़ा हुआ और उसने पूछा कि ये दो मूल्यवान चीज़ें क्या हैं?
पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमाया, “एक ईश्वर की किताब और दूसरे मेरे पवित्र परिजन हैं। ईश्वर ने मुझे सूचित किया है कि ये दोनों चीज़ें एक दूसरे अलग न होंगी। तो हे लोगो क़ुरआन और मेरे परिजनों से न तो आगे निकलो और न ही पीछे रहो वरना तबाह हो जाओगे।”
इस संवेदनशील चरण में सबने देखा कि पैग़म्बर इस्लाम ने ईश्वरीय आदेशानुसार हज़रत अली अलैहिस्सलाम का हाथ पकड़ कर इतना ऊपर उठाया कि सब देख लें। उसके बाद पैग़म्बरे इस्लाम ने बहुत ही अहम भाषण दिया जिसमें आपने इस्लामी जगत के आस्था व व्यवहार से संबंधित अहम बिन्दुओं का उल्लेख किया। यह भाषण ग़दीर भाषण के नाम से मशहूर है। इस भाषण के अहम बिन्दुओं के उल्लेख से पहले आपको यह बता दें कि ग़दीर की हदीस अर्थात जो पैग़म्बरे इस्लाम ने ग़दीर में कहा है, उसका स्रोत सबसे भरोसेमंद स्रोतों में शामिल है। जैसा कि अलग़दीर किताब के लेखक अल्लाम अमीनी अपनी इस किताब में पैग़म्बरे इस्लाम के 110 साथियों, 82 ताबेईन अर्थात पैग़म्बरे इस्लाम के साथियों का अनुसरण करने वालों और इस्लामी जगत के 360 मशहूर धर्मगुरुओं व वर्णनकर्ताओं के नाम का उल्लेख किया है जिन्होंने ग़दीर की घटना का वर्णन किया है। इसके अलावा पहली हिजरी से नवीं हिजरी के बीच बहुत से मशहूर शायरों का भी अल्लामा अमीनी का उल्लेख किया है जिन्होंने ग़दीर की घटना का अपने दोहे में वर्णन किया है। इसलिए इस बात की कोई गुंजाइश नहीं रहती कि ग़दीर का भाषण पैग़म्बरे इस्लाम की ओर से इस्लामी जगत के लिए सबसे अहम व विश्वस्त दस्तावेज़ है।
पैग़म्बरे इस्लाम ने अपने भाषण के आरंभ में कहा, “हे लोगो! जान लो ईश्वर ने अली को तुम्हारा वली व मार्गदर्शक क़रार दिया और इस पद पर नियुक्त किया है। उनका आज्ञापालन मोहाजिर व अंसार, शहरी और मरुस्थलीय क्षेत्र के रहने वालों, अरब व ग़ैर अरब, आज़ाद और ग़ुलाम, छोटे और बड़े, श्वेत व अश्वेत और हर एकेश्वरवादी के लिए अनिवार्य है। उनके आदेश और उनकी बात मानना हर व्यक्ति पर अनिवार्य है।”
इस भाषण के अगले भाग पर चर्चा से पहले आपको बता दें कि इस भाग में जिसका अभी उल्लेख किया है उससे कुछ बिन्दु सामने आते हैं। एक यह कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम ईश्वर के आदेश से नियुक्त हुए हैं इस नियुक्ति में पैग़म्बरे इस्लाम का कोई अख़्तियार नहीं था। दूसरे यह कि वली और मार्गदर्शक शब्द ये बताते हैं कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम वली भी हैं और मार्गदर्शक भी और इस आधार पर उनका आज्ञापालन करना ईश्वर का आदेश है। तीसरे यह कि हज़रत अली अलैहिस्सलाम की इमामत किसी स्थान या समय, किसी एक जाति या राष्ट्र, या किसी वर्ण से विशेष नहीं है बल्कि वह पूरे इतिहास में सभी एकेश्वरवादियों के मार्गदर्शक व अगुवा हैं। इसी वजह से पैग़म्बरे इस्लाम ने ग़दीर के भाषण में एक स्थान पर फ़रमाया, “अली के बाद इमामत का पद उनकी औलाद में जो उनकी नस्ल से मेरी संतान हैं, प्रलय के दिन तक बाक़ी रहेगा। जिस दिन ईश्वर और उसका पैग़म्बर उनसे मुलाक़ात करेगा।”
इसके बाद पैग़म्बरे इस्लाम ने लोगों के विरोध के मार्ग को बंद करने के लिए फ़रमाया, “वह व्यक्ति ईश्वर की कृपा से दूर हो जाए, ईश्वर के क्रोध का पात्र बने जो मेरी बात को न माने और अली की इमामत पर सहमत न हो।” पैग़म्बरे इस्लाम ने इस बात को स्पष्ट करने के लिए कि अली की दोस्ती और दुश्मनी का सीधा संबंध ईश्वर से है, फ़रमाया, “जान लो कि जिब्रईल ने मुझे सूचना दी है कि अनन्य ईश्वर ने फ़रमाया है कि जो व्यक्ति अली से दुश्मनी करे, उनकी विलायत को न माने, वह मेरी धिक्कार व क्रोध का निशाना बनेगा।” न सिर्फ हज़रत अली की विलायत का विरोध करने व उनसे दुश्मनी पर रोक का आधार ईश्वरीय आदेश है बल्कि उनसे श्रद्धा के लिए भी ईश्वर ने आदेश दिया है। जैसा कि ग़दीर के भाषण में पैग़म्बरे इस्लाम ने फ़रमाया, ईश्वर ने मुझे संदेश दिया कि अली से श्रद्धा रखो और उन्हें अपना मार्गदर्शक समझो।
ईश्वर ने उन लोगों को जो उस पर आस्था रखते और अच्छे कर्म करते हैं, स्वर्ग में स्थान देने का वादा किया है और ईश्वर के इस वादे के तहत वे लोग बिना किसी हिसाब किताब के स्वर्ग में जाएंगे जो पैग़म्बरे इस्लाम के पवित्र परिजनों से श्रद्धा रखते हैं और उनके मन उनकी श्रद्धा से ओत प्रोत हैं। ये वे लोग हैं जिनसे श्रद्धा को ईश्वर ने पैग़म्बरे इस्लाम की पैग़म्बरी का बदला मांगा है। जेसा कि शूरा सूरे की आयत नंबर 23 में ईश्वर कह रहा है, “हे पैग़म्बर! आप लोगों से कह दीजिए कि तुम्हारे मार्गदर्शन का बदला सिर्फ़ और सिर्फ़ यह है कि मेरे पवित्र परिजनों से श्रद्धा रखो!” सबा सूरे की आयत नंबर 47 में ईश्वर कह रहा है हे पैग़म्बर उनसे कह दीजिए कि मैंने तुम लोगों से जो बदला मांगा है उसमें तुम्हारा ही हित छिपा है और मेरा पारितोषिक सिर्फ़ ईश्वर पर है। इसलिए पैग़म्बरे इस्लाम ने ग़दीर के भाषण में इस बात को स्पष्ट करते हुए साफ़ शब्दों में कहा कि जान लो मेरे पवित्र परिजनों से श्रद्धा रखने वाले निश्चिंत होकर स्वर्ग में जाएंगे और फ़रिश्ते उनके सम्मान में उनसे मिलने जाएंगे वे कहेंगे कि आप लोगों पर ईश्वर की कृपा हो कि आप लोग पाक हैं। तो बिना किसी हिसाब के स्वर्ग में दाख़िल हो जाएं। इसलिए पैग़म्बरे इस्लाम के मार्ग पर चलने के लिए ज़रूरी है कि उनके पवित्र परिजनों का दामन थामा जाए। एक और अहम बिन्दु यह है कि प्रेम व श्रद्धा अनुसरण करने में प्रभावी होती है। जैसा कि पवित्र क़ुरआन के आले इमरान सूरे की आयत नंबर 31 में ईश्वर पैग़म्बरे इस्लाम से कह रहा है, कह दीजिए कि अगर ईश्वर को दोस्त रखते हो तो मेरा अनुसरण करो क्योंकि मैं उसका आदेश पहुंचाने वाला हूं।