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मक़बूज़ा फ़िलिस्तीन में लाखों की संख्या में शरणार्थी, मगर इस बार फ़िलिस्तीनी नहीं बल्कि ज़ायोनी
Oct २९, २०२३ १३:५१हमास आंदोलन के अलअक़सा तूफ़ान आप्रेशन के बाद ग़ज़ा पट्टी पर इस्राईल की बमबारी जारी है लेकिन इस बीच एक विषय मुख्य रूप से चर्चा में है और वो शरणार्थियों का विषय है।
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ग़ज़्ज़ा युद्ध और मीडिया का गिरता स्तर, सच से दूर लेकिन इस्राईल के साथ, तेलअवीव में बजने वाले सायरनों की आवाज़ें सुनने वालों को फ़िलिस्तीनी बच्चों और माओं की चीख़ें सुनाई नहीं देती!
Oct २८, २०२३ १९:२२सात दशकों से जिस प्रकार पश्चिमी एशिया में मौजूद अवैध इस्राईली शासन फ़िलिस्तीनी बच्चों का नरसंहार कर रहा, इस देश के लोगों की मातृभूमि पर जिस तरह से अवैध क़ब्ज़ा करता जा रहा है और अब वह यह चाहता है कि इस पूरे इलाक़े में फ़िलिस्तीन नाम का कोई देश न रहे। वहीं उसके इस आतंकवाद के ख़िलाफ़ संघर्ष करने वाले लोग ही आज दुनिया की नज़र में आतंकी हो गए हैं। साथ ही उन्हें लाखों बच्चों और महिलाओं के नरसंहार की कोई तस्वीर नहीं दिखाई दे रही है।
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इस्राईल ने ग़ज़ा में ज़मीनी कार्यवाही की तो हमास का प्रभाव और भी बढ़गाः विश्व मीडिया की राय
Oct २६, २०२३ २०:२९ज़ायोनी शासन की सेना इस समय ग़ज़ा पट्टी के पास तैनात है और ज़मीनी कार्यवाही शुरू करने की बात कर रही है और इस विषय पर ज़ायोनी शासन के भीतर गहरे मतभेद की ख़बरें आ रही हैं।
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लेबनान के इस एक मिसाइल ने बढ़ा दी इस्राईल की चिंता
Oct २६, २०२३ १८:२७इस्राईली सेना में बुधवार से एक विषय गंभीर चर्चा का केन्द्र बन गया है। दक्षिणी लेबनान से फ़ायर किए जाने वाले मिसाइल ने ज़ायोनी सामरिक गलियारों को बुरी तरह चौंका दिया है, चौंकने की वजह यह है कि ज़ायोनी विशेषज्ञों ने इस मिसाइल के बारे में कहा है कि यह ज़मीन से हवा में मार करने वाला मिसाइल था जो दक्षिणी लेबनान से फ़ायर किया गया। ज़ायोनी सेना का कहना है कि यह पहला अवसर पर है कि हिज़्बुल्लाह ने इस प्रकार का मिसाइल प्रयोग किया है।
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अपराधों पर उंगी उठाई तो संयुक्त राष्ट्र संघ पर चढ़ दौड़ा इस्राईल, गुटेरस की इस बात ने जाली ज़ायोनी शासन को हिलाकर रख दिया
Oct २६, २०२३ १६:१२फ़िलिस्तीनी मूल के विख्यात अरब टीकाकार अब्दुल बारी अतवान का जायज़ा ग़ज़ा के हालात पर सुरक्षा परिषद की बैठक में संयुक्त राष्ट्र संघ के महासिचव एंटोनियो गुटेरस के बयान से इस्राईल के विदेश मंत्री एली कोहेन तिलमिलाकर रह गए और बहुत कुछ बक डाला। कोहेन ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव पर अनभिज्ञता का आरोप लगाया और कहा कि वो किसी और ही दुनिया में रह रहे हैं।
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दाइश, अलक़ायदा और अन्य आतंकवादी गुटों का असली चेहरा आया सामने, केवल मुसलमानों के नरसंहार की योजना का नाम है इस्लामी आतंकवाद!
Oct २५, २०२३ १४:५९पिछले कुछ दशकों से पूरी दुनिया में आतंकवाद की ऐसी लहर चली कि हर कोई उससे ख़ुद को प्रभावित होता हुआ देख रहा था। वहीं ख़ास बात यह थी कि इस आतंकवाद के साथ इस्लाम का शब्द भी जोड़ दिया गया था। देखते ही देखते अंतर्राष्ट्रीय मंच पर इस्लामी आतंकवाद को लेकर चर्चा होने लगी। इसका असर यह हुआ कि विश्वभर में लोग मुसलमानों को आतंकी के तौर पर देखने लगे। लेकिन इस आतंकवाद ने अगर सबसे ज़्यादा किसी को नुक़सान पहुंचाया तो वह कोई और नहीं बल्कि मुसलमान और इस्लामी देश ही हैं।
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ग़ज़्ज़ा में ज़मीनी कार्यवाही से क्यों डरे हुए हैं नेतन्याहू, क्या अपनों से दग़ा का है ख़तरा है या हिज़्बुल्लाह का भूत सता रहा है?
Oct २४, २०२३ १९:१९ज़ायोनी मीडिया और हल्क़ों का कहना है कि ग़ज़्ज़ा पर ज़मीनी हमले के बारे में नेतेन्याहू फ़ैसला नहीं कर सकते और वह बहुत बुरी तरह शंका का शिकार हैं।
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लाशों के ढेर, घायलों की चीख़-पुकार और चुप-चाप देखता विश्व समाज, अनगिनत तुफ़ानों के लिए तैयार रहे दुनिया!
Oct २३, २०२३ १५:३९इन दिनों फ़िलिस्तीन में साम्राज्यवादी शक्तियां जो आतंकी इस्राईल के साथ मिलकर कर रही हैं वह एक ऐसी त्रास्दी है कि जिसके बारे में भी सोच कर रूह कांप जाती है। कोरोना महामारी के नाम पर दुनिया को पूरी तरह रोक देने वाला संयुक्त राष्ट्र संघ ग़ाज़ा के हालात पर बेबस नज़र आ रहा है। आख़िर ऐसा क्या है कि फ़िलिस्तीनी बच्चों के नरसंहार पर विश्व के ज़्यादातर देश अपनी आंखें मूंदे हुए हैं? यह एक ऐसा सवाल है कि जिसके जवाब के साथ ही दुनिया में शांति स्थापित हो सकती है।
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फ़िलिस्तीन में जारी जंग का अस्ली ज़िम्मेदार तो अमरीका हैः अमरीकी मैगज़ीन की समीक्षात्मक रिपोर्ट
Oct १९, २०२३ २०:२९अमरीकी मैगज़ीन फ़ारेन पालीसी ने अपने लेख में अमरीकी सरकार पर गंभीर आरोप लगाया है कि इस समय फ़िलिस्तीन में जारी जंग का अस्ली कारण अमरीका है।
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इस्राईल और रेज़िस्टेंस फ़ोर्सेज़ उस प्वाइंट पर पहुंच चुके हैं जहां किसी एक पक्ष को जंग जीतना लाज़िमी हो गया है
Oct १९, २०२३ १७:३८अलजज़ीरा की डिबेट अलजज़ीरा टीवी चैनल ने एक डिबेट करवाई जिसमें ग़ज़ा के ताज़ा हालात पर टीकाकारों ने अपनी राय रखी। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए टीकाकारों का कहना यह था कि अब नौबत यह हो गई कि ज़ायोनी शासन और रेज़िस्टेंस फ़ोर्सेज़ में किसी एक पक्ष का विजयी होनी बेहद ज़रूरी हो गया है।