अनमोल बातें - 3
ईश्वर के निकट सबसे अधिक प्रिय बन्दे वे हैं जिनमें तीन गुण होते हैं।
सब से पहला गुण, यह है कि उनकी बोलचाल में सच होता है अर्थात वे सत्यवादी होते हैं क्योंकि झूठ से मानव समाज का संतुलन बिगड़ जाता है। हो सकता है कि एक छोटे से झूठ का बहुत असर न हो लेकिन जब किसी समाज में कोई गलत आदत प्रचलित हो जाती है और उसे बुरा नहीं कहा जाता तो वह धीरे धीरे व्यापक हो जाती है। यही वजह है कि समाज में पैदा होने वाली बहुत सी समस्याएं, झूठ का परिणाम होती हैं।
ईश्वर के निकट दूसरा सब से अच्छा गुण यह है कि उसका दास, नमाज़, पांबदी से पढ़े, अर्थात अच्छी तरह से और हमेशा पढ़े, नमाज़ पढ़ते समय उसे पता हो कि वह क्या कह रहा है , किस से बात कर रहा है और उसका मन कहीं और न भटके।
तीसरा गुण जिसे ईश्वर बहुत पसन्द करता है, अमानत की रक्षा करना है। अमानत से आशय कोई भौतिक चीज़ ही नहीं है अर्थात यही नहीं है कि कोई आप के पास कोई चीज़ रखवाए और आप उसकी रक्षा करें बल्कि यदि कोई आप से अपना कोई राज़ बताए या कोई आप को ज्ञान सिखाए या बात कहे तो उसकी रक्षा करना भी अमानत की रक्षा में शामिल है।
हज़रत अली अलैहिस्सलाम का एक कथन है जिसपर ध्यान दिये जाने की ज़रूरत है। कथन में कहा गया है कि इन्सान को ऐसी जगहों से दूर रहना चाहिए जहां उस पर आरोप लगाना संभव हो और अगर कोई किसी ऐसी जगह पर है और दूसरा कोई उसे वहां देख कर उसके बारे में गलत सोचे तो इसमें गलती उसकी है जो गलत जगह पर गया होता है। इस तरह से अगर कई उदाहरण स्वरूप शराब के अड्डे पर जाता है और शराब नहीं पीता मगर कोई उसे शराबी कहता है तो इसमें सबसे बड़ी गलती उसी की है जो एसी गलत जगह पर गया था।
इसके साथ ही एक ज़रूरी बात यह भी है कि आप अपने राज़ अपने पास सुरक्षित रखें तो वह सब से अधिक अच्छा है क्योंकि जब तक राज़ आप के पास रहता है उस पर आप का नियंत्रण रहता है लेकिन जब वह आप के मुंह से निकला तो फिर उस पर आप का नियंत्रण नहीं रहता इस लिए अगर आप अपना राज़, सुरक्षित रखना चाहते हैं तो उसे अपने पास ही रखें तो बेहतर है। (Q.A.)