सकेज़ नगर
सकेज़ वह नगर है जिसमें मौजूद प्राचीन अवशेष उसके इसिहास की गाथा सुनाते हैं।
सकेज़ कुर्दिस्तान प्रांत के पश्चिम में स्थित है और इस नगर की अर्थ व्यवस्था का आधार कृषि है। गेहूं, जौ, तंबाकू, सूरज मुखी और एसी चीज़ें जिनसे तेल निकाला जाता है वहां की मुख्य फसले हैं। सकेज़ नगर ईरान के पश्चिम और पश्चिमोत्तर में ईरान, इराक और तुर्की से आने जाने वाले कारवां के रास्ते में स्थित है और प्राचीन समय में यह दुनिया के दूसरे देशों से जोड़ने का केन्द्र था। समुद्र की सतह से इस नगर की ऊंचाई लगभग डेढ हज़ार मीटर है और कुर्दिस्तान प्रांत के केन्द्रीय नगर सनन्दज से यह 180 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस नगर के बीच से एक नदी गुज़री है जिससे सिंचाई की जाती है और उसके किनारे बहुत ही सुन्दर व हरियाली उगी है। ज़ीवियेह के प्राचीन, सराय, सकेज के पुराने बाज़ार और दो मीनार वाली मस्जिद इस नगर के महत्वपूर्ण पर्यटन आकर्षण हैं।
इतिहासकारों का विश्वास है कि सकेज़ नगर की प्राचीनता का संबंध माद शासन काल से है। सकेज़ शब्द सग्ज़ से बना है और सग्ज़, सकों की राजधानी था और बारम्बार के हमलों के कारण कई बार उसका स्थान परिवर्तित हुआ। इस प्रकार से कि वह आज सक़ेज- बानेह मार्ग में एक बड़ा स्थान है और उसे प्राचीन सकेज़ कहा जाता है। प्राचीन समय में सकेज़ पर रोमियों और दूसरी जातियों ने हमला किया था। उसके बाद वह मंगोलों और उसमानी साम्राज्य के आक्रमणों से भी सुरक्षित नहीं रहा। हालिया दशकों में एतिहासिक अवशेषों को बेहतर ढंग से जानने व पहचानने के लिए इस क्षेत्र में बहुत खुदाई हुई है और उसके परिणाम में होने वाली समीक्षा इस बात की सूचक है कि पूरा सकेज नगर एतिहासिक अवशेषों का संग्रहालय है परंतु जो चीज़ इस नगर के अधिक प्रसिद्ध होने का कारण बनी है वह ज़ीवीयेह नाम का दुर्ग और करफ्तू नाम की गुफा है।
सकेज नगर से 50 किलोमीटर की दूरी पर एक गांव के किनारे ज़ीवियेह नाम के दुर्ग के अवशेष एक टीले पर हैं और यह टीला सात शताब्दी ईसापूर्व के एक प्राचीन नगर का अवशेष है। ज़ीवीएह में होने वाली खुदाई में जो मूल्यवान अवशेष प्राप्त हुए हैं एतिहासिक दृष्टि से उनका संबंध ३० शताब्दी पूर्व से है और साथ ही वह ईसवी से एक हज़ार वर्ष पूर्व कला का सुन्दर नमूना है। खेद के साथ कहना पड़ता है कि वहां की खुदाई में जो चीज़ें प्राप्त हुई हैं उनमें से अधिकांश ईरान की इस्लामी क्रांति की सफलता से पूर्व लापता हो गयीं और वे यूरोप तथा अमेरिका के संग्रहालयों की शोभा बनी हुई हैं जबकि वहां पर की जाने वाली खुदाई में जो चीज़ें प्राप्त हुईं उनमें से कुछ ही ईरानी संग्रहालय में मौजूद हैं।
ज़ीवीएह दुर्ग नौ शताब्दी ईसा पूर्व वास्तुकला का एक सुन्दर नमूना है। इस दुर्ग को वास्तुकला और कला की दृष्टि से इतिहास का महत्वपूर्ण अवशेष समझा जाता है और संभवतः उसका संबंध मानाई जाति से है और ईरान के पश्चिमोत्तर में उसकी राजधानी थी।
ज़ीवीएह टीले की विशेष प्राकृतिक व स्ट्रैटेजिक स्थिति इस प्रकार के दुर्ग बनाये जाने का मुख्य कारण थी।

पहली बार इस दुर्ग का नाम आशूरी कैलेन्डर में लिया गया और बयान किया गया कि मानाई जाति के हमले के बाद इस दुर्ग के माध्यम से युद्धक कार्यवाहियां की जाती थीं।
ज़ीविएह की अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता व प्रसिद्धि का संबंध १३२५ हिजरी शम्सी से है। वर्षा और हिमपात के कारण टीले का कुछ भाग खराब हो गया और अचानक उसमें मौजूद अवशेष व वस्तुएं बरामद हो गयीं। सबसे पहले वहां पर खुदाई का काम अमेरिकी भूवेत्ता राबर्ट रायसन ने वर्ष १९४५ में की। उसके बाद विभिन्न अवसरों पर कई बार इसकी खुदाई हुई।
कुर्दिस्तान प्रांत की एक प्रसिद्ध गुफा का नाम करफ्तू है। यह गुफा बहुत बड़ी है और इसे इस प्रांत का एक आकर्षण व पर्यटन स्थल समझा जाता है। यह गुफा सकेज़ नगर से ७२ किलोमीटर की दूरी पर करफ्तू नाम के गांव से निकट है। यह गुफा चूने के एक पहाड में है और उसके किनारे विभिन्न शरण स्थल और छोटे बड़े गढ़ढे हैं इस प्रकार से गुफा के पास से सब दिखाई पड़ते हैं जबकि इस गुफा से 500 मीटर की दूरी पर एक दूसरी गुफा है जो ठंडक में बर्फ से पूरी तरह ढकी रहती है और गुफा का भीतरी भाग गर्म रहता है जबकि गर्मी के दिनों में गुफा के अंदर ठंडक रहती है। गुफा का प्रवेश द्वार पहाड से लगभग 25 मीटर दूर है और अतीत में वहां पहुंचना काफी कठिन कार्य था परंतु आज एक सीढी के माध्यम से बड़ी सरलता से गुफा के प्रवेश द्वार पर पहुंचा जा सकता है।
करफ्तू गुफा मज़ूज़ईक के काल में अर्थात लगभग 60 मिलियन वर्ष पहले पानी के नीचे थी और अब वहां पानी नहीं है। यह गुफा लगभग 750 मीटर लंबी है और इसके अंदर जाने के मुख्य मार्ग के अतिरिक्त कई दूसरे रास्ते भी हैं। यह चट्टानी गुफा चार मंजिला है और इसकी चौथी मंजिल विशेष सौन्दर्य की स्वामी है। करफ्तू गुफा के अंदर दो इमारतें दिखाई पड़ती हैं जिनका संबंध ईसा पूर्व लगभग तीन शताब्दी ईसापूर्व से है। इस गुफा के अंदर से जो चीज़ें व अवशेष प्राप्त हुए हैं वे इस बात के सूचक हैं कि अतीत में इस गुफा के भीतर इंसान रहते थे। इस गुफा के भीतर एक छोटी और पतली से नदी भी बह रही है जिससे विभिन्न झरने अस्तित्व में आ गये हैं। इस नदी का पानी बहुत ही स्वच्छ, साफ, और मीठा है। सारांश यह कि करफ्तू गुफा बहुत ही सुन्दर, आकर्षक और मूल्यवान है और इसे कुर्दिस्तान प्रांत का महत्वपूर्ण पर्यटन आकर्षण समझा जाता है।
बाने नगर…..
बाने नगर से परिचित कराना चाहते हैं। बाने नगर के पश्चिम और दक्षिण में इराक है यानी उसकी सीमाएं इराक से मिलती हैं। इस नगर की ऊंचाई समुद्र की सतह से 1554 मीटर है और यह नगर कुर्दिस्तान प्रांत के सनन्दज नगर से २७० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इसी प्रकार इराक से 21 किलोमीटर दूर यह नगर ज़ाग्रोस पर्वत श्रंखला के आंचल में स्थित है। इस आधार पर ऊंचे पर्वतों ने बाने नगर को घेर रखा है।
प्राकृतिक दृश्यों की दृष्टि से बाने नगर कुर्दिस्तान प्रांत का एक समृद्ध नगर है। पहाड़ों और हरे- भरे जंगलों ने इस नगर को विशेष सुन्दरता प्रदान कर रखी है। इस क्षेत्र में बहुत सी चारगाहें हैं जिसके कारण वहां पर मवेशी पालन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस क्षेत्र में बहुत से बंजारे रहते हैं जो गर्मी और ठंडक के दिनों में एक स्थान से दूसरे स्थान पर कूच करते हैं। बाने नगर चूंकि इराक की सीमा के निकट स्थित है इसलिए आर्थिक दृष्टि से वह क्षेत्र में विशेष स्थान रखता है। यह नगर वर्ष 2010 से ईरान के आर्थिक क्षेत्रों में परिवर्तित हो गया। अतः हालिया वर्षों में यह नगर कुर्दिस्तान प्रांत के सबसे महत्वपूर्ण स्थान में परिवर्तित हो गया है।
बाने नगर का सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन आकर्षण वहां के बाज़ार और माल हैं। वहां खरीदारी के महत्वपूर्ण केन्द्र इस प्रकार हैः “पार्के कोहिस्तानी दुकानान” “पीरमुराद” सूरीन मनोरंजन स्थल।

बाने का इतिहास उतार चढ़ाव से भरा पड़ा है। बाने नगर में प्रथम और द्वतीय विश्व युद्ध के समय अज्ञात कारणों से आग लग गयी थी और यह नगर पूर्णरूप से जलकर नष्ट हो गया परंतु चित्रकारी किये हुए मिट्टी के बर्तन, प्राचीन सिक्के और पत्थर पर ऊकेरी गयी कलाकारी, वह चीज़ें हैं जो इस नगर की प्राचीनता की गाथा सुनाते हैं। यहां इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि बाने इराक का सीमावर्ती नगर है और सद्दाम द्वारा ईरान पर थोपे गये युद्ध के कारण इस नगर को बहुत अधिक क्षति पहुंची था यहां तक कि कई बार उस पर रासायनिक बम्बारी की गयी परंतु आज लोगों और अधिकारियों के प्रयास से नगर की स्थिति से युद्ध के चिन्ह समाप्त हो गये हैं।