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अरब लेखक: इस्राइल ने बंदियों के आदान-प्रदान को स्वीकार कर हार मान ली / जनता की इच्छा युद्धक मशीन से अधिक मजबूत है
Oct १४, २०२५ १४:४१पार्स टुडे – एक अरब लेखक और राजनीतिक विश्लेषक ने कहा कि ज़ायोनी शासन ने बंदियों के आदान-प्रदान समझौते को स्वीकार कर गहरी हार का सामना किया और यह समझौता साबित करता है कि बंदियों को केवल जनता की इच्छा से मुक्त किया गया न कि सैन्य शक्ति से।
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हमास ने सभी जीवित इज़राइली बंदियों को रिहा कर दिया
Oct १३, २०२५ १४:४९पार्स टुडे – मिस्र के शर्म अल-शेख़ में हुए ग़ाज़ा युद्धविराम वार्ता समझौते के अनुसार हमास आंदोलन ने सभी जीवित इज़राइली बंदियों को रिहा कर दिया है।
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"आहारोनोत" का खुलासा और नेतन्याहू की पर्दादारी / बी-बी हमास के आगे झुक गया है और सच्चाइयों को छिपा रहा है
Oct १३, २०२५ १४:३२पार्स टुडे – इज़राइली अख़बार यदिऊत आहारोनोत ने एक सनसनीखेज़ रिपोर्ट में ग़ाज़ा में हुए संघर्षविराम समझौते के छिपे पहलुओं का पर्दाफाश किया है।
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एक्स पर इज़रायली टैंक की नीलामी
Oct १३, २०२५ १२:२०पार्स टुडे: गज़ा पट्टी के फिलिस्तीनी नौजवान ने एक इजरायली टैंक की तस्वीर पोस्ट करके उसे बेचने का ऐलान किया है।
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गज़ा में ज़ायोनी शासन की हार, मैदाने जंग और राजनीति में प्रतिरोध की जीत
Oct १२, २०२५ १५:०९पार्स टुडे – फिलिस्तीनी प्रतिरोध गुटों ने युद्धविराम वार्ता में अपने और फिलिस्तीनी जनता के वैध हितों को सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
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इज़राइली विश्लेषकों के अनुसार: हमास अब भी ग़ाज़ा में शक्ति का केंद्र है
Oct १२, २०२५ १३:४३पार्स टुडे – ज़ायोनी विश्लेषकों ने कहा कि हमास के शांति और सुरक्षा बनाए रखने वाले बलों की ग़ाज़ा की सड़कों पर तैनाती, युद्धविराम के बाद इस आंदोलन की इस क्षेत्र में एक संगठन और शक्ति केंद्र के रूप में स्थायित्व को दर्शाती है।
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क्यों ग़ाज़ा युद्ध विराम समझौता हमास के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है?
Oct ११, २०२५ १४:३०यह समझौता- जिसमें युद्धविराम, कैदियों की अदला-बदली और इस्राइल की सैन्य वापसी शामिल है- कई कारणों से हमास की ऐतिहासिक जीत समझी जा रही है।
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मिडिल ईस्ट आई: गज़ा में टिकाऊ शांति क़ब्जे की समाप्ति के बिना असंभव
Oct ११, २०२५ १२:४७पार्स टुडे - एक ब्रिटिश मीडिया ने फिलिस्तीनी ज़मीन पर कब्जे की समाप्ति और फिलिस्तीनियों को उनकी ज़मीन पर वापसी के अधिकार की गारंटी को ही मक़बूज़ा इलाक़ों में टिकाऊ शांति स्थापित करने का एकमात्र रास्ता बताया है।
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इंतेफ़ाज़ा से लेकर शर्मुश्शैख़ तक, हमास का 38 वर्षों का प्रतिरोध और फ़िलिस्तीन की स्वतंत्रता की राह में एक मील का पत्थर
Oct १०, २०२५ १५:०५पार्स टुडे – फ़िलिस्तीनी इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हमास जो पहली इंतेफ़ाज़ा के दौरान 1987 में उभरा, दशकों की राजनीतिक और सैन्य लड़ाई के बाद अब शर्मुश्शैख़ में संघर्षविराम के लिए एक नई सहमति पर पहुँचा है।
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ईरान किसी भी ऐसी पहल का समर्थन करता है जो ग़ाज़ा में युद्ध और नरसंहार को रोकती हो, अपराधियों पर मुक़द्दमा चलाया जाना चाहिए
Oct १०, २०२५ १४:०१पार्स टुडे – विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में ज़ायोनी शासन की विश्वासघाती हरकतों के प्रति सतर्क रहने पर ज़ोर देते हुए कहा कि ईरान हमेशा किसी भी ऐसे कदम और पहल का समर्थन करता रहा है जो नरसंहार व युद्ध युद्ध को रोकने, कब्ज़ा करने वाले सैनिकों की वापसी, मानवीय सहायता के आने, फ़िलिस्तीनी क़ैदियों की रिहाई और फ़िलिस्तीनियों के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।