करज नगर-३
अलबुर्ज़ प्रांत के कुछ अन्य नगरों के नाम इस प्रकार हैं।
तालेक़ान, इश्तेहार्द, सावोजोबोलाग़, नज़राबाद और फ़रदीस आदि। समय की कमी के कारण हम इन सब नगरों के बारे में आपको नहीं बता सकेंगे। आज के कार्यक्रम में हम तालेक़ान नगर के बारे में चर्चा करेंगे। कार्यक्रम के अंत में नज़राबाद नगर में स्थित उज़बकी टीले के बारे में आपको बताएंगे।
तालेक़ान नगर, अलबुर्ज़ प्रांत का प्रमुख नगर है। यह नगर तीन भागों से मिलकर बना है जिनके अलग-अलग नाम हैं। तालेक़ान नगर में प्राकृतिक आकर्षकों के अतिरिक्त एतिहासिक और धार्मिक स्थल भी पाए जाते हैं। इन स्थलों ने इस नगर के महत्व को अधिक बढ़ा दिया है। तालेक़ान नगर अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला के बीच के ठंडे क्षेत्र में स्थित है। यहा की जलवायु ठंडी है। यही कारण है कि यहां पर शीतकाल के दौरान जितने लोग रहते हैं उससे कई गुना अधिक ग्रीष्मकाल में हो जाते हैं। तालेकान की कुल जनसंख्या 7000 है जो गर्मियों में बढ़ जाती है। इस्लामी क्रांति के दौरान क्रांतिकारी गतिविधियां अंजाम देने वाले वरिष्ठ धर्मगुरू आयतुल्लाह तालेक़ानी का घर इसी नगर के गेलीर्द क्षेत्र में स्थित है। इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद वे तेहरान के पहले इमामे जुमा निर्धारित किये गए थे। इसके अतिरिक्त नस्तालीक़ लीपि के अविष्कारक, अब्दुल मजीद तालेक़ानी का घर भी तालेक़ान के महरान क्षेत्र में है। इसके अतिरिक्त तालेक़ान नगर में कई क़िले, मक़बरे, पुरानी पनचक्कियां और बहुत से कई अन्य दर्शनीय स्थल हैं।
तालेक़ान नगर की स्पष्ट प्राकृतिक विशेषता, यहां पर पाए जाने वाली ऊंची-ऊंची चोटियां हैं। तालेकान के निकट स्थित पर्वत, अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला का भाग हैं जो लगभग 90 किलोमीटर की लंबाई में स्थित है।
तालेक़ान के पर्वत की सबसे ऊंची चोटी शाह अलबुर्ज़ है जो समुद्र की सतह से 4200 मीटर ऊंची है। इसके उत्तरी छोर पर आठ छोटे-छोटे ग्लैशियर हैं जो बहुत ही सुन्दर एवं आकर्षक हैं। यहां पर पाए जाने वाले झरनों और इस क्षेत्र की वनस्पतियों ने इसकी सुन्दरता में चार चांद लगा दिये हैं। यहां पर हरीभरी चरागाहें पाई जाती हैं। इस क्षेत्र में बहुत सी चोटियां हैं। इस पर्वतीय क्षेत्र में अपेक्षाकृत अधिक वर्षा होती है जिसके कारण चारों ओर झरने और पहाड़ी नदियां दिखाई देती हैं। जल की प्रचुरता ने इस क्षेत्र को जहां हरियाली प्रदान की है वहीं इसे प्राकृतिक दृष्टि से बहुत ही सुन्दर बना दिया है।

अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला पर स्थित तालेक़ान नगर में गुफाएं, खनिज जल, आकर्षक ग्लैशियर, झीलें, हरेभरे खेत, फलदार बाग़ और वन्य जीवों के निवास स्थल पाए जाते हैं। यह नगर राजधानी तेहरान से कुछ दूरी पर स्थित है। तालेक़ान नगर की ख्याति का एक अन्य कारण यह है कि वह इतिहास के महान क्रांतिकारियों और महापुरूषों का शरणस्थल भी रहा है। यहां पर मौजूद दुर्ग, प्राचीन काल में इसकी वैभवता एवं महानता की गाथा सुनाते हैं। तालेक़ान के पहाड़ी क्षेत्रों में आलेबूये, मरदावीज ज़ियारी, हसन सबाह और अलवियाने तबरिस्तान जैसे एतिहासिक हस्तियों की निशानियां पाई जाती हैं। इन लोगों ने अपने नियंत्रण वाले क्षेत्रों की सुरक्षा के उद्देश्य से तालेक़ान में कुछ क़िलों का निर्माण कराया है।
इन्ही क़िलों में से एक, क़िले मीमून दिज़ है जो तालेक़ान के पहाड़ पर स्थित है। इसका संबन्ध इस्माईलियान शासनकाल की महत्वपूर्ण धरोहरों से है। इसके बारे में कहा जाता है कि उसका निर्माण छठी हिजरी क़मरी के आरंभ में हसन सबाह के शासन काल में कराया गया था। अपने काल की महत्वपूर्ण इमारतों में इस किले या दुर्ग की गणना होती है। तालेक़ान तथा अलमूत पर हलाकू के आक्रमण के दौरान यह किला नष्ट हो गया था। वर्तमान समय में केवल उसकी दीवारें ही मौजूद हैं।
तालेक़ान में पाए जाने वाले क़िलों में एक अन्य क़िला अरज़ंग है इसे पहाड़ के ऊपर बनाया गया है। इस क़िले में 1200 योद्धा रहा करते थे। क़िले के निकट 50 मीटर की ऊंचाई पर इसकी सुरक्षा के लिए एक “वाच टावर” बनाया गया था। इस क़िले के निकट दो महत्वपूर्ण युद्ध हुए हैं। पहला युद्ध सल्जूक़ियों और हसन बन्ना के समर्थकों के बीच हुआ था। दूसरा युद्ध हलाकू ख़ान और क़िले के रक्षकों के बीच हुआ। बाद में हलाकू ख़ान के सैनिकों ने अरज़ंग क़िले पर नियंत्रण करके उसे नष्ट कर दिया। तालेक़ान की पर्वतीय चोटियों पर एक अन्य किला है “क़िलए दुख़तर”। प्राचीनकाल में तालेक़ान नगर की यहां से सुरक्षा की जाती थी। यह छोटा एवं सुन्दर क़िला तालेक़ान नगर की स्ट्रैटेजिक स्थिति को दर्शाता है।
तालेक़ान में ही पर्वत श्रंखला पर एक अन्य क़िला स्थित है जिसका नाम है, कीक़बाद क़िला। यह बहुत ही सुन्दर है। इसे पहाड़ के पत्थरों को तराश कर बनाया गया है।

अलबुर्ज़ पर्वत श्रंखला में स्थित अलबुर्ज़ प्रांत में नज़राबाद नाम का एक क्षेत्र भी है। उपयुक्त जलवायु के कारण यहां पर शताब्दियों से जीवन व्यतीत किया जा रहा है। कहा जाता है कि ईसा पूर्व कई शताब्दियों से लोग यहां पर जीवन व्यतीत करते आए हैं। इस क्षेत्र में ईसापूर्व के बहुत से टीले मौजूद हैं। इस स्थान से मिलने वाली चीज़ों से पता चलता है कि यह क्षेत्र, शताब्दियों पूर्व मानव सभ्यता का केन्द्र रह चुका है। इस क्षेत्र के एतिहासिक महत्व के कारण कार्यक्रम के अन्तिम भाग को हमने इसी से विशेष किया है।
पुरातत्व विदों का कहना है कि राजधानी तेहरान से 73 किलोमीटर दूरी पर नज़राबाद नगर में स्थित उज़बेकी टीला, बहुत ही प्राचीन है। यहां पर किये गए शोध के अनुसार इसका क्षेत्रफल 100 हेक्टेयर है। यहां पर कुछ छोटे-छोटे टीले हैं जिनमें से छह टीलों की 1377 से 1384 हिजरी शमसी के बीच खुदाई की गई। यहां पर खुदाई के दौरान मानव निर्मित 9000 वर्ष पुरानी कच्ची ईंटें मिली हैं। उनमें से कुछ को संयुक्त राष्ट्रसंघ के संग्रहालय में रखा गया है। यहां के लोगों ने ईसा पूर्व सीमेंट जैसे पदार्थ का पता लगाया था। यहां पर पाए जाने वाले प्रमाणों से ज्ञात होता है कि 4000 वर्ष ईसापूर्व यहां के लोगों का प्राचीन शूश के साथ व्यापारिक संपर्क था।