अनमोल बातें- 5
लोग दुनिया में धन दौलत के पीछे भागते हैं लेकिन क्या कभी कोई यह सोचता है कि जितना अधिक धन होगा, कल ईश्वर के सामने उतना ही अधिक हिसाब देना होगा?
धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि प्रलय के दिन धर्म पर आस्था रखने वाले दो लोग एक साथ खड़े होंगे, उन दो लोगों में से एक धनवान होगा और एक निर्धन। धनवान को स्वर्ग में जाने की अनुमति मिल जाएगी लेकिन निर्धन खड़ा रहेगा। वह निर्धन ईश्वर से सवाल करेगा कि हे ईश्वर! तूने मुझे क्यों रोक रखा है? न तूने मुझे कोई पद दिया था कि जो मैं न्याय अन्याय कर सकता, न धन दिया था जो यह पूछा जाए कि धन का सही उपयोग किया या नहीं? मेरे पास तो कुछ भी नहीं था, मेरा सामान्य सा जीवन था, बस जीने खाने भर का मिल जाता था , वही जो तूने मेरी क़िस्मत में लिखा था और तुझे अच्छी तरह से मालूम है कि वह कितना था और क्या था।
निर्धन की पुकार सुन कर ईश्वर कहेगाः यह सही कह रहा है, इसे जाने दिया जाए।
अब दूसरे का नंबर आता है, जो धनी है और स्वर्ग का अनुमति पत्र मिल चुका है लेकिन उसका इतना हिसाब लिया जाता है कि उस के सिर का पसीना पैर से बहता है और काफी समय के बाद अन्ततः उसे स्वर्ग में प्रवेश की अनुमति मिल जाती है।
स्वर्ग में उसका निर्धन मित्र कहता है कि तुम्हें इतनी देर क्यों हुई? तो धनवान उत्तर देता है कि मेरा हिसाब किताब काफी देर तक लिया गया। एक एक बात पूछी गयी, वह पैसे कहां से लाए, उस पैसे को कहां खर्च किया? उस पद पर कैसे पहुंचे? पद पर क्या क्या किया? पैसे कहां से लाए और कहां खर्च किये? इस तरह के अनेकों सवाल किये जा रहे थे यहां तक कि ईश्वर ने मुझ पर कृपा की और मेरे पापों को क्षमा कर दिया।
यदि देखा जाए तो संसार की यही हक़ीक़त है, मुश्किल से हाथ आने वाली दौलत, खुद एक समस्या बन जाएगी, जितना धन होगा हिसाब उतना कठिन होगा। हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने एक बार अपने अनुयाइयों को कुछ धन दिया और फिर दूसरे दिन उन सब को बुलाया और एक एक को बुलाते और गर्म लोहे पर खड़ा करके पूछते कि बताओ जो पैसे मैंने दिये थे उनका क्या किया? सारे लोग परेशान हुए और पूरी तरह से कोई भी नहीं बता पाया क्योंकि पैर जल रहे थे मगर उनके एक अनुयाई हज़रत सलमान ने गर्म लोहे पर खड़े होकर कहा कि एक दिरहम का खाना खाया और बाकी निर्धनों को दान कर दिया। उन्हें तत्काल छुटकारा मिल गया। हज़रत अली अलैहिस्सलाम ने कहा कि प्रलय के दिन भी एसा ही होगा।