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फ़िलिस्तीन पर क़ब्ज़ा करने वाले अमेरिकी विश्वविद्यालयों से उठने वाली विरोध की आवाज़ से क्यों डरते हैं?
Apr २८, २०२४ ०६:१५पार्सटुडेः क्षेत्रीय समाचार पत्र रायलयूम के संपादक और अरब जगत के जाने-माने विश्लेषक "अब्दुल बारी अतवान" ने अपने नए लेख में अमेरिकी विश्वविद्यालयों में बड़े पैमाने पर इस्राईल के ख़िलाफ़ होने वाले विरोध प्रदर्शनों के विषय पर ध्यान दिलाया है।
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अमेरिकी छात्रों का फ़िलिस्तीन के समर्थन में विरोध प्रदर्शन, 6 महत्वपूर्ण बिंदु+ तस्वीरें
Apr २७, २०२४ १५:१२पार्सटुडेः इन दिनों अमेरिकी विश्वविद्यालय ग़ज़्ज़ा पट्टी में इस्राईल के नरसंहार के ख़िलाफ़ छात्रों के विरोध प्रदर्शन का केंद्र बने हुए हैं। अमेरिकी छात्रों ने निलंबन, गिरफ़्तारी और उन्हें नौकरी से वंचित किए जाने जैसी बहुत सारी धमकियों के बावजूद यह विरोध प्रदर्शन शुरू किया है।
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अमेरिकी सैन्य उद्योगों से जुड़े बिजनेसमैन जंगों को ख़त्म नहीं होने देते! जीत के बदलते मायने
Apr २७, २०२४ १४:००पार्सटुडेः वियतनाम युद्ध के बीच में तत्कालीन अमेरिकी सरकार के प्रवक्ता हेनरी किसिंजर ने कहा था कि "सेना, अपने पारंपरिक अर्थ में, तभी जीतती है जब वह युद्ध जीतती है। अन्यथा, वह हमेशा हारी हुई है। लेकिन इसके विपरीत, पार्टिज़न (partisan) अर्थात छापेमार या गुरिल्ला तभी हारते हैं जब वे युद्ध छोड़ देते हैं, नहीं तो इसके अलावा वह हमेशा विजयी रहते हैं।
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फ़िलिस्तीनियों के नरसंहार को कैसे सही ठहराया जाए? 14 तस्वीरें जो आपको बताएंगी सच्चाई
Apr २६, २०२४ १५:३१पार्सटुडेः अमेरिका में रहने वाले "नोरा लेस्टर मुराद" और "मरियम असवाद" नाम के 2 सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 14 चरणों में फ़िलिस्तीनी नरसंहार को सही ठहराने का तरीक़ा बताया है।
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इस्राईलः अमेरिका की एक ख़तरनाक और भयावह योजना
Apr २६, २०२४ १४:३७पार्सटुडेः सत्तर के दशक के बाद दुनिया में एक नक़ली शासन के रूप में इस्राईल के फलने-फूलने में संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे बड़ा हाथ रहा है।
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जापान के लोगों पर परमाणु बमबारी और ग़ज़्ज़ा की जनता पर बमबारी की प्रशंसा करना एक ख़तरनाक सोच
Apr २६, २०२४ १२:०८पार्स टुडेः सैन फ्रांसिस्को विश्वविद्यालय के एक प्रोफेसर ने फ़िलिस्तीन की आज़ादी के लिए जारी आंदोलन की तुलना जापानी साम्राज्यवाद से करने की आलोचना करते हुए ग़ाज़्ज़ा में परमाणु बम के इस्तेमाल की धमकी की कड़ी आलोचना की है।
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अफ़्रीक़ा के साहेल इलाक़े के देशों में प्रतिरोध का उभार, नई विश्व व्यवस्था की निशानी है
Apr २४, २०२४ ०७:४४अफ़्रीक़ा में साहेल इलाक़े के ताज़ा घटनाक्रमों से पता चलता है कि अफ़्रीक़ी महाद्वीप में पश्चिमी देशों की पकड़ ढीली पड़ती जा रही है और रूस, ईरान और चीन के प्रभाव में वृद्धि हो रही है, जो नई विश्व व्यवस्था की निशानी है।
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पश्चिमी हस्तक्षेप के बिना कैसा होगा ईरान और इस्राईल के बीच युद्ध?
Apr २३, २०२४ १४:००पार्सटुडेः इस्राईल के ख़िलाफ़ ईरान के जवाब हमले की समाप्ति के बाद सैन्य विश्लेषकों ने इस युद्ध के आयामों और उसके नतीजों पर रोशनी डाली है।
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ईरान की नौसैनिक शक्ति से विश्व के स्वतंत्र देशों को लाभ होने से पश्चिम में भय व्याप्त
Apr २२, २०२४ १५:२४तेहरान अब पश्चिम के वर्चस्ववादी मोर्चे को भारी नुक़सान पहुंचाने की स्थति में आ चुका है।
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यूक्रेन में ज़ाहिर हुई अमरीकी हथियारों की कमज़ोरी, अमरीका के M1 Abrams टैंको पर भारी पड़े ड्रोन
Apr २२, २०२४ १४:०८अमरीका के मंहगे और भारी-भरकम टैंकों को ध्वस्त करते ड्रोन