ख़ुरासाने शुमाली
सन् 2004 में ईरानी सरकार ने ख़ुरासान प्रांत को तीन प्रांतों में विभाजित कर दिया जिसमें से एक ख़ुरासाने शुमाली प्रांत है।
इस प्रांत का क्षेत्रफल लगभग 28000 वर्ग किलो मीटर है जिसमें आठ ज़िले हैं और इसका केन्द्र बुजनोर्द है।
ख़ुरासाने शुमाली प्रांत उत्तर में तुर्कमेनिस्तान, पूरब और दक्षिण में ख़ुरासाने रिज़वी, दक्षिण पश्चिम में सिमनान प्रांत और पश्चिम में गुलिस्तान प्रांत से घिरा हुआ है। इस प्रांत और ख़ुरासाने रिज़वी और ख़ुरासाने जुनूबी प्रांतों का इतिहास संयुक्त है। इसका इतिहास जाजर्म इलाक़े में आये के निवास जितना पुराना है। ख़ुरासान हख़ामेनशी काल के राज्य के अंतर्गत माना जाता था। यह क्षेत्र अश्कानियान काल में एक महत्वपूर्ण इलाक़ा माना जाता था। इतिहास में इस इलाक़े से मुग़ल, तुर्क, उज़बेक, तुर्कमन और तातार जैसे समुदायों का शासन रहा है और विभिन्न समुदाय यहां से होकर गुज़रे हैं। सासानियान शासनकाल में खुरासाने शुमाली पर पादगूसियान सेनापति का शासन था और उसके अधीन चार लोग ख़ुरासान के चार भागों पर शासन करते थे। 31 हिजरी क़मरी में अरबों ने ख़ुरासान में प्रवेश किया और इसी काल में यहां के निवासियों ने इस्लाम स्वीकार किया। 205 हिजरी तक इस पर बनी अब्बास शासन का क़ब्ज़ा था। इस्लामी काल में ख़ुरासान चार भागों में बंटा हुआ था और हर भाग चार बड़े शहरों नीशापुर, मर्व, हरात और बल्ख़ के नाम से जाना जाता था।
ताहेरियान ने 283 हिजरी में इस इलाक़े को स्वाधीनता प्रदान की और उसके बाद से सामानियान, ग़ज़नवियान और ख़्वारेज़्मशाहियान शासन श्रंखलाओं ने यहां पर शासन किया यहां तक कि सातवीं हिजरी में मुग़लों के हमलों के परिणाम स्वरूप यहां इलख़ानान मुग़ल के अधीन हो गया। क़ाजारी शासनकाल में ब्रिटिश के हस्तक्षेप से 1273 हिजरी में ईरान ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जिसके अन्तर्गत वह कटिबद्ध हुआ कि अफ़ग़ानिस्तान के आंतरिक मामलों में दख़ल नहीं देगा। इसी काल में ख़ुरासान पूर्वी एवं पश्चिमी भागों में बंट गया। पूर्वी भाग अफ़ग़ानिस्तान के अधीन हो गया और पश्चिमी भाग ईरान में ही शामिल रहा।
ख़ुरासाने शुमाली प्रांत एक पहाड़ी इलाक़ा है जो समुद्र की सतह से 1326 मीटर ऊंचाई पर स्थित है। इस प्रांत की ज़मीन उपजाऊ है। यह प्रांत उत्तर में कुप्पे दाग़ पर्वत श्रंखला और दक्षिण में शाह जहान पर्वत श्रंखला से घिरा हुआ है। आलादाग़ पर्वतीय श्रंखला में 3051 मीटर ऊंची चोटी ‘शाह जहान’ प्रांत का सबसे ऊंचा स्थान है। ताज़ायाब गांव, समुद्र की सतह से 400 मीटर नीचे स्थित है कि जो प्रांत का सबसे नीचा स्थान है।
पर्वतीय क्षेत्र, जंगल, विशालकाय चरागाहें एवं व्यापक जल स्रोतों के कारण ख़ुरासाने शुमाली प्रांत की जलवायु विविधतापूर्ण है। इस प्रांत के विभिन्न क्षेत्रों की जलवायु अलग अलग है। आलादाग़ और कुप्पे दाग़ के ऊंचे इलाक़े ठंडे हैं लेकिन प्रांत के दक्षिणी इलाक़ों की जलवायु संतुलित है। कुल मिलाकर ख़ुरासाने शुमाली प्रांत की जलवायु संतुलित है। प्रांत की एकमात्र स्थायी नदी अतरक नदी है।
ख़ुरासाने शुमाली प्रांत की जलवायु एवं इस प्रांत की भोगौलिक स्थिति के कारण कृषि एवं पशुपालन के लिए यहां परिस्थितियां अनुकूल हैं। ओतरक नदी एवं विशाल जल स्रोत कृषि और पशुपालन के अन्य प्रमुख कारक हैं। कृषि इस प्रांत का मुख्य आर्थिक स्रोत माना जाता है। कृषि क्षेत्र में पारम्परिक एवं आधुनिक दोनों शैलियां प्रचलित हैं। कृषि उत्पादनों में कपास, गेंहू, जौ, दालों और सब्ज़ियों का नाम लिया जा सकता है और बाग़ों के उत्पादन में चैरी, अंगूर, ख़ूबानी एवं सेब का नाम लिया जा सकता है। विशाल चरागाहों के कारण यहां पशुपालन का प्रचलन अधिक है। पशुपालन के अलावा, मधु मख्खियों एवं रेशम के कीड़ों के पालन का भी चलन है। इस प्रांत के लोगों की गतिविधियां केवल कृषि एवं पशुपालन से ही विशेष नहीं हैं। यहां पैट्रो कैमिकल, सीमेंट, प्लास्टिक एवं अन्य उद्योगों में भी रोज़गार के काफ़ी अवसर हैं। आपके लिए यह जानना भी उचित होगा कि इस प्रांत में हैंडीक्राफ़्ट का भी प्रचलन है। हैंडीक्राफ़्ट में विभिन्न प्रकार के क़ालीन, दरियों और चटाईयों का नाम लिया जा सकता है।
ख़ुरासाने शुमाली प्रांत की महत्वपूर्ण विशेषता उसकी विविध संस्कृति एवं समुदाय हैं। ईरान का यह भाग प्राचीन समय में पूरब को पश्चिम से जोड़ने वाला एकमात्र मार्ग था। प्रांत के दक्षिण में सिल्क रोड के कारण विभिन्न समुदाय यहां आते थे। यही कारण है कि इस प्रांत के लोग विभिन्न लहजों और भाषाओं में बात करते हैं। यहां के निवासियों में अधिकांश कुरमांज, तुर्क, तुर्कमन, बलूच और फ़ार्सी हैं कि जिन्हें तात भी कहा जाता है। ख़ुरासाने शुमाली के मूल निवासियों की फ़ार्सी भाषा ताती कहलाती है। शाह इस्माईल और शाह अब्बास के काल में पश्चिमी ईरान से तुर्क भाषी लोगों के प्रवास से यहां कुरमांजी एवं तुर्की भाषा का भी प्रचलन हुआ। भाषा का यह अंतर धर्म एवं संस्कृति में भी देखा जा सकता है। इसलिए यद्यपि खुरासाने शुमाली विशाल ख़ुरासान का एक छोटा सा भाग है, लेकिन संस्कृति की विविधता ने इसे समृद्ध इलाक़े में परिवर्तित कर दिया है।
कुर्द, तुर्क, तुर्कमन, तात और बलूच समुदायों की हस्तकला के कारण ख़ुरासाने शुमाली की दस्तकारी में एक ख़ास बारीकी पायी जाती है। इस विशेष कला के कारण इस इलाक़े की दस्तकारी को बहुत लोकप्रियता हासिल है।
हरी भरी चरागाहों के कारण पशुपालन के परिणाम स्वरूप दस्तकारी के लिए कच्चा माल जैसे कि रूई, धागा, खाल आदि सस्ते दामों पर उलब्ध होती है। यही कारण है कि यहां के रंग बिरंगे और सुन्दर उत्पादन देखने योग्य होते हैं।
इस इलाक़े में प्रयोग होने वाले डिज़ाईन की जड़ें यहां के लोगों की आस्या में पायी जाती हैं। प्राकृति एवं आम जीवन से लिए गए डिज़ाईनों की झलक हैंडीक्राफ़्ट उत्पादों में देखी जा सकती है।
कुर्दी वस्त्र, स्थानीय तुर्कमन वस्त्र, पारम्परिक एम्ब्रोयडरी और पारम्परिक गहने अन्य हैंडिक्राफ़्ट उत्पादों में से हैं कि जो विभिन्न समुदायों द्वारा विभिन्न शैलियों से बनाए जाते हैं।
ख़ुरासाने शुमाली की अन्य हस्तकलाओं में हाथ से बुनी जाने वाली जूतियों का नाम लिया जा सकता है कि जो खाल से बनाई जाती हैं, इन्हें पहनने के बाद बड़े से तस्में को मज़बूती से पिंडलियों पर लपेटा जाता है।
यह कला बिजनौर्द, क़ूचान और दरगज़ में प्रचलित है। प्लास, ख़ुरासाने शुमाली में प्रचलित एक अन्य हस्तकला है। यह एक प्रकार की दरी होती है कि जिसे प्राचीन काल से ही नमी, सर्दी और गर्मी से बचने के लिए प्रयोग किया जाता रहा है। इसे जनजातियों के लोग तम्बुओं में और गांवों के लोग घरों में बिछाने के लिए प्रयोग करते हैं।
प्लास ईरान के अन्य क्षेत्रों में बुनी जाती है लेकिन इस प्रांत में इसे विशेष कला द्वारा बुना जाता है। ख़ुरासाने शुमाली के अन्य उत्पादों में शकरपनीर का नाम लिया जा सकता है कि जो इस इलाक़े का प्रसिद्ध उपहार है।
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