सेमनान
सेमनान प्रांत 97,491 वर्ग किलो मीटर पर फैला हुआ है, यह ईरान के कुल क्षेत्रफल का 6 प्रतिशत है और क्षेत्रफल की दृष्टि से यह ईरान का छठा प्रांत है।
भौगोलिक दृष्टि से सेमनान प्रांत अलबोर्ज़ श्रंखला पर्वत के आंचल में स्थित है और उत्तर की ओर से उत्तरी ख़ुरासान, गुलिस्तान एवं माज़ेन्द्रान प्रांतो, दक्षिण में दक्षिणी ख़ुरासान एवं इस्फ़हान, पूर्व में ख़ुरासाने रज़वी और पश्चिम में तेहरान एवं क़ुम प्रांतों से घिरा हुआ है।
विविध भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सेमनान प्रांत की जलवायु विभिन्न प्रकार की है। पहाड़ी इलाक़ों में मौसम ठंडा, पहाड़ों के आंचल एवं ऊंचे इलाक़ों में संतुलित तथा रेगिस्तानी इलाक़ों में गर्म रहता है। इस प्रकार, इस प्रांत के विभिन्न शहरों का मौसम भी अलग अलग तरह का है। उदाहरण स्वरूप, इस प्रांत की राजधानी सेमनान शहर में गर्मियों में गर्म मौसम और सर्दियों में संतुलित रहता है जबकि इस प्रांत के कुछ दूसरे शहरों में परिस्थितियां भिन्न हैं। कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि जलवायु की दृष्टि से सेमनान प्रांत अर्ध रेगिस्तानी है और प्रांत की उत्तरी पट्टी की जलवायु, भूमध्य_सागर की जलवायु की तरह गर्म एवं सूखी है।
अलबोर्ज़ पर्वतीय श्रंखला के दक्षिणी आंचल में स्थित होने के कारण, धीरे धीरे उत्तर से दक्षिण की ओर सेमनान प्रांत की ऊंचाई कम होने लगती है और रेगिस्तान पर जाकर समाप्त हो जाती है। इस प्रांत के सबसे ऊंचे पर्वतों में से शाहरूद शहर के उत्तर में शाहवार पर्वत है जिसकी ऊंचाई 3940 मीटर है। सेमनान शहर के उत्तर में नू-ज़वा पहाड़ है जिसकी ऊंचाई 3782 मीटर है।
सेमनान की महत्वपूर्ण नदियां इस प्रकार हैं, सेमनान शहर में गुलरूद बार, शाहरूद शहर में ताश एवं काल शूर, दामग़ान शहर में चश्मे अली एवं रूदबार और गर्मसार में हब्ले रूद। इन नदियों में केवल हब्ले रूद में मेशा पानी रहता है, बाक़ी सब अस्थायी एवं मौसमी नदियां हैं जो साल में अधिकतर सूखी रहती हैं।

यह बात उल्लेखनीय है कि पानी के सीमित स्रोतों के बावजूद, सेमनान के अधिकांश इलाक़ों में मौसम उचित होने की वजह से इस प्रांत में कृषि और फलों के उत्पादन की काफ़ी संभावनाएं हैं। सेमनान के कृषि उत्पाद न केवल देश भर में जाते हैं बल्कि विदेशों को भी निर्यात किए जाते हैं। इस प्रांत के महत्वपूर्ण कृषि उत्पादों में से गेंहू, जौ, ख़रबूज़ा, आलू, सूरज मुखी, कपास, चुक़न्दर और तरबूज़ हैं। पिस्ता, अंगूर, खूबानी, अनार, सेब, चेरी, अख़रोट और इंजीर की भी सेमनान में पैदावार है।
चरागाहों की दृष्टि से सेमनान प्रांत उल्लेखनीय है। लगभग 55 लाख हेक्टेयर भूमि पर चरागाहें फैली हुई हैं। यही कारण है कि 25 लाख जानवरों के मद्देनज़र यह प्रांत पशुपालन की दृष्टि से ईरान का केन्द्र समझा जाता है। प्रांत में गर्मी के मौसम एवं सर्दी के मौसम के लिए अलग अलग चरागाहे हैं। गर्मियों के मौसम की चरागाहें सेमनान के उत्तरी भाग, शाहरूद, दामग़ान और गर्मसार में हैं और सर्दियों के मौसम की चरागाहें प्रांत के दक्षिणी भाग में बड़े क्षेत्रफल में फैली हुई हैं।
सेमनान प्रांत के ईरान के चार महत्वपूर्ण प्रांतों विशेष रूप से तेहरान से सटे होने, महत्वपूर्ण प्राकृतिक स्रोतों एवं कृषि सुविधाओं के कारण यहां के उद्योग का विशेष महत्व है। विविध प्रकार के खनिज पदार्थों एवं उनके उत्खनन की मात्रा की दृष्टि से भी इस प्रांत का विशेष स्थान है। सेमनान में ऐसी खानों की संख्या कि जो सक्रिय हैं लगभग 100 है। यह विभिन्न प्रकार की हैं, जैसे कि क्रोमाइट, सिलिका, डोलोमाइट, दुर्दम्य मिट्टी, औद्योगिक मिट्टी, सल्फ़र, फिरोज़ा, सीसा और मैग्नीज़। चूना मिट्टी और नमक की खानों के दृष्टिगत सेमनान का ईरान में प्रथम स्थान है।
यह बात भी उल्लेखनीय है कि वर्तमान सेमनान प्रांत के ईरान के एक भाग के रूप में एक सुनहरा इतिहास है। उसका प्राचीन इतिहास, इतिहास पूर्व कोमेस या क़ौमेस, ऐतिहासिक शासन का भाग था। यहां कोमेस के बारे में कुछ विवरण पेश करना उचित होगा। माद एवं हख़ामनेशी शासनकाल में कोमीशान उत्तरी ईरान में महान पार्त का भाग गिना जाता था। उस समय सेमनान शहर, पार्त एवं माद राज्यों की सीमा माना जाता था। इस्लामी काल में कोमीशान को क़ौमेस कहा गया। क़ौमेस राज्य अलबोर्ज़ पर्वत के दक्षिणी आंचल में स्थित था। अगर वर्तमान सेमनान प्रांत के क्षेत्रफल पर नज़र डालें तो दक्षिणी रेगिस्तानी इलाक़ों को उससे कम कर दें, बाक़ी क्षेत्रफल वही क्षेत्र है कि जिसे इस्लामी मुगोलशास्त्रियों ने क़ौमेस राज्य का नाम दिया है जिसका केन्द्र दामग़ान शहर था लेकिन वर्तमान समय में उसका केन्द्र सेमनान शहर है।
इस्लामी इतिहासकारों का कहना है कि प्राचीन काल में क़ौमेस व्यापारिक गतिविधियों का केन्द्र था। मोहम्मद बिन अहमद मुक़द्दसी ने अपनी किताब अहसनुत्तक़ासीम में क़ौमेस के बारे में लिखा है कि क़ौमेस के रहने वाले रेश्मी वस्त्रों, बारीक कपड़े एवं सफ़ैद सूती पगड़ियां बनाने में माहिर हैं। वे अधिकांश सफ़ैद कपड़ा बेचते हैं कि जो अन्य देशों को भी निर्यात किया जाता है और वह दूर दूर तक मशहूर है। इसी प्रकार उन्होंने उल्लेख किया है कि सफ़ैद पगड़ियां जो क़ौमेस में तैयार होती हैं सादा होने के साथ साथ उनकी किनारियां बनी होती हैं और सुन्दर एवं अच्छी होने के कारण मंहगी होती हैं। क़ौमेस में फल भी बहुत होते हैं और अनेक फलों को पड़ोसी राज्यों को निर्यात किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि क़ौमेस राज्य विभिन्न कारणों, जैसे कि भौगोलिक एवं सामरिक स्थिति और इसी प्रकार, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संभावनाओं के कारण अनेक धार्मिक एवं राजनीतिक आंदोलनों का केन्द्र रहा है। इन आंदोलनों में से प्रमुख रूप से ज़ौदियों, इस्माईलियों और सरबदारान का नाम लिया जा सकता है।
यह जानना उचित होगा कि क़ाजारी दौर के अंत तक क़ौमेस नाम, लोगों की ज़बानों पर था, लेकिन 1961 में क़ौमेस राज्य कि जिसमें सेमनान, दामग़ान, शाहरूद, बस्ताम, संगसर और शमीरज़ाद एवं उनके अधीन इलाक़े थे ईरान में नई प्रशासनिक व्यवस्था एवं उसके बंटवारे के बाद उसका नाम सेमनान प्रांत रखा गया और उसके केन्द्र के रूप में सेमनान शहर को चुना गया।

सेमनान प्रांत उत्तरी, दक्षिणी, पूर्वी एवं ईरान के पश्चिमी इलाक़ों के मार्गों के संगम के रूप में प्राचीन समय से ही महत्वपूर्ण रहा है। विश्व का महत्वपूर्ण प्राचीन मार्ग सिल्क रोड भी इसी प्रांत के बस्ताम, दामग़ान और सेमनान शहरों से होकर गुज़रता था। यह महत्वपूर्ण मार्ग ईरान के दक्षिणी एवं केन्द्रीय इलाक़ों को तब्रिस्तान, औरगंज, समरक़न्द, ख़्वारेज़्म, मर्व एवं ट्रांसऑक्सेनिया से जोड़ता था। इसके अलावा, इस इलाक़े में अन्य महत्वपूर्ण मार्ग भी थे कि जो आस पास के इलाक़ों को एक दूसरे से जोड़ते थे, उक्त मार्गों के कारण सेमनान प्रांत के शहर महत्वपूर्ण केन्द्रों में परिवर्तित हो गए। वर्तमान समय में व्यापारिक गतिविधियों में आसानी के मद्देनज़र और ईरान, तुर्की एवं चीन के मध्यपूर्व देशों से निकट होने के कारण, सिल्क रोड पर रेल की पटरियों को बिछाने की परियोजना का प्रस्ताव है, जिसका एक भाग सेमनान प्रांत से होकर गुज़रेगा, जिससे इस प्रांत में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।