बुजनूर्द
ख़ोरासाने शोमाली प्रांत का केन्द्रीय नगर बुजनूर्द, राजधानी तेहरान से 821 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
यह नगर पूर्वोत्तरी ईरान में पर्वत श्रंखला के बीच स्थित है। भौगोलिक दृषटि से यह नगर दक्षिण में कप्पेदाग़ नामक पर्वत श्रंखला, पूर्व में अलओदाग़ तथा उत्तर में अलबोर्ज़ नामक पर्वत श्रंखलाओं के बीच में स्थित है। समुद्र तल से बुजनूर्द नगर की उंचाई 1070 मीटर है। प्राचीन पुस्तकों में बुजनूर्द का नाम “बूज़नजूर्द” बताया गया है। बूज़नजूर्द वास्तव में अरबी का शब्द है जो फ़र्सी भाषा “बीज़नगेर्द” से लिया गया है। समय व्यतीत होने के साथ-साथ यह शब्द, बुजनूर्द में बदल गया।
बुज़नूर का अर्थ होता है बीज़न का नगर जबकि गेर्द का अर्थ होता है नगर। वर्तमान बुज़नूर्द नगर के पश्चिमोत्तर में एक प्राचीन टीला है जिसपर इस नगर के बहुत से प्राचीन अवशेष पाए जाते हैं। इस टीले को बीज़नयोरत के नाम से जाना जाता था।
बुजनूर्द या बीज़नगेर्द बहुत प्राचीन नगर है जिसका इतिहास सासानी काल से भी पुराना है। इस्लाम के उदय के बाद बुजनूर्द, बहुत से महापुरूषों, ज्ञानियों, विचारकों और तत्वदर्शियों की मातृभूमि रही है। यहां पर बहुत से इमामज़ादों अर्थात पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों ने भी जीवन व्यतीत किया है। उल्लेखनीय है कि बुजनूर्द नगर के इर्दगिर्द पाए जाने वाले ठंडे क्षेत्रों ने इस क्षेत्र को पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बना दिया है।
ख़ुरासाने शोमाली में कम से कम 606 एतिहासिक धरोहरें हैं जिनमें बिलक़ीस नगर, शीशे का घर, स्पाख़ू अग्निकुंड, जलालुद्दीन जाजर्म क़िला और अर्ग टीला आदि जैसी धरोहरों का उल्लेख किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त ख़ुरासाने शोमाली में बहुत से पवित्र स्थल भी पाए जाते हैं। खोरासाने शोमाली प्रांत में सुल्तान सैयद अब्बास, ख़्वाजा अली इब्ने महज़ियार, इमामज़ादे हम्ज़ा और अहमद बिन मूसा आदि के मक़बरे मौजूद हैं। कार्यक्रम के इस भाग में हम यहां की कुछ एतिहासिक धरोहरों का उल्लेख करेंगे।
बुजनूर्द नगर में स्पाख़ू नामक पत्थर की इमारत है जिसका ईरान की राष्ट्रीय धरोहरों की सूचि में पंजीकरण किया जा चुका है। यह स्वयं में विशेष प्रकार की इमारत है। यह इमारत सासानी काल से संबन्धित है। इसमें “मलात सारूज” नामक मसाले का प्रयोग किया गया है जिसका प्रयोग प्राचीनकाल की ईरानी इमारतों में प्रचुरता से मिलता है। पत्थर से बनी इस इमारत में पूर्व की दिशा में एक हाल, तथा कई कमरे हैं। कहा जाता है कि स्पाख़ू नामक यह इमारत एक समय में अग्निकुंड थी। यह अग्निकुंड, बुज़नूर्द से 100 किलोमीटर की दूरी पर बुज़नुर्द मार्ग पर गुलिस्तान प्रांत में स्थित है।

बुजनूर्द नगर की एतिहासिक एवं ख्याति प्राप्त इमारतों में से एक का नाम “आईने ख़ाने मुफ़ख़्ख़म” है। यह बहुत ही भव्य एवं शानदार इमारत है। इस इमारत का संबन्ध, क़ाजारिया शासन काल के अंतिम काल के एक शासक यार मुहम्मद ख़ान शादलू से बताया जाता है। इस इमारत को बहुत ही अच्छे ढंग से सजाया गया है।
इमारत को सन 1300 हिजरी क़मरी के आरंभ में सरदार मुफ़ख़्ख़म के आदेश पर बनाया गया था। इसको उन्होंने अपने रहने के लिए बनवाया था। “आईने ख़ाने मुफ़ख़्ख़म” में 34 कमरे हैं जिमनें 2 बड़े हाल भी सम्मिलित हैं। इस इमारत का मुख्य भाग दक्षिण की दिशा में है। इसमे बहुत ही सुन्दर ढंग से टाइलों का प्रयोग किया गया है। इस पर सफ़ेद, पीले, हरे, लाल, काले और फ़िरोज़ी रंग की टाइलों का प्रयोग किया गया है। इमारत के बाहरी भाग पर परियों, मनुष्य के चेहरों, तथा फूलों, फलों एवं वनस्पतियों के चित्र अंकित हैं। इमारत के हर माले पर दो हाल हैं।
बुजनूर्द नगर की ऐतिहासिक इमारतों में से एक, जाजर्मी नामक इमाम बाड़ा है। यह इमामबाड़ा, क़ाजार शासनकाल के अन्तिम समय से संबन्धित है। इस पर लगे हुए शिलालेख से पता चलता है कि इमामबाड़े का निर्माण, सन 1325 हिजरी क़मरी में कराया गया था। ईरान की पारंपरिक वास्तुकला शैली का यह एक अदभुत नमूना है। यह वास्तुकला की ऐसी शैली है जिसमें इमारत के दरवाज़ों, खिड़कियों और रौशनदानों के कपाट इमारत के अंदर की ओर खुलते हैं। इस प्रकार की वास्तुकला का प्रयोग सामान्यतः सूखे और मरूस्थलीय क्षेत्रों में किया जाता है। यह वास्तुकला शैली बुजनूर्द में प्रचलित नहीं है। इमामबाड़ा 600 मीटर वर्गमीटर में बना हुआ है।
स्फ़राएन नगर में एक एतिहासिक इमारत है “कोहनदज़ बिलक़ीस”। इस इमारत को ईरान में “अरकेबम” के बाद कच्ची मिट्टी की ईंटों से बनी दूसरी नंबर की इमारत माना जाता है। यह इमारत, रेशम मार्ग के किनारे बहुत लंबे समय से मौजूद है। यह नगर इसफ़ारायेन नगर से तीन किलोमीटर दक्षिण पूर्व में स्थित है। इसकी गणना ख़ुरासाने शुमाली के प्राचीन एतिहासिक धरोहरों में होती है।

इन नगर से प्राप्त मिट्टी के बर्तनों से पता चलता है कि इसका संबन्ध सफवी काल से है। एसा लगता है कि इस नगर का निर्माण सफवी काल से भी पहले किया गया था। बिल्क़ीस नगर को सासानी वास्तुकला के नियमों के आधार पर बनाया गया है। इसपर विभिन्न आकारों की 29 बुर्जियां बनी हुई हैं।
जैसाकि हमने पिछले कार्यक्रम में संकेत किया था कि ख़ुरासाने शुमाली प्रांत में प्राकृतिक विविधता पाई जाती है। यहां के प्राकृतिक दृश्यों में घने जंगल, राष्ट्रीय पार्क, सुरक्षित वन्य क्षेत्र और पशु-पक्षियों के लिए सुरक्षित क्षेत्रों का नाम लिया जा सकता है।
इस प्रांत में क़ूरख़ुद नामक सुरक्षित वनक्षेत्र है। यह क्षेत्र ख़ज़र के जंगलों के पूर्वी छोर पर स्थित है। यहां पर भांति-भांति की वनस्पतियां उगती हैं जिसके कारण यहां पर नाना प्रकार के पशु-पक्षी पाए जाते हैं। सन 1361 हिजरी क़मरी में इसे गुलिस्तान के राष्ट्रीय पार्क से अलग कर दिया गया था। अब यह एक सुरक्षित वन क्षेत्र के रूप में है जो ख़ुरासाने शोमाली का भूभाग है। क़ूरख़ूद का क्षेत्रफल 43000 हेक्टेयर है। 1000 से 2700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र का तापमान सामान्यतः 9 सेंटीग्रेट के आसपास रहता है। यहां पर प्रतिवर्ष 660 मिलीमीटर वर्षा होती है जिसके कारण यहां पर काफ़ी आद्रता पाई जाती है। क्योंकि यह क्षेत्र ऊंचाई पर स्थित है अतः यहां पर बड़े-बड़े हिमनद, बड़ी-बड़ी चट्टानें, घाटियां, झरने, हरे-भरे जंगल, विस्तृत चरागाहें, छोटी-बड़ी गुफ़ाएं और इसी प्रकार बहुत सी चीज़ें हर आगंतुक को अपनी ओर आकृष्ट करती हैं।