बीजार
बीजार नगर का क्षेत्रफल 7730 वर्ग किलोमीटर है और यह कुर्दिस्तान प्रांत के पूरब में स्थित है।
चूंकि यह नगर ईरान के पश्चिम में स्थित पर्वत माला से जुड़ा हुआ है इसलिए इसकी एक तिहाई भूमि पर्वतीय है। समुद्र की सतह से इस नगर की ऊंचाई लगभग 2000 मीटर है और यह नगर पहाड़ों तथा क्षेत्र की ऊंचाईयों के मध्य स्थित है। बीजार के लोग कुर्दी, तुर्की और फार्सी सहित दूसरी भाषाओं में बात करते हैं। इस नगर की प्राचीनता का संबंध तीसरी सहस्त्राब्दी ईसा पूर्व से है। शाह इस्माईल सफवी की ईरान के पश्चिम में चढाई के समय यहां से गुज़र हुआ था और चंगेज़ खां के सिपाही भी वहां से गुज़रे थे। इस समय भी एक पहाड़ के ऊपर चंगेज़ नाम का एक दुर्ग बीजार के निकट और हलवाई नाम के एक सुन्दर गांव के पास स्थित है और इसका संबंध उसी काल से है।
बीजार नगर का आर्थिक आधार कृषि है। गेहूं और जौ इसके महत्वपूर्ण उत्पाद हैं। खेती के साथ पशुपालन भी इस क्षेत्र में खूब होता है। यहां से निर्यात होने वाली वस्तुओं में सर्वोपरि गेहूं और जौ हैं। ऊन और चमड़ा जैसी पशुओं से प्राप्त होने वाली वस्तुएं भी बीजार से निर्यात होती हैं।
बीजार नगर में बहुत अधिक औषधिय जड़ी- बूटियां भी उगती हैं जैसे अजवाइन, मुलैठी, पुदीना, सौंफ आदि। इस क्षेत्र की महिलाएं घर के कार्यों के अतिरिक्त कृषि के कार्यों में पुरूषों का हाथ बटाती हैं। ये महिलाएं कलाकारों की भांति खाली समय में दरी और कालीन आदि की बुनाई भी करती हैं। बीजार का कालीन और दरी काफी प्रसिद्ध है क्योंकि वह बहुत मज़बूत होती है और उन पर जो कला कृतियां बनी होती हैं वे बहुत सुन्दर होती हैं।

बीजार क्षेत्र की जलवायु भिन्न है और पानी के विभिन्न स्रोत मौजूद हैं जिसकी वजह से कुर्दिस्तान प्रांत में नाना प्रकार की वनस्पतियां और जंगल पाये जाते हैं। नाना प्रकार की वनस्पतियों और जंगल के कारण यहां नाना प्रकार के पक्षी और स्तनधारी प्राणी पाये जाते हैं। पक्षियों में पलायनकर्ता और स्थानीय दोनों प्रकार के पक्षी शामिल हैं। इसी प्रकार कुर्दिस्तान प्रांत में नाना प्रकार के जीव- जन्तु रहते हैं और शिकार की दृष्टि से कुर्दिस्तान प्रांत ईरान के सबसे उपयुक्त क्षेत्रों में से एक है। कुर्दिस्तान प्रांत के पर्यावरण संगठन की रिपोर्ट के अनुसार इस क्षेत्र में 34 स्थान हैं जहां विभिन्न प्रकार के जानवरों व पक्षियों का शिकार किया जाता है। बीजार का जो संरक्षित क्षेत्र है उसका क्षेत्रफल कुर्दिस्तान के पूर्वोत्तर में 23 हज़ार हेक्टेयर है और एक भाग में बीजार नगर स्थित है।
बीजार का जो संरक्षित क्षेत्र है वह चूंकि वहां की ऊंचाइयों के मध्य स्थित है इसलिए वहां पर काफी हिमपात और वर्षा होती है। इसी कारण इस क्षेत्र में बहुत अधिक पानी के सोतों को देखा जा सकता है। इन सोतों में कुछ एसे हैं जिनसे हमेशा पानी निकलता रहता है और कुछ एसे हैं जो मौसमी होते हैं।
पक्षियों की दृष्टि से भी यह क्षेत्र समृद्ध है। यहां पर नाना प्रकार के पक्षी, मछलियां और स्तनधारी पशु पाये जाते हैं। इस क्षेत्र के स्तनधारी प्राणियों में सबसे मुख्य और बड़ा मेंढा होता है जो इस क्षेत्र की कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रहता है। इसी तरह इस क्षेत्र में कुछ हिरन भी रहते हैं। इन पशुओं के अतिरिक्त कत्थई भालू, जंगली सुअर, भेड़िया और खरगोश जैसे नाना प्रकार के जानवर भी पाये जाते हैं। इसी तरह इस क्षेत्र में नाना प्रकार के स्थानीय एवं पलायनकर्ता पक्षी भी रहते हैं जैसे तीतर, बटेर, फाख्ता और सुर्मई रंग के हंस आदि।
क़मिचक़ारी और कज़ेल ऊज़न नाम की दो नदियां भी इस क्षेत्र में बहती हैं। इसी प्रकार इन नदियों में ब्लैक फिश और red cap या goldenfish नाम की मछलियां पाइ जाती हैं। इन नदियों में दरियाई कुत्ते भी रहते हैं। स्पष्ट है कि इनमें से हर एक अकेले दर्शकों के लिए प्राकृतिक आकर्षण हैं और जो अपनी ओर खींचते हैं।
बीजार का एक महत्वपूर्ण एतिहासिक अवशेष “कलअये क़मचकारी” अर्थात क़मचकारी नाम का दुर्ग है। यह दुर्ग इसी नाम के गांव और नदी के किनारे स्थित है। इस दुर्ग को कुर्दिस्तान प्रांत के अति प्राचीन और मूल्यवान एतिहासिक अवशेष समझा जाता था। विशेषज्ञों के अनुसार इस दुर्ग के निर्माण का संबंध 8-9 शताब्दी ईसापूर्व से है। इस दुर्ग के पश्चिमी कोण पर पतला और 1000 मीटर गहरा दर्रा है। दूसरी ओर इस दुर्ग की दीवारों को बहुत मोटी मोटी बनाया गया है। मोटी मोटी और ऊंची ऊंची दीवारों के साथ इस प्रकार के दुर्ग का निर्माण राजशाही महलों से विशेष था और ईसा पूर्व की पहली सहस्त्राब्दी की सबसे प्रचलित वास्तुकला समझी जाती थी। इस दुर्ग के अंदर बाक़ी बचे अवशेष इस बात के सूचक हैं कि माद, पार्त, अश्कानी और मंगोल शासकों के काल में लोग उसमें रहते थे।

बीजार का बाजार भी काजारी काल का महत्वपूर्ण इतिहासिक अवशेष है और यह नगर के पुराने भाग में स्थित है। इस बाजार के उत्तर और दक्षिण में एक लंबा रास्ता है और हाज शहबाज़ तथा हाज अमीर तूमान नाम के दो छोटे छोटे सराय हैं। बाजार में जो कमरे हैं वे बाजार के मुख्य रास्ते के दोनों ओर हैं और उनका निर्माण प्राचीन वास्तुकला में किया गया है जबकि शेष कमरों और रास्तों में काफी परिवर्तन हुआ है। हाज शहबाज़ नाम का जो सराय है वह बीजार के बाजार के पूर्वी कोण पर स्थित है। इस सराय की विशेषता यह है कि उसे बड़े ही सुन्दर ढंग से सजाया गया है और उसकी छत का अब भी प्रयोग किया जा रहा है जिसे बहुत ही सुन्दर ढंग से बनाया गया है और इसकी सुन्दरता वास्तुकारों की सोच और सौन्दर्यबोध को दर्शाती है। अमीर तूमान नाम का सराय बीज़ार की बाज़ार के पश्चिमी कोण पर स्थित है और यह बीजार के लोगों के मध्य तिमचये अमीर तूमान नाम से प्रसिद्ध है। इस सराय में एक केन्द्रीय प्रांगण है जिसके चारों ओर कमरे हैं। यह सराय एक मंजिला है और इसका निर्माण गारे- मिट्टी , ईंट और पत्थर से किया गया है।
बीजार के बाज़ार का नाम वर्ष 1999 में ईरान के राष्ट्रीय धरोहरों की सूचि में पंजीकृत कर लिया गया।
कूरवह, दीवानदर्रेह, और कामीरान/ कुर्दिस्तान प्रांत के उपजाऊ तथा हरे- भरे क्षेत्रों में हैं और ये कृषि एवं मवेशीपालन की दृष्टि से विशेष महत्व रखते हैं। कुर्दिस्तान प्रांत के दूसरे क्षेत्रों की भांति इन क्षेत्रों की भी अपनी विशेषताएं हैं जिनकी समय की कमी के कारण हम अनदेखी कर रहे हैं परंतु यहां इस बात का उल्लेख आवश्यक है कि इन क्षेत्रों में खनिज पानी और उपचारिक विशेषताओं का स्वामी एक सोता भी है जिससे लाभांन्वित होने के ईरान के विभिन्न कोनों से प्रति वर्ष हज़ारों लोग वहां जाते हैं।