क़ज़्वीन प्रांत
इस प्रांत की गणना ईरान के ऐतिहासिक प्रांतों में होती है।
इस प्रांत में बहुत ज़्यादा पुरातन अवशेष मौजूद हैं। इस प्रांत के महत्व का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि ईरान के राष्ट्रीय पुरातन विभाग में पंजीकृत होने वाले अवशेषों में 11 प्रतिशत अवशेष केवल क़ज़वीन प्रांत के हैं। आपको यह भी बताते चलें कि क़ज़वीन प्रांत विगत में ज़न्जान प्रांत का भाग रहा है। किन्तु वर्ष 1996 में क़ज़वीन ज़िले को ज़न्जान प्रांत से अलग करके तेहरान प्रांत में शामिल कर दिया गया और अंततः 1997 में विशेष क्षेत्रीय विशेषताओं के कारण ईरान में अंतिम सीमांकन के आधार पर क़ज़वीन एक अलग प्रांत बन गया।
क़ज़वीन प्रांत का क्षेत्रफल लगभग 15800 वर्ग किलोमीटर है। यह प्रांत ईरान के पश्चिमोत्तर में स्थित है। माज़न्दरान, गीलान, हमेदान, ज़न्जान, मर्कज़ी और अलबुर्ज़ इसके पड़ोसी प्रांत हैं।
क़ज़वीन प्रांत का क्षेत्र पर्वतीय और मैदानी है। यह प्रांत अलबुर्ज़ पर्वत श्रंख्ला के हरे भरे आंचल में स्थित होने के कारण अनेक ऊंची चोटियों से संपन्न है जिसमें तीन चोटियां सबसे प्रसिद्ध, ऊंची और सबसे ज़्यादा पर्वतारोहियों को आकर्षित करती हैं। इन चोटियों का नाम ख़शचाल, शाह अलबुर्ज़ और सय्यालान है जिनकी ऊंचाई क्रमशः 4180, 4300 और 4350, मीटर है।
क़ज़वीन प्रांत के पूर्वी भाग से लेकर पश्चिम तक फैली हुयी पर्वत श्रंख्लाएं इस प्रांत के आधे भाग पर फैली हुयी हैं। क़ज़वीन प्रान्त का आधा क्षेत्र दो प्रकार की पर्वत श्रंख्लाओं से घिरा हुआ है। यह पर्वत श्रंख्लाएं पश्चिम से पूरब की ओर फैली हुयी हैं। इन दो पर्वत श्रंख्लाओं में बहुत सी घाटियां और मैदानी क्षेत्र हैं जिनमें क़ज़वीन प्रान्त के निवासी रहते हैं। इन पर्वत श्रंखलाओं में अनेक महत्वपूर्ण नदियों के उद्गम हैं जिनसे मैदानी क्षेत्र की जल आवश्यकता पूरी होती है। क़ज़वीन का मैदानी क्षेत्र ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और ईरान के मैदानी क्षेत्रों में कृषि उत्पादों और पशुओं में विविधता की दृष्टि से आर्थिक महत्व रखता है। बहुत से पुरातनविदों का मानना है कि कृषि का चलन क़ज़वीन के मैदानी क्षेत्र से शुरु हुआ और यह ईरान के पूर्वी और केन्द्रीय भाग तक फैली।

क़ज़वीन में मुख्य रूप से चारे में प्रयोग होने वाली वनस्पतियां पायी जाती हैं और इस प्रांत के उन पहाड़ों पर जंगल है जिनका छोर गीलान तथा माज़न्दरान प्रान्त से मिलता है। इस क्षेत्र के जंगलों में बांस, जंगली सेब, जंगली पिस्ते, बारबेरी और अख़रोट के पेड़ जाए जाते हैं। क़ज़वीन प्रान्त की चारागाहें इस प्रान्त के 55 प्रतिशत क्षेत्रफल पर फैली हुयी हैं जिसमें प्रान्त के उत्तरी और दक्षिणी पर्वतीय क्षेत्र भी शामिल हैं।
आपको यह भी बताते चलें कि क़ज़वीन प्रान्त का व्यापक क्षेत्रफल जंगली जानवारों का शरण स्थल है। इन जीव स्थलों में नाना प्रकार के स्तनारी, जलचर और पक्षी रहते हैं जिनमें मेंढा, बकरी, हिरन, भालू, तेन्दुआ, लकड़बग्घा, जंगली बिल्ली, लोमड़ी, सियार, गिलहरी, तीतर, कबूतर और अनेक प्रकार के बाज़ व हंस उल्लेखनीय हैं। क़ज़वीन के दो क्षेत्र संरक्षित हैं जिनमें शिकार करना वर्जित है, एक पश्चिमी ताकिस्तान का बशकूल और दूसरा पूर्वोत्तरी भाग रूदबार अलमूत है।
इतिहास के विभिन्न कालों में क़ज़वीन, उज्जवल व समृद्ध संस्कृति का स्वामी रहा है। इसी प्रकार यह क्षेत्र प्राचीन समय से ईरान के विशाल पठारी क्षेत्र में मानवजाति के महत्वपूर्ण निवास स्थलों में रहा है और मौजूद अवशेषों से क़ज़वीन के कई हज़ार वर्ष पुराने इतिहास की पुष्टि होती है। दस्तावेज़ों के अनुसार क़ज़वीन माद शासन श्रंख्ला के काल में आबाद हुआ था। ताकिस्तान, बोईन ज़हरा और अलमूत के कुछ गावों में बोली जाने वाली ताती भाषा, प्राचीन भाषाओं में से एक है।
क़ज़वीन सग्ज़ाबाद, बोईनज़हरा, ताकिस्तान और क़ज़वीन के आस-पास के टीलों पर की गयी पुरातात्विक खुदाई से पता चलता है कि इस क्षेत्र की सभ्यता लगभग 8000 वर्ष ईसापूर्व पुरानी है।
दस्तावेज़ों से पता चलता है कि इस क्षेत्र में रहने वाली जातियों का व्यवसाय कृषि उद्योग था।

इस्लाम के उदय के बाद क़ज़वीन में पहली हिजरी शताब्दी से तीसरी हिजरी शताब्दी के दौरान बहुत से राजनैतिक परिवर्तन हुए। पांचवी हिजरी शताब्दी के अंतिम वर्षों से वर्ष 645 हिजरी क़मरी में इस्माइलियों के क़िलों पर हलाकू ख़ान के हमले के समय तक यह क्षेत्र इस्माईल शासन श्रंख्ला के अधीन था।
ईलख़ानियों के काल में ज़न्जान के राजधानी बनने से क़ज़वीन की रौनक़ बढ़ गयी जो सफ़वी शासान काल में अपनी चरम पर पहुंची।
यद्यपि क्षेत्रफल की दृष्टि से क़ज़वीन बहुत विशाल प्रान्त नहीं है किन्तु इस क्षेत्र में अनेक जातियां अपनी विशेष रीति-रिवाजों के साथ जीवन यापन कर रही हैं। क़ज़वीन के उत्तरी मैदान में रहने वाले फ़ारसी भाषा में बात करते हैं। प्रान्त के दक्षिणी और पश्चिमोत्तरी भाग में तुर्की भाषा में बात करने वाले रहते हैं जबकि पश्चिमी भागों विशेष रूप से ताकिस्तान और उसके आस-पास के गावों के रहने वाले ताती बोली में बात करते हैं जबकि क़ज़वीन के पूर्वी क्षेत्र में कुर्द और लुरी भाषा व बोली प्रचलित है।
क़ज़वीन प्रान्त चूंकि राजधानी तेहरान को पश्चिमी ईरान के शहरों यहां तक योरोप से जोड़ने वाले स्ट्रेटिजिक मार्ग पर स्थित है, इसलिए इसका महत्व बहुत ज़्यादा है। इसके अतिरिक्त यह बहुत से ऐतिहासिक अवशेषों व इमारतों से समृद्ध है इसलिए इसकी गणना ईरान के सांस्कृतिक-ऐतिहासिक ध्रुवों में होती है। क़ज़वीन प्रान्त का केन्द्र क़ज़वीन शहर, तेहरान से 150 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। क़ज़वीन शहर के पूरब में अलमूत पर्वत श्रंख्ला के पहाड़, पश्चिम में ताकिस्तान, दक्षिण में क़ज़वीन के मैदानी इलाक़े और बोईन ज़हरा तथा पूरब में आबीक स्थित है।
कुछ इतिहासकार क़ज़वीन शहर की संरचना को सासानी शासक शापूर के समय की बताते हैं। इस शहर के चारों ओर बहुत पहले उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले दैलमियों के हमले से बचाने के लिए प्राचीर बनायी गयी थी। क़ज़वीन की भौगोलिक स्थिति उपजाउ मैदानी क्षेत्र, अनेक जातियों के रीति-रिवाजों व संस्कृतियों से संपर्क वे तत्व हैं जिन्होंने क़ज़वीन को जीवित व समृद्ध रखा है।
क़ज़वीन शहर अपने प्राचीन ऐतिहासिक व राजनैतिक महत्व के दृष्टिगत शासकों के लिए मूल्यवान स्थान रहा है और सफ़वी शासन काल में कुछ समय तक राजधानी भी था। इस शहर में अभी भी ऐतिहासिक संरचना मौजूद है। ऐतिहासिक मस्जिद, सरकारी इमारतें, शहर के दरवाज़े, क़ब्रिस्तान, प्राचीन टीले और खुदाई में मिलने वाली वस्तुएं इस शहर के प्राचीन इतिहास की गाथा सुनाती है।
कुछ दशक पहले तक क़ज़वीन उत्पादन और उद्योग का एक केन्द्र समझा जाता था और प्राचीन समय से यह क्षेत्र कृषि और पशु-पालन के लिए प्रसिद्ध रहा है। योरोपीय सैलानियों के यात्रा वृत्तांतों में क़ज़वीन अंगूर के विशाल बाग़ों के लिए भी जाना जाता है। योरोपीय सैलानियों के यात्रा वृत्तांतों में क़ज़वीन शहर के चारों ओर कई कई किलोमीटर के क्षेत्रफल पर फैले अंगूर के बाग़ों का उल्लेख मिलता है जो क्षेत्र के लोगों की ज़रूरत को पूरा करने के स्रोत के रूप में रहे है। क़ज़वीन ईरान के उन क्षेत्रों में है जहां निकट अतीत में नई कृषि योजनाओं को लागू किया गया।

यद्यपि क़ज़वीन का मैदानी भाग इसके कुल क्षेत्रफल का लगभग एक प्रतिशत भाग है किन्तु कृषि व पशुपालन के सूचकांक यह दर्शाते हैं कि ईरान में कृषि व पशु-पालन के उत्पादों का बड़ा भाग यहां उत्पादित होता है। क़ज़वीन के कृषि उत्पाद देश की भीतरी मंडियों की आपूर्ति के साथ साथ निर्यात भी किए जाते हैं।
क़ज़वीन शहर ईरान के अन्य औद्योगिक शहरों में विशेष स्थान रखता है। अनेक प्रकार की औद्योगिक इकाइयों ने क़ज़वीन ज़िले को औद्योगिक केन्द्र बना दिया है।
क़ज़वीन के दक्षिण-पूर्वी भाग में उद्योग केन्द्रित है जो अल्बुर्ज़ औद्योगिक सिटी के नाम से जाना जाता है। दो हज़ार मेगावाट शहीद रजाई बिजली घर, लोहे के पाउडर, हस्तकला उद्योग, छोटे व बड़े उद्योगों की सैकड़ों इकाइयां क़ज़वीन की औद्योगिक सिटी में मौजूद हैं।
आपको यह जान कर अच्छा लगेगा कि क़ज़वीन की औद्योगिक व कृषि क्षमता इस शहर में लोगों के पलायन करने का एक बड़ा कारण है। ईरान के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के क़ज़वीन पलायन के कारण एक सरसरी नज़र में यह शहर हर देखने वाले को बहुत विविधतापूर्ण लगता है।
आपको याद होगा कि कार्यक्रम के आरंभ में हमने इस बात का उल्लेख किया था कि क़ज़वीन में बहुत से मूल्यवान अवशेष व इमारतें हैं जिनमें जामे कबीर मस्जिद, अमीनी परिवार का इमामबाड़ा, हम्दुल्लाह मुस्तौफ़ी का मक़बरा, चेहलसुतून महल उल्लेखनीय हैं। क़ज़वीन के इतिहास और मौजूद अवशेष से पता चलता है कि यह शहर प्राचीन समय से ज्ञान-विज्ञान कला और कलाकारों का गढ़ रहा है।
छठी हिजरी के प्रसिद्ध धर्मगुरु क़ज़वीनी राज़ी, राफ़ेई क़ज़वीनी, प्रसिद्ध लिपिक मीर एमाद क़ज़वीनी, इतिहासकार व साहित्यकार हम्दुल्लाह मुस्तौफ़ी, ईरान में वृहद शब्दकोष संकलनकर्ता अली अकबर दहख़ुदा और इस्लामी क्रान्ति के बाद चुने गए राष्ट्रपति मोहम्मद अली रजाई, इन सबका संबंध क़ज़वीन से था।