ट्रम्प के घटकों के लिए डरावना सपना हैं जो बाइडन
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अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प चुनाव हार गए लेकिन यह केवल उनकी हार नही हैं बल्कि इससे फ़ार्स खाड़ी के तानाशाहों के सपनों को भी गहरा आघात पहुंचा है।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Nov १९, २०२० १७:०५ Asia/Kolkata
  • ट्रम्प के घटकों के लिए डरावना सपना हैं जो बाइडन

अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प चुनाव हार गए लेकिन यह केवल उनकी हार नही हैं बल्कि इससे फ़ार्स खाड़ी के तानाशाहों के सपनों को भी गहरा आघात पहुंचा है।

आप अगर मध्यपूर्व के इलाक़े में ट्रम्प के क़रीबी घटकों को ग़ौर से देखें तो आपको महसूस होगा उनमें बेचैनी फैल गई है। इस्राईली प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतनयाहू जल्दी जल्दी समझौते करने में लगे हैं ताकि जनवरी में जो बाइडन के सत्ता संभालने से पहले ही यह काम पूरा हो जाए।

मिस्र के तानाशाह अब्दुल फ़त्ताह अलसीसी 60 हज़ार राजनैतिक क़ैदियों की रिहाई के बारे में विचार करने लगे हैं कि इनमें से कितने क़ैदियों को तत्काल रिहा किया जा सकता है।

मिस्र के टीवी चैनल के एंकर नशात अलदीही ने अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान जो बाइडन पर बहुत तेज़ हमले किए थे। उन्होंने यहां तक कहा था कि जो बाइडन अमरीका के सबसे बूढ़े राष्ट्रपति होंगे इसलिए वह इस पद के लिए उचित नहीं हैं। मगर जैसे ही अमरीकी मीडिया ने जो बाइडन को निर्वाचित राष्ट्रपति कहना शुरू कर दिया अलदीही ने फ़ौरन बाइडन के बारे में अपना स्वर बदल दिया।

लंदन में सऊदी अरब के राजदूत ख़ालिद बिन बंदर ने भी गार्डियन अख़बार को इंटरव्यू देते हुए कहा कि जी-20 की शिखर बैठक से पहले रियाज़ सरकार महिला कार्यकर्ताओं की रिहाई पर विचार कर सकती है। एक दिन बाद उन्होंने बीबीसी को फ़ोन करके गार्डियन अख़बार की इस रिपोर्ट का खंडन किया मगर जानकार कहते हैं कि गार्डियन अख़बार इस तरह की ग़लतियां नहीं करता।

यही नहीं सऊदी अरब के नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ भी तुर्की के बारे में कुछ मीठी बातें भी करने लगे थे। तुर्की के इज़मीर में भूकंप आया तो किंग सलमान ने फ़ौरन सहायता भेजी। इसके बाद यह भी ख़बर आई कि बहरैन के नरेश हमद बिन ईसा आले ख़ालीफ़ा और तुर्क राष्ट्रपति अर्दोग़ान की बातचीत हुई है। यह बातचीत भी सऊदी सरकार की ओर से बहरैन को ग्रीन सिग्नल मिले बग़ैर संभव नहीं है।

सऊदी पत्रकार जमाल ख़ाशुक़जी की इस्तांबूल में हत्या के बाद तुर्क सरकार ने इस मुद्दे को हर स्तर पर व्यापक रूप से उठाया और इसे हरगिज़ ठंडे बस्ते में जाने नहीं दिया जबकि सऊदी सरकार एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रही थी कि यह मुद्दा दबा दिया जाए। इसी प्रकरण के चलते सऊदी अरब और तुर्की के संबंध बहुत ख़राब हो गए यहां तक कि सऊदी अरब में तुर्की के उत्पादों का बहिष्कार कर दिया गया।

ख़ुद सऊदी अरब के भीतर क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के विरोधियों में भी नया उत्साह भर गया है क्योंकि उन्हें लगता है कि बाइडन बिन सलमान के पर ज़रूर कतर देंगे।

मुहम्मद बिन सलमान ने क्राउन प्रिंसा का ओहदा हथियाने के लिए पूर्व क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन नाएफ़ की साख ध्वस्त की और उन पर बहुत सारे आरोप लगाए। पद से हटाए जाने के बाद से बिन नाएफ़ हिरासत में बताए जाते हैं।

मुहम्मद बिन नाएफ़ अमरीकी संस्थाओं विशेष रूप से सीआईए के बहुत क़रीबी माने जाते हैं। बिन सलमान ने अपने चचेरे भाई को इस बड़े ओहदे से बर्ख़ास्त करने से पहले ट्रम्प के दामाद और सलाहकार जेर्ड कुशनर को फ़ोन किया और ट्रम्प की स्वीकृति मिल जाने के बाद बिन नाएफ़ को पद से हटा दिया।

जो बाइडन बिन नाएफ़ को व्यक्तिगत रूप से जानते हैं और बिन नाएफ़ के बहुत क़रीबी सलाहकार और इंटेलीजेन्स रहस्यों के ब्लैक बाक्स समझे जाने वाले सअद अलजब्री इस समय कनाडा में हैं और उन्होंने बिन सलमान सहित कई सऊदी अधिकारियों के ख़िलाफ़ अमरीका की अदालत में मुक़द्दमा दायर किया है।

बिन सलमान को सबसे ज़्यादा डर इस बात का है कि जो बाइडन के सत्ता संभालने के बाद सीआईए की भूमिका बड़े मामलो में बढ़ जाएगी और मुहम्मद बिन सलमान को साफ़ नज़र आ रहा है कि उनका सब कुछ अब जो बाइडन के रहमोकरम पर है।

इस्लामी गणतंत्र ईरान का परमाणु समझौता भी जो बाइडन की सरकार में एक महत्वपूर्ण विषय रहेगा। बाइडन इस समझौते के वास्तुकारों में गिने जाते हैं जिससे ट्रम्प निकल गए थे। जो बाइडन निश्चित रूप से ईरान पर अधिकतम दबाव डालने की ट्रम्प की नीति में बदलाव करेंगे क्योंकि उन्हें कई साल पहले यक़ीन हो चुका है कि इस प्रकार की रणनीति ईरान के संबंध में कारगर नहीं है।

डेविड हर्स्ट

डिल ईस्ट आई

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