Apr ०७, २०१९ १४:२७ Asia/Kolkata

इस कार्यक्रम में भी हम वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैयद अली ख़ामेनई के नैतिकता पर दिये गये भाषण का उल्लेख कर रहे हैं।

वास्तव में धन व दौलत खर्च करना भी जीवन में बहुत महत्वपूर्ण होता है लेकिन उसे खर्च करने का तरीका अधिक महत्व रखता है। पैगम्बरे इस्लाम के प्रसिद्ध साथी अबूज़र ने कहा है कि दुनिया को दो दिरहम में बांट दो। अर्थात तुम्हारे पास जो कुछ धन दौलत है उसे दो हिस्सों में बांट दो  एक दिरहम अर्थात एक हिस्सा  अपने और अपने बीवी बच्चों पर खर्च करो जो बेहद ज़रूरी है और दूसरा हिस्सा अपने परलोक के लिए खर्च करो जो अधिक ज़रूरी है। इस प्रकार से इन्सान के पास मौजूद धन दौलत का कोई तीसरा हिस्सा नहीं होना चाहिए। यदि खर्च करने की तीसरी कोई जगह है तो समझ लो कि वह गलत है और उससे नुकसान होगा।

इस कथन पर ध्यान दें और देखें कि कुछ धनी लोग बल्कि मध्य वर्ग के लोग भी कितना ज़्यादा फिज़ूल खर्ची करते हैं , पैसे खर्च करने के कैसे कैसे तरीके अपनाते हैं। यात्रा पर जाएंगे तो एक तरह से खर्च करेंगे, वापस आएंगे तो दूसरी तरह से, शादी विवाह में तो खर्च की सीमा ही नहीं है,शोक सभाओं और अंतिम संस्कारों में भी धन लुटाया जाता है। इस प्रकार के खर्च का किसी को कोई लाभ नहीं मिलता, न किसी निर्धन का भला होता है न ही कुछ और मिलता है, इस लिए इसे घाटे का सौदा कहा गया है। इसके विपरीत यदि आप अच्छे कर्म वाले हैं तो अच्छा कर्म जितना भी करें, वह सराहनीय है क्योंकि जीवन और मृत्यु और फिर जीवन एक ठोस वास्तविकता है, हम सब को इस पर ध्यान देना चाहिए कि यह जीवन कुछ दिनों का है उसके बाद मौत है और मरने के बाद एक नया जीवन है जहां धन दौलत काम नहीं आएगी बल्कि अच्छे कर्म काम आंएगें । वहां , इस दुनिया में किये गये हर काम का हिसाब किताब होगा , अभी सब कुछ लिखा जा रहा है कल सब दिखाया जाएगा, तुम जो भी अच्छा कर्म करते हो उसका इनाम मिलेगा वह भी उस जगह , जहां से वापसी नहीं है। इसी प्रकार जो भी बुराई करोगे उसका दंड मिलेगा, यदि प्रायश्चित नहीं किया, बुरे कर्म का दाग, साफ नहीं किया तो निश्चित रूप से उसका दंड मिलेगा , यह सब कुछ इन्सान को सोचना चाहिए और सोच कर समझना चाहिए। चार दिन के जीवन के लिए हमेशा रहने वाले जीवन को दांव पर नहीं लगाना चाहिए।(Q.A.)