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दो सैनिक अफ़सरों की हत्या के बाद इराक़ भी तुर्की के दुशमनों की सूचि में शामिल, हर किसी को डंक क्यों मार रही है अंकारा सरकार?
Aug १३, २०२० ०६:५३इराक़ी कुर्दिस्तान के इलाक़े अरबील के उत्तर में सैनिक ठिकाने पर तुर्की के ड्रोन विमान ने हमला कर दिया जिसमें दो इराक़ी सैनिक अफ़सर मारे गए। इस घटना ने साबित किया कि तुर्की की इन शत्रुतापूर्ण हरकतों के कारण इस देश का कोई भी पड़ोसी अरब देश अब दोस्त नहीं रह गया है।
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आर्थिक संकट से जूझ रहे ब्रिटेन में 4 महीने में 7 लाख 30 हज़ार लोगों की नौकरियां गयीं
Aug १२, २०२० ०८:५७कोरोना महामारी की वजह से ब्रिटेन में मार्च से लेकर जुलाई तक 7 लाख से अधिक लोग नौकरियों से वंचित हो गये जिसकी वजह से कम उम्र और बूढ़े कर्मचारी वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं।
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बैरूत के दक्षिणी भाग में शीया, पश्चिमी भाग में सुन्नी और पूर्वी भाग में ईसाई बसते हैं, सुन्नी बाहुल इलाक़े में धमाके के राजनैतिक परिणाम निकलेंगे!
Aug ०५, २०२० १५:४८पश्चिमी एशिया के मामलों के विशेषज्ञ सअदुल्लाह ज़ारेई ने बैरूत धमाके के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धमाका बैरूत के उस इलाक़े में हुआ है जिसे लेबनानी अर्थ व्यवस्था की नब्ज़ कहा जाता है।
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वीडियो रिपोर्टः दुनिया का वह शहर आज किसी क़ब्रिस्तान से कम नहीं जहां रातो-दिन लाखों की संख्या में पयर्टक दिखाई देते थे!
Jul २९, २०२० १६:०२स्विट्ज़रलैंड की भी स्थिति अपने पड़ोसी देशों की तरह अच्छी नहीं है,केवल पिछले तीन दिनों के भीतर कोरोना के 500 नए संक्रमितों की पहचान की गई है।स्विट्ज़रलैंड के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एलान किया है कि, नए संक्रमित होने वालों में एक चौथाई लोग ऐसे हैं जो स्विट्ज़रलैंड से बाहर संक्रमित हुए हैं, इसलिए देश वापस लौटने वाले यात्री वापसी के 5 से 7 दिनों बाद कोरोना का टेस्ट दोबारा ज़रूर करवाएं। सीमाओं के बंद होने,उड़ानों के रद्द होने और यात्रा से वापसी के बाद दो सप्ताह तक कोरंटाइन,यह सब ऐसी वजह है जिसने...
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एक नज़र अमरीका के भीतर डालिए और ऊपर की चमकीली परत को ज़रा हटाकर देखिए तो जो तसवीर नज़र आएगी वह आपको हैरान कर देगी!
Jul २१, २०२० ०४:५३रायुल यौम ने वरिष्ठ लेखक और वित्तीय व ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ डाक्टर अब्दुल हैय ज़लूम का एक लेख प्रकाशित किया है जिसमें लेखक ने अमरीकी करेंसी डालर की स्थिति की समीक्षा करते हुए लिखा है कि पहले हर देश की करेंसी सोने के भंडार की मात्रा से जुड़ी होती थी मगर अमरीका ने इस अंतर्राष्ट्रीय सहमति से ख़ुद को एकपक्षीय रूप से अलग कर लिया और बग़ैर कवर के डालर के नोट छापना शुरू कर दिए।
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पहले से चरमरा रही अमरीकी अर्थ व्यवस्था पर हथौड़े बरसा रहा है कोरोना वायरस, सारे अनुमान बदलते जा रहे हैं!
Jul १८, २०२० १४:०३अंतर्राष्ट्रीय मानीटरी फंड आईएमएफ़ के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि अमरीका की जीडीपी में 2020 में 6.6 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है क्योंकि कोरोना वायरस की महामारी के कारण अमरीकी अर्थ व्यवस्था को बहुत गंभीर रूप से नुक़सान पहुंच गया है मगर अब विशेषज्ञों का कहना है कि हालात उससे कहीं ज़्यादा ख़राब हैं जिसका पहले अनुमान लगाया जा रहा था।
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फिर सरपट दौड़ने लगी चीनी इकानोमी, कोरोना वायरस के बाद के माहौल में क्या रेस का अकेला धावक बनेगा चीन?
Jul १६, २०२० ११:५२कोरोना वायरस की महामारी ने सारी दुनिया में हाहाकर मचा दिया है और बहुत से देशों की इकानोमी गंभीर संकट में पड़ गई है या पड़ने वाली है। इसी स्थिति को देखते हुए सरकारों ने गंभीर जोखिम होने के बावजूद लाक डाउन खोल दिया है।
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वीडियो रिपोर्टः ब्रिटेन में नस्लवाद की भड़कती चिंगारी कोरोना महामारी से ज़्यादा ख़तरनाक! ब्रिटेन में लाखों बच्चों के सिर पर मंडरा रहा है ग़रीबी का ख़तरा
Jun १९, २०२० १६:२६ब्रिटिश सरकार के आधिकारिक आंकड़े भी इस देश में बढ़ती ग़रीबी की ओर इशारा करते हैं। ब्रिटिश संसद ने भी हालिया दिनों में यह घोषणा की है कि, ब्रिटेन की साढ़े छ (6.5) करोड़ आबादी में से लगभग 1 करोड़ 40 लाख से अधिक लोग ग़रीबी रेखा के नीचे जीवन व्यतीत कर रहे हैं और कोरोना महामारी ने इन सभी ग़रीबों की स्थिति को और अधिक बदतर कर दिया है।
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वह इंसान जो रिलायंस इंडस्ट्रीज़ का मज़बूत स्तंभ है, जो मुकेश अंबानी का दाहिना हाथ समझा जाता है, बहुत कम बोलता है, बहुत कम नज़र आता है मगर रिलायंस का मज़बूत रणनीतिकार है,
Jun १४, २०२० ०४:०३आर्थिक विषयों पर नज़र रखने वाली मैगज़ीन ब्लूमबर्ग में सरिता राय, पीआर संजाई और बैजू कैलेश का एक लेख प्रकाशित हुआ है जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की एक महत्वपूर्ण हस्ती मनोज मोदी के बारे में बताया गया है।
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कोरोना की मार से नहीं बचेगा कोई... कोरोना ने कौन से युरोपीय देश को किया सब से अधिक गरीब? ब्लूमबर्ग ने अपनी रिपोर्ट में बताया।
Jun ११, २०२० १०:४०ब्लूमबर्ग न्यूज़ एजेन्सी ने स्वीडन की सर्वे करने वाली एक कंपनी के अध्ययन के हवाले से बताया है कि यूनान के लोगों को युरोप में कोरोना की वजह से सब से अधिक आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ा है।