Apr २६, २०१६ ०९:१० Asia/Kolkata
  • बुरूजर्द

बुरूजर्द, लुरिस्तान प्रांत बड़े और आकर्षक जनपदों में से एक है जो प्रांत के पूर्वोत्तरी भाग में स्थित है।

 यह एक पर्वतीय क्षेत्र है जिसकी जलवायु बड़ी संतुलित है। समुद्र तल से इस क्षेत्र की ऊंचाई लगभग डेढ़ हज़ार मीटर है। जैसे जैसे दक्षिण की ओर बढ़िए ऊंचाई कम होती जाती है। इस जनपद क्षेत्र का केन्द्रीय नगर बुरूजर्द है जो इतिहास में अनेक उतार-चढ़ाव से गुज़रा है। बुरूजर्द के बसाए जाने के बारे में इतिहासकारों ने अलग अलग विचार व्यक्त किए हैं। कुछ इतिहासकारों का कहना है कि इस क्षेत्र की हरियाली और अच्छी जलवायु कारण बनी कि लोग इस क्षेत्र में आकर बस गए। कुछ इतिहसकारों का कहना है कि इस नगर को सासानी शासक फ़ीरोज़ ने बसाया। इस्लाम का उदय हुआ तो चौथी शताब्दी हिजरी में अबू इसहाक़ इब्राहीम बिन मोहम्मद इस्तख़री ने अपनी पुस्तक मसालिकुल ममालिक में बुरूजर्द तथा वहां की जलवायु और भौगोलिक स्थिति का उल्लेख किया है। इस पुस्तक में बताया गया है कि बुरुजर्द बड़ी रोचक जलवायु वाला बड़ा शहर है। एसा शहर कि जहां के फले सभी क्षेत्रों में भेजे जाते हैं और वहां खजूर तथा केसर की बड़ी अच्छी खेती है।

 

 

बुरूजर्द के लोगों की अर्थ व्यवस्था व्यापार, कृषि, पशुपालन, औद्योगिक एवं खनिक पदार्थों पर है। विशेष भौगोलिक स्थिति, तथा बहुत अधिक आवाजाही वाले मार्ग पर स्थित होने के और लुर बंजारों के पलायन के मार्ग में पड़ने के कारण बुरूजर्द नगर अतीत काल से ही महत्वपूर्ण व्यापारिक केन्द्रों में गिना जाता रहा है। इस शहर का बड़ा बाज़ार, व्यापारिक केन्द्र तथा सराएं बड़ी ख्याति रखती थीं। इस समय बुरूजर्द कृषि और पशुपालन का केन्द्र होने के साथ ही पश्चिमी ईरान का व्यापारिक केन्द्र भी माना जाता है और इस नगर में आज भी बड़ी चहल पहल है।

 

सीना ताने पहाड़, और बर्फ़ से ढंकी ऊंची चोटियां इस क्षेत्र में बहती नदियों के जलस्रोत हैं। नदियों और जलसोतों की अधिक संख्या के कारण यहां की ज़मीन बड़ी उपजाऊ और और बड़ी हरीभरी एवं आकर्षक है। हम अपनी इस चर्चा में इस क्षेत्र के कुछ प्राकृतिक आकर्षणों का उल्लेख करेंगे।

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उशतुरानकूह लुरिस्तान का एक संरक्षित क्षेत्र है। 55 हज़ार हेक्टेयर पर फैला यह क्षेत्र दुरूद, एलीगूदर्ज़ और अज़ना ज़िलों के बीच स्थित है। उशतुरानकूह अनगिनत सुंदर प्रकृतिक आकर्षणों से ढंका हुआ है। इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के फूल और वनस्पतियां हैं जिनसे दसियों किलोमीटर का क्षेत्र हमेशा महकता रहता है। यह उन ठंडे क्षेत्रों में है जहां बख़तियारी क़बीले गर्मी का मौसम बिताते हैं। लुरिस्तान का सबसे ऊंच पर्वत उशतुरानकूह है जिसकी ऊंचाई 4050 मीटर है। यहां पर्वतारोहियों की भीड़ रहती है। इस क्षेत्र की ख्याति का सबसे बड़ा कारण है यहां की सुंदर प्राकृतिक गोहर झील जो उशतुरानकूह के आंचल में अंगूठी के रत्न की भांति जगमगाती है और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। गुहर झील छोटी और बड़ी दो झीलों से मिलकर बनी है बड़ी गुहर झील ईरान की अति सुंदर पर्वतीय झील है जो समुद्र तल से 2400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस झील की गहराई लगभग 30 मीटर, इसकी लंबाई 2500 मीटर और चौड़ाई 600 मीटर है। झील के किनारों पर सुदंर वनस्पतियों और बेद के पेड़ों से प्राकृतिक पार्क का दृष्य उत्पन्न हो गया है। झील की असाधारण सुंदरता के कारण हर साल पूरे ईरान से बड़ी संख्या में पर्यटक यहां जमा होते हैं। छोटी गुहर झील, बड़ी झील से 1700 मीटर की दूरी पर स्थित है जिसका क्षेत्रफल लगभग 7 हेक्टेयर है। इसकी अधिकतम गहराई 4 मीटर है। यहां ट्राट मछली का बहुत बड़े पैमाने पर पालन किया जाता है उशतुरानकूह में प्रकृतिक आकर्षणों के साथ ही विभिन्न प्रकार के पशु पक्षी भी जाए जाते हैं जिनमें तीतर, कौवा, गौरैया, शिकरा, चील, बगला, बत्तख़, कई प्रकार के सांप भी पाए जाते हैं।

 

 

लुरिस्तान प्रांत में कई चरागाहें और शिकारगाहें भी हैं। इन शिकारगाहों में विशेष अवसरों पर शिकार की अनुमति दी जाती है। इनमें दश्ते मीशान का नाम लिया जा सकता है जो कूहदश्त ज़िले के दक्षिण पूर्वी भाग में स्थित है। यह क्षेत्र वनस्पतियों से ढंका हुआ है और पहाड़ तथा पहाड़ी जलसोतों के निकट स्थित होने के कारण यहां हिरण और पहड़ी बकरी और भेड़ की अनेक प्रजातियां पायी जाती हैं।

गरीन पर्वत श्रंखला भी जो गगनचंबी चोटियों से सुसज्जित है, अनेक पशुओं का जीवनस्थल है इनमें पहाड़ी बकरी और तेंदुए का नाम विशेष रूप से लिया जा सकता है। इसके कुछ भागों में पहाड़ी भेंड़ और गाय भी पायी जाती है। यहां चेरी, अंजीर, अख़रोट, चेनार, खट्टी चेरी, बलूत, नाशपाती के वृक्ष पाए जाते हैं।

 

 

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लुरिस्तान की भौगोलिक एवं प्राकृतिक विशेषताएं तथा विभिन्न मौसमों में उचित मात्रा में वर्षा के कारण यहां बहुत से तालाब भी हैं जिनका पर्यावरण की दृष्टि से बड़ा महत्व है। इनमें विभिन्न प्रकार की मछलियां पाली जाती हैं जबकि पलायनकर्ता पक्षियों की यहां बड़ी संख्या दिखाई देती है। वर्ष 1989 में लुरिस्तान के पर्यावरण विभाग ने इन तालाबों को संरक्षित क्षेत्र घोषित कर दिया और इनकी देखभाल पर्यावरण विभाग ने संभाल ली।

लुरिस्तान के अन्य आकर्षणों में प्रकृतिक झरने भी हैं। इनमें शिवी, और चकान झरनों का नाम लिया जा सकता है। शिवी झरना सालेन पर्वत के आंचल में है जिसकी समुद्र तल से ऊंचाई 2649 मीटर है। शिवी झरना बहुत सुंदर है यह एक गुफा से बाहर निकलकर नीचे गिरता है। बसंत ऋतु में पूरे ईरान से लोग छुट्टियां मनाने के लिए यहां एकत्रित होते हैं।

 

 

चकान झरना चकान दर्रे पर जाकर समाप्त होने वाले पर्वतांचल में स्थित है। इसका विचित्र वैभव ईश्वरीय विभूतियों का दृष्य पेश करता है। यह झरना हर साल मार्च महीने के अंतिम सप्ताह में तेज़ आवाज़ के साथ गिरने लगता है। चकान की कृषि भूमियों से लगी एक गुफा के भीतर से निकलने वाले इस झरने की आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक सुनाई देती है। झरने से कई मीटर ऊंचे फ़ौवारे निकलते हैं और चारों ओर दूर तक बड़ा सुहाना वातावरण छा जाता है।

जाड़े के मौसम में जब लुर बंजारे, गर्म क्षेत्रों की ओर रवाना हो जाते हैं तब इस झरने का पानी आगे बहता हुआ चकान के हरे भरे क्षेत्रों को तृप्त करता है।

 

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बुरूजर्द की एक रोचक एतिहासिक इमारत इस शहर की जामा मस्जिद है जो शहर के पूर्वी भाग में स्थित है। इस मस्जिद का निरमाण तीसरी शताब्दी हिजरी में हुआ। मस्जिद के मेहराब के ऊपरी भाग में कूफ़ी लिपि में ईश्वर का नाम लिखा है। मस्जिद के मुख्य द्वार के ऊपर एक शिलालेख है जिसमें सन 1022 हिजरी क़मरी में सफ़वी शासक शाह अब्बास सफ़वी का आदेश लिखा हुआ है। साक्ष्यों से पता चलता है कि सफवी तथा क़ाजारी काल में इस मस्जिद की मरम्मत और इसका विस्तार हुआ।

 

बुरूजर्द की इमाम मस्जिद भी इस शहर की एतिहासिक इमारतों में गिनी जाती है। यह मस्जिद अति प्राचीन मस्जिद के खंडहर पर बनाई गई है और इसका संबंध क़जारिया काल से है। मस्जिद के प्रांगड़ में बड़ा सा हौज़ है। इस मस्जिद में काजारिया काल की टाइलों और इन टाइलों पर विभिन्न सुंदर लिपियों में अंकित क़ुरआन की आयतों ने मस्जिद को विशेष आकर्षण प्रदान कर दिया है। इस मस्जिद में कुछ कोठरियां भी हैं जहां धार्मिक शिक्षार्थी रहते हैं।

 

बुरूजर्द तथा उसके आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में एतिहासिक आकर्षण पाए जाते हैं किंतु इस कार्यक्रम में उन सबको बयान कर पाना संभव नहीं है।