श्रेष्ठतम संचार माध्यम
आज के संसार प्रतिदनि एक ऐसे समूह में परिवर्तित होता जा रहा है जिसमें संचार व सूचना प्रणाली की केंद्रीय भूमिका है।
कंप्यूटर के कीबोर्ड के कुछ बटन दबा कर अथवा माउस से कुछ क्लिक करके इंटरनैट के माध्यम से प्रतिदिन के समाचारों को देखा जा सकता है, सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं या संदेश भेजे जा सकते हैं। इसी कारण हमारे काल में मीडिया व सामूहिक संचार माध्यमों को अत्यधिक महत्व प्राप्त हो गया है। वर्तमान काल के समाजों की जटिलता और जनमत को दिशा प्रदान करने में संचार माध्यमों की केंद्रीय भूमिका इस बात का कारण बनी है कि इन्हें सांस्कृतिक, आर्थिक, राजनैतिक व सामरिक क्षेत्रों में पहले से अधिक प्रयोग किया जाए।
संचार माध्यमों से सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के काम लिए जा सकते हैं। अर्थात संचार माध्यमों से लाभ उठा कर जहां समाज में मज़बूत भावनाएं व गतिशीलता उत्पन्नन की जा सकती है, सार्वजनिक संस्कृति का आधार रखा जा सकता है तथा जनमत को शिक्षित किया जा सकता है, वहीं संचार माध्यमों द्वारा समाज में असुरक्षा की झूठा वातावरण उत्पन्न किया जा सकता है, लोगों को मुख्य एवं ज़मीनी तथ्यों से दूर किया जा सकता है, वास्तविकताओं को उलट कर प्रस्तुत किया जा सकता है तथा समाज को बुराई व अनैतिकता में ग्रस्त किया जा सकता है। इस समय अधिकांश इलैक्ट्रानिक व प्रिंट मीडिया तथा उनके सांस्कृतिक उत्पाद, ऐसे लोगों के हाथ में है जिन्होंने इस क्षेत्र में भारी निवेश किया है और वे अपने आपको इस बात का अधिकार देते हैं कि अपने भौतिक व अभौतिक लक्ष्यों के अनुसार, मीडिया को प्रयोग करें। वस्तुतः इस समय बहुत से संचार माध्यम व्यवहारिक रूप से वर्चस्ववादी व्यवस्था की सेवा में लगे हुए हैं।
क़ुरआने मजीद, ऐसा ईश्वरीय संचार माध्यम है जो ईश्वर का संदेश मनुष्य तक पहुंचाता है। इस आधार पर स्वयं क़ुरआन, धार्मिक व नैतिक संचार माध्यमों का सबसे उत्तम उदाहरण है। यह ईश्वरीय पुस्तक, ईश्वर के बंदों के बीच प्रेम व स्नेह, समरसता तथा उच्च लक्ष्यों के मार्ग पर सार्वजनिक रूप से चलने की भावना को सुदृढ़ बनाती है। क़ुरआने मजीद जैसा महान संचार माध्यम, संसार में, ईश्वर की आवाज़ है और ज्ञान, स्वतंत्रता, न्याय, प्रतिष्ठा और नैतिकता का नारा लगाता है। विचार व चिंतन, क़ुरआनी संदेशों का आधार है। यह आसमानी किताब, अपनी अनेक आयतों में संदेश पहुंचाने के बाद इस बात पर बल देती है कि जो कुछ कहा गया है उस पर विचार और चिंतन करे। मूल रूप से बात में बौद्धिक संदेश होना चाहिए और उसे अन्य लोगों की बुद्धि और विचार को सुदृढ़ बनाना चाहिए। दूसरे शब्दों में संचार माध्यम, मनुष्य के हृदय और मन के बीच संपर्क का साधन है। क़ुरआनी संचार माध्यम, लोगों के मन व हृदय की संपूर्ण क्षमता को, सृष्टि के ऊर्जा से ओत-प्रोत केंद्र से जोड़ देता है। वर्तमान संचार माध्यम, अपने संबोधकों की बुद्धि और विचारों पर ध्यान दिए बिना इस बात का प्रयास करते हैं कि उनकी भावनाओं को भड़का कर उन्हें कुछ बातें मानने पर बाध्य कर दें। स्वाभाविक है कि इस प्रकार की शैली का प्रभाव दीर्घकालिक नहीं होगा।
जो बात क़ुरआनी संचार माध्यम को अन्य संचार माध्यमों से भिन्न करती है, वह, वे सिद्धांत हैं जो क़ुरआन में पाए जाते हैं। क़ुरआने मजीद, इन सिद्धांतों द्वारा दिन प्रति दिन फैलता जा रहा है और अधिक से अधिक लोगों के मन-मस्तिष्क में घर करता जा रहा है। यद्यपि पश्चिम के व्यापक व असंख्य संचार माध्यम इस बात का प्रयास कर रहे हैं कि इस आसमानी संचार माध्यम के प्रभाव को कम कर दें और इसी लिए वे क़ुरआने मजीद के विरुद्ध अपमानजनक व्यवहार और झूठ प्रचारों में वृद्धि कर रहे हैं किंतु इसके बावजूद आंकड़ों से पता चलता है कि हृदयों को जीवित करने वाले क़ुरआन के संदेश, सत्य की खोज में रहने वाले अधिक से अधिक लोगों के हृदयों तक पहुंच रहे हैं। इस्लाम ग्रहण करने वालों की संख्या में वृद्धि की लहर इसी बात को सिद्ध करती है। पश्चिमी देशों में इस्लामोफ़ोबिया की कार्यवाहियों के बावजूद, पश्चिम में सबसे अधिक बिकने वाली किताबों में से एक क़ुरआने मजीद है, इस प्रकार से कि पिछले वर्षों में क़ुरआने मजीद को डेनमार्क में सबसे अधिक बिकने वाली पुस्तक के रूप में स्वीकार किया गया है।
क़ुरआने मजीद की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि उसकी विषय वस्तु और लक्ष्यों में सत्य व न्याय के ध्रुव दृष्टिगत रखा गया है। सूरए फ़ुस्सेलत की 42वीं आयत में हम पढ़ते हैं कि इस (क़ुरआन) तक असत्य न इसके आगे से आ सकता है और न पीछे से, (क्योंकि यह) अत्यन्त तत्वदर्शी एवं प्रशंसा के योग्य (ईश्वर) की ओर से भेजा गया है। क़ुरआने मजीद सत्य व वास्तविकता के आधार पर प्रचार, उपदेश, शुभ सूचना और डरावे प्रस्तुत करता है और कहानी, उपमा, उदाहरण तथा ख़बर इत्यादि जैसी संदेश पहुंचाने की सभी शैलियों का प्रयोग करता है। क़ुरआने मजीद की आयतें पूरी सुदृढ़ता, विश्वास और तर्क के साथ, लोगों तक ख़बर और ज्ञान पहुंचाने के मार्ग में क़दम आगे बढ़ाता है।
क़ुरआने मजीद इस दृष्टि से कि वह अत्यंत ठोस और सुदृढ़ है, प्रतिद्वंद्वी और पथभ्रष्ट करने वाले संचार माध्यमों की भ्रम में डालने वाली कार्यवाहियों और हो हल्ला मचाए जाने को चुनौती देता है और वह स्वयं अवास्तविक मनोवैज्ञानिक वातावरण बनाए जाने, वास्तविकताओं को उलट कर प्रस्तुत करने और घटनाओं में फेर बदल से बहुत दूर है। क़ुरआनी संचार माध्यम की विशेषता यह है कि वह सच्चे व ठोस कथन पर बल देता है और असत्य लक्ष्यों के लिए संचार माध्यमों को प्रयोग करने से रोकता है। जबकि आज हम देखते हैं कि अनेक अवसरों पर पश्चिमी संचार माध्यम, पश्चिमी राजनेताओं के अवैध व ग़लत हितों के परिप्रेक्ष्य में प्रचार करते हैं और सत्य को असत्य और असत्य को सत्य बना कर प्रस्तुत करते हैं। उदाहरण स्वरूप क़ुरआने मजीद सूरए आले इमरान की आयत क्रमांक 187 में आसमानी किताब वालों अर्थात यहूदियों और ईसाइयों की ओर से अपने तुच्छ व मूल्यहीन लक्ष्यों के लिए वास्तविकता को छिपाए जाने की निंदा करते हुए कहता है कि और (हे पैग़म्बर! याद कीजिए उस समय को) जब ईश्वर ने, जिन्हें (आसमानी) किताब दी गई थी, उनसे यह वचन लिया कि लोगों के लिए (किताब की आयतों को) स्पष्ट करो और उसे न छिपाओ तो उन्होंने उस वचन को पीठ पीछे डाल दिया और उसे सस्ते दामों बेच दिया तो उन्होंने कितनी बुरी वस्तु ख़रीदी।
तथ्यों को स्पष्ट करने वाले संचार माध्यम के रूप में क़ुरआने मजीद का लक्ष्य संसार में ईश्वर की व्यापक दया के जलवों को लोगों के समक्ष प्रस्तुत करने और उन्हें ईश्वरीय दया की प्राप्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने के अतिरिक्त के कुछ नहीं है। इसी परिप्रेक्ष्य में क़ुरआने मजीद के संदेश उपकार, सद्कर्म, भलाई, प्रेम और न्यायप्रेम जैसी उच्च मान्यताओं के आधार पर प्रस्तुत किए जाते हैं और लोगों के मन-मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं। सूरए आराफ़ की आयत संख्या 203 में हम पढ़ते हैं। और (हे पैग़म्बर!) कह दीजिए कि मैं केवल उसी का अनुसरण करता हूं जो मेरे पालनहार की ओर से मेरे पास विशेष संदेश वहि के रूप में आता है। यह (क़ुरआन) तुम्हारे पालनहार की ओर से तुम्हारी आंखें खोलने वाले तर्क रखता है तथा ईमान वालों के लिए मार्गदर्शन एवं कृपा है।
विश्व के सबसे अधिक प्रभावी संचार माध्यम के विषय वस्तु का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत, अत्याचारी शासकों का विरोध है। वस्तुतः क़ुरआने मजीद, वर्तमान समय के अधिकांश संचार माध्यमों की ठीक विपरीत दिशा में है जो अत्याचारी शासकों का गुणगान और उनकी नीतियों का समर्थन करते हैं। ये संचार माध्यम पूर्ण रूप से अत्याचारी शासकों की नीतियों के परिप्रेक्ष्य में झूठी बातें फैलाते हैं, उनके विरोधियों की बुराई करते हैं तथा जनमत को धोखा देते हैं। क़ुरआने मजीद पैग़म्बरों का मूल दायित्व, ईमान का प्रसार और अत्याचारी शासकों से मुक़ाबला बताता है और स्वयं भी इसी रणनीति का प्रचार करता है। सूरए नहल कि 36वीं आयत में वह कहता है। और निश्चय ही हमने हर समुदाय में एक पैग़म्बर को भेजा है (जो यह कहे) कि अनन्य ईश्वर की उपासना करो और अत्याचारी शासकों से दूर रहो।
क़ुरआनी संस्कृति में मनुष्य एक जातीय प्रतिष्ठा व सम्मान वाला अस्तित्व है अतः उचित नहीं है कि उसका हृदय छोटी बातों को बड़ा करके दर्शाए जाने और कुप्रचारों से विभिन्न प्रकार के रोगाणुओं से दूषित हो जाए। इस संबंध में क़ुरआने मजीद, मानवीय व शिष्टाचारिक मूल्यों व मान्यताओं की रक्षा का उत्तम व्यवहार व प्रचारिक साधन है। क़ुरआन की सत्यप्रेमी प्रतिज्ञाएं इस बात को आवश्यक बनाती हैं कि वह लोगों की साख, व्यक्तित्व और प्रतिष्ठा को आधार बनाए तथा सही, सच्ची एवं लाभदायक बातें उस तक पहुंचाए। जबकि पश्चिमी संचार माध्यम मौन धारण करके, भ्रांति उत्पन्न करके तथा वास्तविकताओं को बदल कर मनुष्यों की प्रतिष्ठा की अनदेखी करते हैं तथा अवास्तविक एवं हानिकारक सांस्कृतिक उत्पाद उस तक पहुंचाते हैं। यह ऐसी स्थिति में है कि वे सदैव लोगों के अधिकारों और उनकी स्वतंत्रता के नारे भी लगाते रहते हैं।
क़ुरआना का व्यापक संचार माध्यम, धर्म की रक्षा के मार्ग में, अन्य संचार माध्यमों द्वारा मचाए जाने वाले हंगामों और लगाए जाने वाले आरोपों के कारण मैदान से नहीं भागता बल्कि दृढ़ता व बुद्धिमत्ता के साथ और पेशेवराना शैली के माध्यम से अपनी सच्ची व मानवीय बातों को मनवा कर रहता है। क़ुरआने मजीद की अनेक आयतों से इस बात का पता चलता ईश्वरीय पैग़म्बर, विरोधियों के हो हल्ले और उनके आरोपों का डटकर मुक़ाबला करते थे और बिना भयभीत हुए सत्य के मार्ग पर चलते रहते थे। क़ुरआने मजीद ने बारंबार, पैग़म्बरों को देश निकाले, यातनाएं दिए जाने और यहां तक की हत्या करने के लिए दी जाने वाली विरोधियों की धमकियों का उल्लेख किया है जबकि वे कभी भी इन धमकियों से नहीं डरे और अपनी सैद्धांतिक नीतियों पर बल देते रहे।
आज यह वास्तविकता संचार माध्यमों से जुड़े हुए लोगों के लिए पूर्ण रूप से स्पष्ट है कि, भ्रष्ट संचार तंत्र और संचार माध्यमों पर बुरे लोगों के वर्चस्व ने, सूचना व संचार के क्षेत्र में कितनी बुराइयां उत्पन्न कर दी हैं और किस प्रकार कुछ पश्चिमी संचार माध्यम, विभिन्न राष्ट्रों पर, अपनी अपनी सरकारों के सामरिक व आर्थिक वर्चस्व का मार्ग प्रशस्त करते हैं। इन परिस्थितियों में क़ुरआने मजीद, ईश्वर की अंतिम किताब और पैग़म्बरे इस्लाम हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे व आलेही व सल्लम के अमर चमत्कार के रूप में मनुष्यों के वास्तविक कल्याण के मार्ग में, उन तक उत्तम व सही संदेश पहुंचाने की प्रभावी शैलियां लोगों के समक्ष प्रस्तुत करता है।