Apr २६, २०१६ ०९:२१ Asia/Kolkata

चाबहार का क्षेत्रफल 17 हज़ार वर्ग किलोमीटर है और यह ईरान के दक्षिण पूर्व में ओमान सागर और हिंद महासागर के किनारे स्थित है।

यह उत्तर में ईरानशहर एवं नीकशहर और दक्षिण में ओमान सागर और पूर्व में पाकिस्तान और पश्चिम में किरमान एवं हुरमुज़गान प्रांत से लगा हुआ है। इस ज़िले में तीन शहर हैं, चाबहार, कोनारक और नेगोर। चाबहार ज़िले की लगभग 300 किलोमीटर सीमा ओमान सागर के किनारे से मिलती है। चाबहार बंदरगाह, समुद्र की सतह से सात मीटर ऊंचाई पर स्थित है। तेहरान से इसकी दूरी 2286, और ज़ाहेदान से 721 किलोमीटर है। सीस्तान और ब्लूचिस्तान इलाक़े में ओमान सागर के पानी के बहाव के कारण चाबहार बंदरगाह अस्तित्व में आई। चाबहार खाड़ी ओमान सागर के किनारे ईरान की सबसे बड़ी खाड़ी है और हिंद महासागर तक पहुंचने का सबसे निकट जलमार्ग है। चाबहार खाड़ी में कुल मिलाकर तीन बंदरगाहें हैं, जिनके नाम, चाबहार, तीस और कोनारक हैं। चाबहार के कर्क रेखा के निकट स्थित होने और मौसमी हवाओं के कारण वहां की जलवायु संतुलित है और वहां चार मौसम होते हैं। कुछ लोगों का भी मानना है कि चाबहार का नाम इस इलाक़े के मौसम के कारण पड़ा है और इस शहर का असली नाम चार बहार था।

 

 

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चाबहार, ईरानशहर होकर गुज़रने वाली सड़क द्वारा ईरान के अन्य इलाक़ों से जुड़ता है। ईरानशहर, चाबहार से 350 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। प्राचीन समय में यह इलाक़ा, तीस के नाम से जाना जाता था। वास्तव में तीस इस इलाक़े की ऐतिहासिक शक्ति की ओर संकेत है और शताब्दियां बीत जाने के बाद भी इस प्राचीन इतिहास के चिन्ह इस इलाक़े में देखे जा सकते हैं।

 

स्ट्रेटजिक स्थिति के कारण, प्राचीन समय से ही चाबहार विश्ववासियों के ध्यान का केन्द्र रहा है। जिस समय ईरानी शासक चाबहार के महत्व और उसकी संवेदनशील स्थिति से अनजान थे ब्रिटेन, पुर्तगाल और स्पेन समेत साम्राज्यवादी शक्तियां उस पर निंयत्रण के लिए प्रतिद्वद्विंता कर रही थीं। तीस टीले पर पुर्तगालियों के क़िले के खंडहर और चाबहार शहर में बंग्ला नामी इमारत कि जो एक समय में ब्रिटेन के हस्तक्षेप का केन्द्र थी, इस वास्तविकता के गवाह हैं।

 

ऐतिहासिक प्रमाणों के मुताबिक़, ब्लूचिस्तान इलाक़े के समुद्री संपर्कों एवं व्यापारिक गतिविधियों के मद्देनज़र, हख़ामनेशी काल से ही चाबहार इलाक़ा व्यापारिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता था और भारत, चीन और दक्षिण पूर्वी एशिया से व्यापारिक माल इस रास्ते से मध्यपूर्व पहुंचता था। मार्कोपोलो पर्यटन पर आधारित अपनी किताब में चाबहार के बारे में लिखता है कि अनेक व्यापारी जो समुद्र के रास्ते यात्रा करते हैं, उस स्थान पर रुकते हैं और यहां से ज़मीनी रास्ते से भी काफ़ी माल निर्यात किया जाता है।

विशेष भूगोलिक स्थिति और पूर्वी, पश्चिमी, उत्तरी और दक्षिणी अंतरराष्ट्रीय गलियारे में स्थित होने के कारण इसका बहुत महत्व है। इस संदर्भ में ईरानी अधिकारियों के विशेष ध्यान और राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और चाबहार की रणनीतिक स्थिति के दृष्टिगत इस इलाक़े को 1991 में ईरान के स्वतंत्र व्यापारिक एवं औद्योगिक इलाक़े के रूप में विकसित किया गया है।

 

 

वैश्विक स्तर पर व्यापारिक स्वतंत्र इलाक़ा बनाने के लिए 4000 हेक्टेयर ज़मीन, चाबहार व्यापारिक संस्था को प्रदान की गई है। 20 वर्षों में इसे विकसित करने की योजना है, जिसके बाद इसकी विशेषताओं का प्रचार किया जाएगा।

 

चाबहार ईरान का एक स्वतंत्र व्यापारिक इलाक़ा है, और इस इलाक़े की व्यापारिक गतिविधियां सीस्तान व ब्लूचिस्तान एवं ख़ुरासान प्रांतों की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं और इन प्रांतों की अर्थव्यवस्था में इसकी बहुत अहम भूमिका है। विशेष भूगोलिक स्थिति के कारण चाबहार, क्षेत्र के अलावा अतंरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि ईरान ने इस क्षेत्र में निर्माण कार्यों को प्रगति प्रदान की है ताकि निकट भविष्य में यह क्षेत्र के विकास में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

चाबहार खाड़ी की बंदरगाहों में तीस बंदरगाह सबसे पुरानी है। तीस सुन्दर होने के साथ साथ प्राचीन धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है। तीस पहाड़ों से घिरा हुआ इलाक़ा है और वहां अनेक ऐतिहासिक धरोहरे हैं। वहां छोटी बड़ी ग़ुफ़ाएं हैं जिनसे लोग अभी तक परिचित नहीं हैं। ग़ुफ़ाओं के अन्दर मक़बरे हैं और एक पुराना ऐतिहासिक क़िला है। कुल मिलाकर तीस में चार हज़ार वर्ष पुरानी सभ्यता के चिन्ह हैं। इस्लाम पूर्व और इस्लामी काल के धरोहर भी इस इलाक़े की शोभा बढ़ाते हैं।

कुएं, ग़ुफ़ाएं, मक़बरे, जामा मस्जिद और सबसे स्पष्ट रूप से तीस क़िला कि जो पुर्तगाली क़िले के नाम से प्रसिद्ध है, इस बंदरगाह में महत्वपूर्ण धरोहर हैं। तीस, चाबहार से 9 किलो मीटर की दूरी पर और दो पर्वतीय श्रंखलाओं के बीच में स्थित है। दूर से देखने पर खजूर के पेड़ों और दूसरे वृक्षों के बीच बने घर, इन्सान और प्रकृति के संगम का एक सुन्दर दृश्य पेश करते हैं। इस बीच, ऊंची मीनार और तीस मस्जिद कि जो काफ़ी ऊंचाई पर स्थित है, बहुत ही आकर्षक दृश्य पेश करते हैं। इस मस्जिद के सुन्दर रंग और आकर्षक डिज़ाईन एक विशेष आध्यात्मिक हालत प्रदान करते हैं।

 

 

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तीस के निवासी विभिन्न ब्लूची जातियों से संबंध रखते हैं, जो मछलियां पकड़ने, सब्ज़ी उगाने और बाग़बानी के कार्यों में व्यस्त हैं। तीस बंदरगाह विशेष रूप से चौथी हिजरी क़मरी शताब्दी से इलाक़े की महत्वपूर्ण बंदरगाह मानी जाती रही है। इस मार्ग से व्यापारिक माल चीन, भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया भेजा जाता था। चौथी हिजरी क़मरी के प्रसिद्ध पर्यटक एवं भूगोल शास्त्री मुक़द्दसी ने तीस के बारे में लिखा है कि तीस में बड़ी संख्या में खजूर के वृक्ष हैं और यहां सुन्दर मुसाफ़िर ख़ाने एवं जामा मस्जिद है। वहां के लोग विभिन्न जातियों के हैं।

 

कोनारक बंदरगाह कोनारक चाबहार खाड़ी के पश्चिमी कोने में और चाबहार शहर से 50 किलो मीटर की दूरी पर स्थित है। जिस प्रकार, चाबहार को ओमान सागर में सीस्तान व ब्लूचिस्तान प्रांत की महत्वपूर्ण बंदरगाह माना जाता है, कोनारक भी इस इलाक़े की महत्वपूर्ण बंदरगाह है। इस तटवर्ती शहर की आबादी इस प्रांत के दूसरे इलाक़ों में सबसे अधिक है। इस शहर में विभिन्न सुविधाएं जैसे कि टेलीफ़ोन एक्सचेंज, परिवहन और हवाई अड्डा मौजूद है। सैंकड़ों शिकारी नावों और नाव निर्माण के उद्योग ने कोनारक के महत्व को दोगुना कर दिया है। कोनारक के मछुआरे, मछलियां पकड़ने के लिए फ़ारस की खाड़ी और ओमान सागर के पूर्वी छोर तक मछलियां पकड़ने के लिए जाते हैं। प्रयास, साहस, हिम्मत, प्रतिरोध और मछलियां पकड़ने में इन मछुआरों की दक्षता दक्षिणी ईरान के इलाक़ों में अद्वितीय है।