ओलंपिक, रोज़गार और राजनीति
30वें ओलंपिक खेलों के समारोह का उद्घाटन विश्वभर के 80 हज़ार खेल प्रेमियों और दसियों राष्ट्राध्यक्षकों की उपस्थिति में शुक्रवार को लंदन के स्ट्राटफ़ोर्ड स्टेडियम में हुआ।
रंग बिरंगी रोशनियों, नृत्य और संगीत से लंदन ने 2012 ओलंपिक की मेज़बानी का आरंभ किया। ओलंपिक विश्व में खेलों का महाकुंभ है कि जो वर्ष 1896 से तीन बार के विराम के अतिरिक्त प्रत्येक चार वर्षों में एक बार आयोजित होता है। ब्रिटेन तीसरी बार ओलंपिक खेलों की मेज़बानी कर रहा है। वर्ष 2005 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर सिंगापुर गये ताकि दूसरे यूरोपीय देशों जैसे कि फ्रांस की दावेदारी के मुक़ाबले में 2012 के ओलपंकि खेलों के आयोजन की मेज़बानी प्राप्त कर सकें। उस समय से ही लंदन विश्वभर के सैंकड़ों खिलाड़ियों की मेज़बानी की तैयारी में जुटा रहा।
टोनी ब्लेयर और यूरोप के कुछ दूसरे राष्ट्राध्यक्ष ओलंपिक के मेज़बान देश का चयन करने वाली बैठक में जिस कारण उपस्थित हुए वह केवल विश्व के सबसे बड़े खेल मेले की मेज़बानी प्राप्त करने की प्रतिष्ठा का विषय नहीं था। ओलंपिक के आयोजन से होने वाली आय कोई ऐसा विषय नहीं है जिस की ब्रिटेन जैसा देश कि जो विश्व आर्थिक संकट और विशेषकर बजट की कमी से जूझ रहा है उपेक्षा करदे। ओलंपिक के आयोजन के अतिरिक्त हज़ारों पर्यटकों को आकर्षित करना रोज़गार सृजन करने वाले साधनों में से एक प्रमुख साधन माना जाता है। विशेषकर ऐसे समय में कि जब ब्रिटेन आर्थिक मंदी और बढ़ती बेरोज़गारी के संकट में फंसा हुआ है। वर्ष 1988 में सियोल में ओलंपिक खेलों के आयोजन से दक्षिणी कोरिया के नागरिकों को तीन लाख छत्तीस हज़ार रोज़गार के अवसर प्राप्त हुए थे। वर्ष 2000 सिडनी ओलंपिक से आस्ट्रेलिया में एक लाख रोज़गार के अवसर प्राप्त हुए। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2004 में यूनान में ओलंपिक के आयोजन से मुख्य रूप से तीन लाख रोज़गार के अवसर प्राप्त हुए।
ओलंपिक खेलों की मेज़बानी से होने वाली आय के आंकड़े भी काफ़ी दिलचस्प हैं। 1996 के अटलांटिक ओलंपिक एवं 2000 के सिडनी ओलंपिक से अमरीका और आस्ट्रेलिया को पांच अरब डालर से भी अधिक की आय हुई। वर्ष 2004 में एथेंस की अर्थव्यवस्था में ओलंपिक की भागीदारी 10 अरब डालर थी। अनुमान लगाया जा रहा है कि ओलंपिक के आयोजन से ब्रिटेन में लगभग 35 हज़ार रोज़गार के अवसर प्राप्त हुए हैं। यद्यपि 2012 के ओलंपिक के आयोजन से लंदन को होने वाली आय के बारे में मतभेद हैं। 2012 ओलंपिक की मेज़बानी की घोषणा को 7 वर्ष बीत चुके हैं। ओलंपिक खेलों के आयोजन पर होने वाले खर्च और उससे होने वाली आय के संबंध में वर्ष 2005 में ब्रितानियाईयों का अनुमान ब्रिटेन सहित विश्व की वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों के दृष्टिगत पूर्णतः भिन्न नहीं है। वर्ष 2005 में अनुमानित ख़र्च लगभग उसका एक चौथाई है कि जो ब्रिटेन को जारी वर्ष में करना पड़ रहा है। यहां तक कि चालू वर्ष में ओलंपिक के आयोजन के लिए लंदन सरकार द्वारा विशेष 9 अरब पौंड का बजट बढ़कर 11 पौंड तक पहुंच गया है। वास्तव में ओलंपिक खेलों की सुरक्षा पर खर्च होने वाली राशि ने ब्रिटेन द्वारा प्रस्तावित अनुमानों को गड़बड़ा दिया है।
लंदन को सदैव विश्व की सबसे सुरक्षित राजधानी का दर्जा प्राप्त रहा है। वर्ष 2002 में लंदन में प्रतिदिन 40 लाख क्लोज़ सर्किट कैमरे लोगों की गतिविधियों को रिकार्ड कर रहे थे। ओलंपिक खेलों के आयोजन के समय इस नगर में सुरक्षा का अत्यंत कड़ा प्रबंध किया गया है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने 27 जुलाई से 12 अगस्त तक चल रहे ओलंपिक खेलों की सुरक्षा व्यवस्था को शांति के दौरान देश का सबसे बड़ा सुरक्षा अभियान बताया है। ओलंपिक खेलों के आयोजन के समय लंदन की सुरक्षा व्यवस्था पर नज़र रखने हेतु 24 हज़ार सुरक्षा कर्मी तैनात किये जाने थे। परन्तु यह संख्या घटकर केवल दस हज़ार चार सौ रह गयी। ओलंपिक खेलों की सुरक्षा व्यवस्था के लिए लंदन सरकार ने 28 करोड़ 20 लाख पौंड का बजट निर्धारित किया था कि जो बढ़कर 55 करोड़ 30 लाख तक पहुंच गया। इस कारण ब्रिटेन के सकल घरेलू उत्पाद में ओलंपिक खेलों के प्रभाव के आंकड़ों के संबंध में सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
इन खेलों की सुरक्षा व्यवस्था के विषय ने कैमरून सरकार के लिए दूसरी समस्याएं भी उत्पन्न की हैं। ओलंपिक खेलों की सुरक्षा का दायित्व जीफोरएस कंपनी के ज़िम्मे है। इस कंपनी ने घोषणा की है कि वह प्रस्तावित 10,000 सुरक्षा कर्मियों को भर्ती करने और उन्हें प्रशिक्षण देने में सफल नहीं हो पायी तथा केवल 7 हज़ार सुरक्षा कर्मी उसके पास हैं। शेष तीन हज़ार कर्मियों की पुलिस एवं विदेश मंत्रालय से आपूर्ति की गयी है।
यद्यपि केवल आर्थिक दृष्टि से ओलंपिक का महत्व नहीं है बल्कि इतिहास साक्षी है कि अनेक बार इसका राजनीतिक उद्देश्यों के लिए भी प्रयोग किया गया है। ओलंपिक के घोषणापत्र में उल्लेख है कि ओलंपिक के खेलों में खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा है और यह देशों के बीच प्रतिस्पर्धा नहीं है। ओलंपिक घोषणापत्र के इसी वाक्य ने इन खेलों की प्रतिस्पर्धा को राजनीतिक रंग देने पर रोक लगा दी है। किन्तु खेलों का यह विश्व मेला सदैव राजनीति रंग में रंगा रहा है। उदाहरणस्वरूप दक्षिणी अफ्रीक़ा के रंगभेदी शासन को वर्ष 1964 से 1992 तक कुछ देशों द्वारा इस शासन की जातीवादी नीतियों के विरोध के कारण ओलंपिक खेलों में भाग नहीं लेने दिया गया। चीन के विरोध के कारण ताईवान को भी उसके ध्वज के साथ ओलंपिक में भाग लेने के लिए बाध्य होना पड़ा। 1980 के मास्को ओलंपिक का अमरीका सहित पश्चिमी देशों ने बहिष्कार किया। 1991 से 2002 तक अफ़ग़ानिस्तान पर तालेबान के शासन के दौरान अफ़ग़ानी खिलाड़ियों को भी ओलंपिक में भाग नहीं लेने दिया गया। यूरोपीय संघ का सदस्य होने के कारण ब्रिटेन ने इस संघ द्वारा बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको का बहिष्कार करने के कारण उन्हें ओलंपिक समारोह में भाग लेने के लिए वीज़ा जारी नहीं किया। लुकाशेंको को कि जिन्हें यूरोप में रूस का समर्थक माना जाता है राष्ट्रपति चुनावों के दौरान विपक्षी दलों के साथ कड़ा व्यवहार करने के आरोप में यूरोपीय संघ ने उन पर प्रतिबंध लगा दिया था। यूरोपीयों के इसी राजनीतिक दावपेंच पर रूस की सरकार ने आपत्ति जताई है। ओलंपिक के समारोह में भाग लेने के लिए लुकाशेंको को वीज़ा जारी न किये जाने के संबंध में रूसी अधिकारियों ने ब्रिटेन के अधिकारियों से प्रश्न किया है कि क्या ओलंपिक राजनीतिक से पृथक नहीं है? वास्तव में ब्रितानियाईयों ने यूरोपीय संघ के निर्णय और अपनी विदेश नीति को ओलंपिक की आंकक्षाओं पर वरीयता दी है।