Mar ०२, २०१९ १३:४४ Asia/Kolkata

इतिहास की किताबों में है कि एक व्यक्ति पैगम्बरे इस्लाम की सेवा में उपस्थित हुआ और कहने लगा कि सअद बिन मआज़ का निधन हो गया।

सअद उन लोगों में से थे जिनका खंदक  युद्ध में घायल होने के बाद एक महीने तक पैगम्बरे इस्लाम की मस्जिद में उपचार हुआ था लेकिन अन्ततः वह शहीद हो गये। सअद बहुत ही प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। जब वह बीमार थे तो उसी समय क़ुरैज़ा क़बीले के यहूदियों की समस्या खड़ी हुई थी जिसके लिए उन्हें फैसला करने वाला चुना गया था और जब उन्होंने फैसला सुनाया तो पैगम्बरे इस्लाम ने कहा कि यह वही फैसला है जो आकाशों में ईश्वर ने किया था।

 

सअद बिन मआज़ के निधन की खबर सुन कर पैगम्बरे इसलाम तत्काल अपनी जगह से खड़े हो गये और उनकी शव यात्रा में नंगे पैर शामिल हुए। इस दौरान वह उनका ताबूत कभी दाहिनी तरफ से संभालते में कभी बाईं तरफ से, अर्थात वह इस तरह से सअद बिन मआज़ से प्रेम प्रकट कर कर रहे थे। पैगम्बरे इस्लाम स्वंय क़ब्र में उतरे, उन्हें क़ब्र में रखा और उसे बंद किया जब वह क़ब्र बंद कर रहे थे तो बड़ी सर्तकता से यह काम कर रहे थे और कहीं भी खाली जगह बचने नहीं दे रहे थे। उसके बाद पैगम्बरे इस्लाम ने कहा कि मुझे मालूम है कि इनका शरीर कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा लेकिन ईश्वर को यह पसंद है कि उसका दास जब कोई काम करे तो उसे पूरी तरह और मज़बूती से करे। यह वास्तव में हम सब के लिए पाठ है। जो भी काम करें उसे मज़बूती और पूरी तरह से करें, पढ़ने में, पढ़ाने में, व्यापार में , हर काम को हमें अच्छी तरह करना चाहिए। विभिन्न क्षेत्रों में हमारी मुख्य समस्या यही है कि हम काम करते समय उसके सभी आयामों पर नज़र नहीं रखते और पूरी तरह से काम नहीं करते।

 

काम की बात पर यह भी बताते चलें कि धर्म में कहा गया कि यदि किसी भले काम का इरादा किया है तो उसे अंजाम दो। क्योंकि भले काम को करने में देरी से कभी कभी यह होता है कि कोई बाधा पैदा हो जाती है या फिर  इन्सान का मन बदल जाता है। इसी लिए कहा गया है कि नेक काम का इरादा हो तो फौरन कर डालो। वास्तव में जब इन्सान अच्छा काम का इरादा करता है तो शैतान सक्रिय हो जाता है और उसके मन में तरह तरह से ख्याल पैदा करता है, असमंजस पैदा करता है जिसकी वजह से वह काम हो नहीं पाता। उदाहरण स्वरूप यदि कोई किसी गरीब की मदद करना चाहता है तो अगर तत्काल उसने मदद नहीं की तो फिर बाद में उसके मन में तरह तरह के विचार पैदा होने लगते हैं कि यह गरीब है भी कि नहीं?दूसरे तो मदद करते होंगे, मैं उसकी मदद करूंगा जिसकी कोई मदद न करता हो, या इतनी कम मदद करने से क्या होगा, इन्सान मदद करे तो क़ायदे से करे वर्ना करे ही न। इस प्रकार के विचार यदि आप ध्यान दें तो यह आप को भले कामों से रोक देता है। इस लिए कहा जाता है कि नेक काम में देर नहीं करना चाहिए।  (Q.A.)