Apr २६, २०१६ ०९:३३ Asia/Kolkata
  • ज़ाहेदान,ईरानशहर, सरवान , खाश

ज़ाहेदान, सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत का केन्द्रीय नगर है।

 इस नगर की महत्वपूर्ण भौगोलिक स्थिति है और यह भारत, पाकिस्तान, खुरासान, किरमान और बलोचिस्तान के राजमार्ग में स्थित है। जो पर्यटक युरोप जाना चाहते हैं वे जाहेदान के मार्ग से ईरान में प्रवेश करते हैं और वे ईरान की पश्चिमोत्तरी सीमा को पार करके तुर्की पहुंचते हैं। इस आधार पर इस रास्ते से बहुत से पर्यटक आवाजाही करते हैं। ज़ाहेदान नगर की प्राचीनता सौ वर्ष से कम है और यह पाकिस्तान एवं अफगानिस्तान की सीमा के निकट स्थित है।

 

 

सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत का एक अन्य नगर खाश भी है जो ज़ाहेदान से १९० किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। खाश अपेक्षाकृत पुराना नगर है और उसकी प्राचीनता का संबंध १८वीं शताब्दी में नादिर शाह की सरकार से है। इस क्षेत्र में बड़े बड़े और उपजाऊ मैदानों ने इस क्षेत्र को सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत के कृषि ध्रुव में परिवर्तित कर दिया है। खाश नगर के पूर्वोत्तर में तफ्तान नाम का पर्वत है जिसकी ऊंचाई ४१०० मीटर है। इस पहाड़ का हरा भरा आंचल और खनिज पानी के सोते अछूती प्रकृति प्रेमियों के ध्यान के केन्द्र हैं और साल के विभिन्न मौसमों में समूचे ईरान से हज़ारों पर्वतारोही और व्यायाम व कसरत करने वाले यहां आते हैं।

 

सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत का एक नगर ईरानशहर है और यह जाहेदान नगर से ३६५ किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। ईरानशहर ईरान के अति प्राचीनतम नगरों में से एक है और इसे पहले “फहरह” के नाम से जाना जाता था। सिकंदर महान के आक्रमण के काल में यह एक आबाद एवं हरा भरा क्षेत्र था परंतु समय बीतने के साथ साथ यह क्षेत्र विभिन्न कारणों से धीरे धीरे नष्ट होता गया परंतु लगभग दो शताब्दी पूर्व क़ाजार शासन श्रंखला के काल से यह नगर विस्तृत व विकसित होता गया और इस समय यह कृषि तथा उद्योग की दृष्टि से सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत के ध्रुव में परिवर्तित हो गया है।

इस क्षेत्र में बहुत से एतिहासिक अवशेष मौजूद हैं जिनमें से महत्वपूर्ण पुराना दुर्ग, चेहल दुख्तर, बम्पूर और सरबाज़ नाम के कई दुर्ग हैं।

 

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सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत के सबसे पूर्व में सरवान नगर स्थित है और यह प्रांत के केन्द्रीय नगर ज़ाहेदान से ३५२ किलोमीटर की दूरी पर है। शुस्तून नाम का पहले एक गांव था जो बाद में धीरे धीरे विस्तृत होता गया और आज उसे सरवान नगर के नाम से पुकारा जाने लगा। इस क्षेत्र में इस्लाम के पहले से संबंधित काल के मूल्यवान अवशेष प्राप्त हुए हैं। सरवान नगर के महत्वपूर्ण प्राचीन अवशेषों से “तप्पये कलातक” “तप्पये सैयद मीर उमर” “तप्पये महताब ख़ज़ानह” और “तप्पये मील मार्द” नाम के टीले हैं जिनका संबंध ईसवी से ५००० साल पहले से है।

 

“अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया”

“अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” ईरान के एक धर्मपरायण, वचनबद्ध और संघर्षकर्ता विद्वान थे। सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत के केन्द्रीय नगर ज़ाहेदान से कुछ दूरी पर कलातेह काम्बुज़िया नाम का एक गांव है। मरुस्थल में स्थित इस गांव के महान विद्वान “अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” से मिलने के लिए बहुत से विद्वान, पूर्व विशेषज्ञ और अध्ययनकर्ता वहां गये। “अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” का वर्ष १९०४ में तेहरान में जन्म हुआ। उन्होंने अपनी आरंभिक और माध्यमिक शिक्षा तेहरान एवं ईरान के पवित्र नगर मशहद में प्राप्त की जबकि उच्च शिक्षा ताशकन्द विश्व विद्यालय में प्राप्त की। उस्ताद “अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” ने कानून एवं इतिहास में डाक्ट्रेड की डिग्री तक अपनी पढ़ाई जारी रखी और वे सात भाषाओं में पूर्णरूप से निपुण थे।

“अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” ने मोहम्मद तक़ी खान पिसयान के साथ मिलकर समय की अत्याचारी सरकार के विरुद्ध संघर्ष आरंभ कर दिया जिसके परिणाम में सरकार ने उन्हें ज़ाहेदान नगर से निष्कासित कर दिया। उस्ताद “अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” चूंकि समय की अत्याचारी एवं पहलवी सरकार के मुखर विरोधी थे इसलिए पहलवी सरकार उन पर कड़ी नज़र रखती थी और इस सरकार की सुरक्षा संस्थाओं ने बारम्बार इन पर दबाव डाले। वे ज़ाहेदान नगर के आस पास के क्षेत्रों में अध्ययन, बागबानी और कृषि का काम करते थे। उस्ताद “अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” ने अपने गांव कलातेह काम्बुज़िया में एक पुस्तकालय का निर्माण किया और जिस समय उस्ताद “अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” का स्वर्गवास हुआ उसमें २५ हज़ार किताबें मौजूद थीं।

 

 

वर्ष १९७४ में संदिग्ध तरीके से उस्ताद “अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” की मृत्यु हो गयी और उसके बाद पहलवी सरकार के पिटठुओं ने उनके पुस्तकालय को बंद कर दिया और उसमें मौजूद बहुत सी मूल्यवान किताबों एवं प्रमाणों को गायब व बर्बाद कर दिया। उस्ताद “अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” को उनके पुस्तकालय के प्रांगण में दफ्न किया गया है और इस समय इस पुस्तकालय का संचालन सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत के संस्कृति केन्द्र की ओर से एक अध्ययन केन्द्र के रूप में किया जा रहा है और बहुत से लोग इस पुस्तकालय से लाभांवित हो रहे हैं।

यहां इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि दिवंगत उस्ताद “अमीर तवक्कुल काम्बुज़िया” ने ८० से अधिक किताबें लिखी हैं जिनमें से कुछ एसी हैं जो अंतर्राष्ट्रीय जायोनिज़्म का रहस्योदघाटन करती हैं।

 

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सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत में हस्त उद्योग को विशेष स्थान प्राप्त है और लोगों की आमदनी की दृष्टि से कृषि और पशुपालन के बाद इसका स्थान है। शायद यही कारण है कि इस क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के हस्त उद्योग दिखाई पड़ते हैं।

वर्तमान समय में सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत का सबसे महत्वपूर्ण हस्त उद्योग कालीन, दरी, कुरैशिया का काम, चटाई की बुनाई और मिट्टी के बर्तन आदि हैं।

 

कुरैशिया का काम सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत का एक महत्वपूर्ण हस्त उद्योग है। यह कार्य बलोच महिलाओं की रूचि और कला प्रेम का सूचक है और इसका स्रोत बलोचिस्तान की बंजारा महिलाएं एवं लड़कियां हैं। यहां पर कुरैशिया के कार्य विभिन्न डिजाइनों में किये जाते हैं और इसी कारण कुरैशिया के काम को बलोचदुज़ी के नाम से भी जाना जाता है और बलोचिस्तान से बाहर दूर दूर के क्षेत्रों में भी यह कार्य प्रसिद्ध है। बलोचिस्तान के घर घर में यह अतिप्राचीन कार्य होता है।

 

 

इटली के प्रसिद्ध पर्यटक मोर्कोपोलो ने भी अपने यात्रावृतांत में बलोचिस्तान और किरमान की महिलाओं की कला एवं हाथ से बुनी जाने वाली विभिन्न वस्तुओं का नाम लिया है।

कुरैशिया का काम बलोच महिलाओं के मध्य बहुत लोकप्रिय है और बहुत अधिक महिलाएं व लड़कियां इसकी पक्षधर हैं और कुरैशिया के कामों में बलोच महिलाओं व लड़कियों के धैर्य व कला के मिश्रण को भलिभांति देखा जा सकता है। कुरैशिया के मूल्यवान काम में केवल इंसान के हाथ, धागे और सुई का प्रयोग होता है और कुरैशिया का काम किस प्रकार का हो, यह काम वहां की महिला की कलाबोध पर निर्भर करता है। अतीत में कुरैशिया के कार्य का प्रयोग अधिकतर स्थानीय होता था और वहां की महिलाओं के वस्त्रों को सुन्दर बनाने के लिए इसका प्रयोग होता था परंतु आज कुरैशिया के कार्य ने विस्तृत रूप धारण कर लिया है और अब मेज़पोश अर्थात मेज़ के ऊपर डालने वाले कपड़े और पर्स आदि पर कुरैशिया का काम किया जाता है और इस समय कुरैशिया के किये गये काम के विभिन्न उत्पादों को विश्व के विभिन्न देशों में निर्यात भी किया जाता है।

 

 

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सिक्कादुज़ी या शीशे की कढाई भी बलोचिस्तान का एक अन्य हस्त उद्योग है और यह बलोच महिलाओं के मध्य बहुत प्रचलित है। सिक्केदुज़ी का काम प्रायः रात को सोने के बिस्तर और विवाह समारोहों में ऊंटों के गर्दन पर डाले जाने वाले कपड़ों को सुसज्जित करने के लिए किया जाता है और सिक्केदुज़ी के काम किये गये कपड़ों को दीवार पर लटकाया

जाता है। सिक्केदुज़ी का भी इतिहास बलोचिस्तान में कुरैशिया पर किये जाने वाले कामों की भांति है और सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत के सभी गावों में यह कार्य प्रचलित है। शीशे की कढाई में मुख्यरूप से कपड़े, बटन, शीशे, और सितारे का प्रयोग होता है। सीस्तान व बलोचिस्तान प्रांत में हस्त उद्योग बहुत अधिक है। इस प्रांत में विभिन्न प्रकार के मिट्टी के बर्तन भी बनाये जाते हैं। इस प्रांत में मिट्टी के जो बर्तन बनाये जाते हैं उन्हें ईरान और ईरान के पड़ोसी देशों में बहुत पसंद किया जाता है।