Apr २६, २०१६ १०:५८ Asia/Kolkata

तुरबत हैदरिए ज़िला, पूरब में ताइबाद, तुरबत जाम और रश्तख़्वार, पश्चिम में काश्मर और उत्तर में मशहद, निशापुर और फ़रीमान और दक्षिण में मेह वेलात ज़िलों से घिरा हुआ।


तुरबत हैदरिए ज़िले का इतिहास इस्लाम पूर्व अश्कानियान काल से जाकर मिलता है। उस समय इसे ज़ावे का नाम से जाना जाता था। छठी हिजरी शताब्दी में आरिफ़ नामी के निधन के बाद, क़ुतुबुद्दीन हैदर ने इसका नाम परिवर्तित कर दिया। शहर के आबाद होने का इतिहास सफ़वी काल से शुरू होता है। इस शहर का विकास 200 वर्ष पूर्व इसहाक़ ख़ान क़राई के शासनकाल से शुरू हुआ।

 

 

इसहाक़ ख़ान ने इस शहर में महत्वपूर्ण विकास कार्य करवाए और शहर में इतना परिवर्तन किया कि यह शहर काफ़ी समय तक तुरबत इसहाक़ ख़ान के नाम से मशहूर रहा। ईरान की दो समकालीन क्रांतियों यानी 1906 में प्रतिबद्धता क्रांति और 1979 में इस्लामी क्रांति में तुरबत हैदरिए शहर अत्याचार के ख़िलाफ़ अग्रिम पंक्ति में रहा है। तुरबत हैदरिए मशहद के दक्षिण में 140 किलोमीटर और तेहरान से 1005 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इस शहर का क्षेत्रफल 53 वर्ग किलोमीटर है और यह समुद्र की सतह से 1333 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

तुरबत हैदरिए ज़िले में प्रतिवर्ष लगभग 150 टन केसर का उत्पादन होता है और इस प्रकार यह विश्व का सबसे अधिक केसर उत्पादन करने वाला ज़िला है और ख़ुरासान में यहां सबसे अधिक पिस्ता पैदा होता है। प्रांत की अर्थव्यवस्था में इस ज़िले की विशेष भूमिका है। इलाक़े में केसर और पिस्ते के उत्पादन के कारण उससे संबंधित उद्योग की भी यहां स्थापना हुई है। इस ज़िले में 98 कारख़ाने और 19 सक्रिय खानें हैं।

 

 

तुरबत हैदरिए ज़िले का एक दूसरा शहर बायग है कि जो ईरान में रेशम का केन्द्र है, यहां ईरान के कुल रेशम का 80 फ़ीसद रेशम होता है। इस इलक़े के अन्य कृषि उत्पादों में से ख़रबूज़ा और बादाम का नाम लिया जा सकता है। इसी प्रकार, तुरबत हैदरिए में ज़रमेहर सोने की कान है कि जो ज़रमेहर गांव में स्थित है। देश में सोने की सलाख़ों के उत्पादन में यह पहले नम्बर पर है, कि जिन्हें तेहरान के शेयर बाज़ार में बेचा और ख़रीदा जाता है।

समृद्ध सिलिका खानों के कारण तुरबत हैदरिए ज़िला ख़ुरासाने रिज़वी प्रांत में खानों का केन्द्र माना जाता है।

ख़ुरासान रिज़वी प्रांत ईरान के सुन्दर इलाक़ों में से एक है। प्रतिवर्ष लाखों लोग देश और विदेश से यहां की यात्रा करते हैं। तीर्थयात्री इस प्रांत के पवित्र शहर मशहद में इमाम अली रज़ा (अ) के मज़ार की ज़ियारत करते हैं और पर्यटन यहां के सुन्दर और ऐतिहासिक दृश्यों का आनंद लेते हैं। इस प्रांत का एक बेहतरीन उपहार केसर है। यहां का केसर विश्व भर में प्रसिद्ध है।

 

 

केसर को स्वादिष्ट और अच्छे रंग वाले मसालों में गिना जाता है और ईरानी खानों में इसका विशेष स्थान है। केसर का फूल ग्लेडियोलस पौधों के परिवार से एक फूल होता है। केसर का पौधा सुगंध देनेवाला बहुवर्षीय होता है और इसका वानस्पतिक नाम क्रोकस सैटाइवस है। अंग्रेज़ी में इसे सैफ़रन और फ़ार्सी और उर्दू में ज़ाफ़रान के नाम से जाना जाता है। यह इरिडेसी कुल की क्षुद्र वनस्पति है। इसकी खेती विशेष वातावरण और परिस्थितियों में होती है। केसर की विभिन्न प्रजातियां होती हैं और अधिकांश प्रजातियां जंगली होती हैं, जिनका खाद्य पदार्थों में प्रयोग नहीं होता है। ईरान विशेष रूप से ख़ुरासाने रिज़वी प्रांत में उगाई जाने वाली प्रजाती वही है कि जिसका खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होता है।

यह जानना उचित होगा कि केसर को खानों के अलावा दवाईयों में भी इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन इसकी लोकप्रियता का कारण खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल है। यह भोजन को विशेष रंग और स्वाद प्रदान करता है।

यहां यह बताना उचित होगा कि ईरान के अलावा यह विश्व भर अनेक देशों में खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होता है। ईरान बड़ी मात्रा में केसर जर्मनी, इटली, कनाडा, भारत, लक्समबर्ग, जापान, ब्रिटेन और फ़ार्सी की खाड़ी के अरब देशों को निर्यात करता है।

 

 

तुरबत हैदरिए में प्रतिवर्ष 150 टन सूखे केसर का उत्पादन होता है और इस प्रकार यह दुनिया में सबसे अधिक केसर पैदा करने वाला इलाक़ा है। ईरान में 150 से 170 टन केसर का उत्पादन होता है और इस प्रकार यह दुनिया में सबसे अधिक केसर पैदा करने वाला देश है। तुरबत हैदरिए ज़िले में दुनिया का 90 फ़ीसद केसर पैदा होता है।

 

तुरबत हैदरिए ज़िले में अनेक ऐतिहासिक धरोहर हैं, इनमें से एक अबू सईद अबुल ख़ैर का मक़बरा है। यह क़ाजारी शासनकाल से संबंधित है। इसे ईरान की राष्ट्रीय धरोहर की सूची में शामिल कर लिया गया है। अबू सईद फ़ज़्लुल्लाह बिन अबुल ख़ैर चौथी और पांचवी हिजरी शताब्दी के प्रसिद्ध ईरानी कवि हैं। रहस्यवादियों और सूफ़ियों के बीच उनका एक विशेष स्थान है। फ़ार्सी शायरी में उनका नाम मौलवी और ख़य्याम के साथ लिया जाता है। हालांकि उन्होंने बहुत अधिक शेर नहीं कहे हैं। रहस्यवाद के इतिहास में अबू सईद को हल्लाज, बायज़ीद बस्तामी और अबुल हसन ख़रक़ानी के बराबर माना जाता है। यह वही हस्तियां हैं कि जिन्हें सहरवर्दी ने प्राचीन दर्शन शास्त्र को आगे बढ़ाने वाला कहा है।

 

छठी हिजरी शताब्दी काल के क़ुतुबुद्दीन हैदर आरिफ़ का मक़बरा भी तुरबत हैदरिए शहर में स्थित है और यह सफ़वी काल की विरासत है। इस मक़बरे की इमारत में ऊंचा ब्रामदा और गुंबद के नीचे का हाल और प्रवेश द्वार हैं। इसके बाहरी भाग में क्रॉस के रूप में नक़्क़ाशी है। शेख़ की क़ब्र गुंबद के नीचे स्थित है और उस पर बनी हुई ज़रीह पर 987 हिजरी क़मरी की तारीख़ लिखी हुई है। अनेक बार इस ऐतिहासिक इमारत का पुनर्निमाण हो चुका है।

 

तुरबत हैदरिए ज़िले की भोगौलिक स्थिति के कारण यहां प्राकृतिक सुन्दर दृश्य हैं। तुरबत हैदरिए के उत्तर में कामे उलिया उद्यान और हिसार और सनूबर नदियां इस ज़िले के प्राकृतिक सुन्दर इलाक़े हैं। शहर के देखने योग्य इलाक़ों में से मिल्ली पार्क और जंगली पार्क पीशकोह का नाम लिया जा सकता है।

तुरबत हैदरिए ज़िले के पूरब में एक ऐसा इलाक़ा स्थित है कि जहां शिकार पर प्रतिबंध है। इन मैदानी इलाक़ों में कहीं कहीं पत्थर के सुन्दर ऊंचे टीले हैं कि जो जानवरों के रहने के लिए उचित स्थान हैं। इन इलाक़ों में मेढ़े, भेड़, तीतर और बाज़ जैसे जानवर एवं परिंदे पाये जाते हैं।

 

 

तुरबत हैदरिए के दक्षिण पश्चिम में पहाड़ी पार्क पीशकोह 800 हेक्टेयर भूमि में स्थित है।

 

इस पार्क में प्राकृतिक सुन्दर दृश्यों के अलावा, स्वीमिंग पूल, झरना, टीले, रेस्टोरैंट, बच्चों के खेलने के लिए विशेष स्थान इत्यादि हैं। इस पार्क में तीर्थयात्रियों और यात्रियों के आराम के लिए एक सामिन कैम्प भी स्थित है। (MSM)

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