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क्या व्हाइट हाउस छोड़ने से पहले ट्रम्प ईरान पर हमला कर सकते हैं?
Nov २१, २०२० १६:०३पिछले हफ़्ते न्यूयॉर्क टाइम्स ने पेंटागन के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया था कि अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने हाल ही में पेंटागन से ईरान के परमाणु संयंत्रों पर बमबारी करने के संभावित विकल्पों के बारे में पूछा था। हालांकि उनके सैन्य सलाहकारों ने ऐसे किसी भी क़दम के प्रति चेतावनी देते हुए कहा था कि यह हमला एक व्यापक युद्ध का रूप ले सकता है।
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मानवाधिकारों का हनन, ख़ाशुक़जी हत्याकांड और यमन की बर्बर जंग बन गए सऊदी अरब के गले की फांस...जी-20 शिखर सम्मेलन को लेकर संजोए गए सपने हवा होते जा रहे हैं
Nov २१, २०२० १२:०२सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ शनिवार को जी-20 शिखर सम्मेलन का उद्घाटन कर रहे हैं। इस वर्चुअल समिट में इस प्रभावशाली गुट के राष्ट्राध्यक्षों को भाग लेना है लेकिन सम्मिलित के स्तर को लेकर संदेह के बादल छा गए हैं।
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चीनी अख़बार का सुझाव, भारत को अब ज़रूरत है कि अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारना बंद करे और ज़रा अक़्ल से काम ले, हालात का संभालने के लिए अभी ज़्यादा देर नहीं हुई!
Nov २१, २०२० ०७:३१चीन की सत्ताधारी पार्टी के अख़बार ग्लोबल टाइम्ज़ ने शिनहुआ युनिवर्सिटी में रणनैतिक मामलों के विशेषज्ञ कियान फ़ेंग का एक संपादकीय लेख प्रकाशित किया है जिसमें भारत को यह सुझाव दिया गया है कि वह ख़ुद को नुक़सान पहुंचाना बंद करे और कुछ समझदारी दिखाए।
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सीरिया पर हमला करके इस्राईल क्यों अपनी ही पीठ थपथपाता है, क्या हमला करके भाग निकलने पर ख़ुश है इस्राईल, क्या हिज़्बुल्लाह सही वक़्त की तलाश में है???
Nov २०, २०२० १९:४५सीरिया में अनेक स्थानों पर हमले के बाद इस्राईल खुलकर हमले की ज़िम्मेदारी स्वीकार करता है और इस बार कुछ अलग हुआ और इस्राईल ने जहां ज़िम्मेदारी स्वीकार की वहीं इस्राईल के युद्धमंत्री बेनी गान्ट्ज़ जैसे इस्राईली सेना के कमान्डरों ने इस पर ख़ुशियां भी मनाईं लेकिन यहां पर यह सवाल पैदा होता है कि इस हमले पर इतना ज़्यादा ख़ुशी क्यों जबकि यह इस्राईल का सीरिया पर कोई पहला हमला तो नहीं है?
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यमन-सऊदी अरब सीमा पर बफ़र ज़ोन बनाने का क्या है माजरा? क्या बाइडन के वाइट हाउस में क़दम रखने से पहले युद्ध बंद करने की यह गंभीर कोशिश है?
Nov २०, २०२० १८:०३इस समय सऊदी अरब प्रशासन को जो चीज़ सबसे ज़्यादा पीड़ा पहुंचा रही है वह यमन की सेना और अंसारुल्लाह आंदोलन की ओर से राजधानी रियाज़ पर किए जाने वाले मिसाइल हमले हैं क्योंकि सऊदी अरब की मेज़बानी में जी-20 का शिखर सम्मेलन होने जा रहा है।
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दुनिया भर के 13 देशों में तुर्की की सेना की उपस्थिति, क्या है लक्ष्य?
Nov २०, २०२० १५:२४वैसे तो दुनिया के कुछ हिस्सों में तुर्की की सैन्य उपस्थिति नाटो के मिशन का हिस्सा है, लेकिन हाल के वर्षों में बिना अनुमति के कई देशों तुर्क सेना की उपस्थिति और विदेशी धरती पर अपने सैन्य ठिकानों को स्थापित करने का प्रयास तुर्की का अब एक लक्ष्य बनता जा रहा है।
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अमेरिकी सेना का अफ़ग़ानिस्तान से निकलना, साज़िश या मजबूरी? अफ़ग़ान राष्ट्र को किसने सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया?
Nov २०, २०२० ११:४५अमेरिका जिसने अफ़ग़ानिस्तान में कथित तौर पर शांति स्थापित करने के नाम पर विश्व के कई देशों के साथ संगठन बनाकर हमला किया था। लेकिन आज वही अमेरिका अफ़ग़ानिस्तान को और ज़्यादा अशांत बनाकर ख़ुद को वहां से भाग लेना चाहता है।
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सऊदी अरब ने कहा हम केवल इसलिए अपने क़ानून नहीं बदल सकते कि कोई व्यक्ति इन्हें पसंद नहीं करता...क्या बाइडन के ख़िलाफ़ रियाज़ सरकार ने शुरू कर दी है अपनी लड़ाई?
Nov २०, २०२० ०८:१२जैसे जैसे जी-20 शिखर सम्मेलन की तारीख़ क़रीब आ रही है कि सऊदी अरब का लहजा धीरे धीरे कठोर होता जा रहा है। सऊदी अरब को इस शिखर सम्मेलन का बड़ा इंतेज़ार था कि इससे वह अपनी छवि सुधारने की कोशिश करेगा लेकिन कोरोना वायरस की महामारी ने सारा खेल बिगाड़ दिया। यह सम्मेलन अब वर्चुअल होगा जबकि मानवाधिकारों के हनन के गंभीर आरोपों के कारण कई देशों ने अपने प्रतिनिधित्व का स्तर घटा दिया है।
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चीन के बारे में रखती हैं बेहद कठोर विचार...सऊदी अरब से दो टूक बात करने की पक्षधर...अमरीका की पहली महिला रक्षा मंत्री बन सकती हैं मिशेल फ़्लोरन्वाय
Nov १९, २०२० १७:२८अमरीका में वैसे तो बड़े बड़े पदों पर महिलाएं नियुक्त हुई हैं मगर उप राष्ट्रपति पद की तरह रक्षा मंत्री का पद भी एसा है जिस पर अब से पहले तक कोई महिला नहीं बैठी मगर इस बार जैसे कमला हैरिस रिकार्ड बना रही हैं और अमरीका के उप राष्ट्रपति का पद संभाल रही हैं, अटकले हैं कि उसी तरह मिशेल फ़्लोरन्वाय अमरीका की पहली महिला रक्षा मंत्री भी नियुक्त हो सकती हैं।
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ट्रम्प के घटकों के लिए डरावना सपना हैं जो बाइडन
Nov १९, २०२० १३:३५अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प चुनाव हार गए लेकिन यह केवल उनकी हार नही हैं बल्कि इससे फ़ार्स खाड़ी के तानाशाहों के सपनों को भी गहरा आघात पहुंचा है।